Kanpur News: 5600 करोड़ मामले में मनी लांड्रिंग, ITC चोरी व सट्टेबाजी पर निगाह, 14 आरोपित सिर्फ मोहरा, बड़े सिंडिकेट की आशंका
कानपुर और उन्नाव में 5,600 करोड़ रुपये के साइबर फर्जीवाड़े में पुलिस अब मनी लांड्रिंग, इनपुट टैक्स क्रेडिट चोरी और ...और पढ़ें

सरगना शाहजेब, सलमान।
HighLights
कानपुर-उन्नाव में 5,600 करोड़ के साइबर फर्जीवाड़े की जांच
मनी लांड्रिंग, आईटीसी चोरी और हवाला नेटवर्क पर पुलिस की निगाह
14 आरोपी मोहरे, बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के तार उजागर
जागरण संवाददाता, कानपुर। कानपुर और उन्नाव में फर्जी स्लाटर व स्क्रैप कारोबार के नाम पर पंजीकृत 77 कंपनियों के जरिए हुए 5,600 करोड़ रुपये के साइबर फर्जीवाड़े में पुलिस अब मनी लांड्रिंग, इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) चोरी और हवाला नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। शुरुआती सत्यापन में पुलिस को कई कंपनियों के दिए गए पते गलत मिले हैं, जिससे इनके फर्जी होने की पुष्टि हो रही है। पुलिस का मानना है कि पकड़े गए सरगना शाहजेब, सलमान और इकलाख समेत 14 आरोपी सिर्फ मोहरा हैं और उनके पीछे एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है, जिसमें कुछ वकीलों के शामिल होने की भी आशंका है।
जांच के दौरान पुलिस को 17 ऐसे बैंक खाते मिले हैं जिनमें 50 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेनदेन हुआ है। इनमें से तीन खातों में 250 से 300 करोड़ रुपये तक भेजे गए। ये खाते आइसीआइसीआइ, एचडीएफसी, एसबीआइ और बैंक आफ बड़ौदा समेत 14 प्रमुख बैंकों में खोले गए थे। दिल्ली पुलिस के साइबर सेल के एसीपी नीरज चौधरी ने बताया कि ठग अक्सर गरीब लोगों के नाम या चोरी के पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर ऐसी फर्जी कंपनियां बनाते हैं, जिनका जमीन पर कोई व्यापार नहीं होता।
लोगों से ठगी गई रकम सीधे इन बोगस कंपनियों के खातों में जमा कराई जाती है और फिर जांच से बचने के लिए इसे कई अन्य खातों, क्रिप्टोकरेंसी या हवाला के जरिये विदेश में मुख्य आरोपितों तक पहुंचा दिया जाता है। कानून में आपराधिक गतिविधियों से कमाए गए काले धन को सफेद करना मनी लांड्रिंग कहा जाता है। चूंकि साइबर ठगी में संगठित रूप से फर्जी फर्मों का उपयोग होता है, इसलिए इसमें मनी लांड्रिंग व संगठित अपराध की धाराएं लगाई जाती हैं।
इस अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय गिरोह के तार नेपाल, तुर्किए और उज्बेकिस्तान तक फैले हुए हैं। मामले में उन्नाव के सेवानिवृत्त दारोगा के बेटे इखलाख के चार खातों से 89 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन सामने आया है। वर्ष 2024 में उसके बैंक आफ बड़ौदा की पटेल नगर शाखा में आठ दिन में 180 करोड़ का लेनदेन होने पर पुलिस ने पूछताछ की थी पर दारोगा पिता व ससुर की पैरवी पर छोड़ दिया गया था।
इखलाख और उसका भाई कई बार दुबई भी जा चुके हैं, जिसे देखते हुए पुलिस सभी आरोपियों की ट्रैवल हिस्ट्री खंगाल रही है। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के मुताबिक मुख्य आरोपियों पर इनाम घोषित करने की तैयारी की जा रही है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों को चिह्नित कर जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
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