Kanpur 5600 Crore Case: 18 राज्यों में फैला नेटवर्क, 9 खातों में 100 करोड़ से ज्यादा लेनदेन, इन बड़ी फर्मों का सामने आया नाम
कानपुर में साइबर ठग साहजेब और सलमान की गिरफ्तारी से 5600 करोड़ रुपये का विशाल साइबर ठगी नेटवर्क सामने आया ...और पढ़ें

ये फोटो एआई जनरेटेड है।
HighLights
कानपुर में 5600 करोड़ रुपये का साइबर ठगी नेटवर्क उजागर
18 राज्यों में फैला, हजारों खातों से हुआ करोड़ों का लेनदेन
फर्जी फर्मों, हवाला कारोबार और बैंक अधिकारी भी शामिल
गौरव दीक्षित, कानपुर। साइबर ठग साहजेब और सलमान की गिरफ्तारी के बाद साइबर ठगी का ऐसा नेटवर्क सामने आया है, जिसे देखकर पुलिस भी हैरान है। 25 लाख रुपये की ठगी की जांच बढ़ते-बढ़ते 5600 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। बड़ी बात यह है कि यहां आंकड़ा जब है, जब पुलिस ने केवल कानपुर और उन्नाव के खाता धारकों को खंगाला है।
अधिकारियों का दावा है कि अगर इस जांच को आगे बढ़ाया जाए तो ठगी की रकम और भी ज्यादा निकलेगी। पुलिस के मुताबिक एक खाते में तीन सालों के दौरान सर्वाधिक 295.31 करोड़ रकम जमा हुई है। यह ठग केवल आम लोगों की जेब ही खाली नहीं कर रहे थे, बल्कि फर्जी फर्मों के माध्यम से आइटीसी चोरी करके सरकार को भी चूना गले रहे थे।
पुलिस ने 19 अगस्त 2026 को मोहम्मद सादाब निवासी जूही की तहरीर पर साइबर ठगी का एक मुकदमा दर्ज किया था, जिसमें साहजेब, सलमान और आरिफ को आरोपित बनाया गया था। सिविल ठीक कराने का झांसा देकर 25 लाख रुपये ठगे गए। पुलिस के मुताबिक जब इस मामले की जांच शुरू की तो शुरुआती जांच में 78 बैंक खाते सामने आए।
इसके बाद पुलिस ने इन खातों से आगे भेजी गई रकम को खंगाला और एक के बाद एक करते हुए नौ लेयर तक पैसे का लेनदेन पकड़ा। इस तरह से पुलिस ने करीब दस हजार बैंक खातों को खंंगाला। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के मुताबिक इन खातों में करीब 5600 करोड़ रुपया जमा किया गया। अगर निकासी की बात करें तो यह रकम दो गुणी हो जाएगी।
तमाम खाते ऐसे मिले हैं, जिनमें पैसा नकद निकाला गया और उसे हवाला कारोबार में खपाया गया। पुलिस के मुताबिक तीन खातों में 200 करोड़ से ज्यादा, छह खातों में 100 करोड़ से ज्यादा, आठ खातों में 50 से 100 करोड़ और 41 खातों में एक से 50 करोड़ की रकम का जमा कराना पाया गया है। इसके नीचे के खातों की संख्या हजारों में है।
पुलिस के मुताबिक एक खाते में सर्वाधिक 295.31 करोड़ रुपये एसके इंटरप्राइजेज का है। हालांकि इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर मोहम्मद अमान के एक खाते में 279 करोड़ रुपये जमा हैं, मगर इसके अन्य खातों में मिलाकर कुल 559 करोड़ रुपये जमा किए गए। वहीं फरार आरोपित इखलाख हुसैन के पांच खातों में 41 करोड़ रुपये, आरिफ के तीन खातों में 39 करोड़ रुपये और एहतेश्याम के खाते में 16 करोड़ रुपये मिले हैं।
एसबीआइ का अफसर भी जांच के दायरे में
इस सनसनीखेज जांच में भी बैंक के अधिकारी सामने आ रहे हैं। सामने आया है कि फरार आरोपित आरिफ ने एसबीआइ से दो करोड़ रुपये का लोन लिया था। यह लोन फर्जी दस्तावेजों की मदद से लिया गया। इस काम में किसी मनीष नाम के अधिकारी ने उसकी मदद की थी। मनीष ने इस काम की एवज में उससे 20 लाख रुपये की रिश्वत ली थी। पुलिस इसकी भी अलग से जांच कर रही है।
यह हैं सबसे बड़े ठगों के 9 खाते
- एसके इंटरप्राइजेज, देहली सुजानपुर और चमनगंज: 295.31 करोड़ रुपये
- मोहम्मद अमान, बेकनगंज: 279 करोड़ रुपये
- एएन इंटरप्राइजे, कोपरगंज, प्रोपराइटर चिरागुद्दीन: 211.35 करोड़ रुपये
- रायल इंटर प्राइजेज, शिवकटरा, प्रोपराइटर हरिओम: 171.22 करोड़ रुपये
- लक्ष्मी ट्रेडर्स, प्रोपराइटर विमी तिवारी: 156.25 करोड़ रुपये
- श्री बिहारी ट्रेडर्स, देहलीसुजानपुर, प्रोपराइटर गोविंद गुप्ता: 145.25 करोड़ रुपये
- मैसर्स ओवेस एग्जिम, नई सड़क, प्रोपराइटर ओवैश खान: 131.69 करोड़ रुपये
- एचएम इंटरनेशनल, तलाक महल, प्रोपराइटर मोहम्मद साजिद: 112 करोड़ रुपये
- एनजी इंटर प्राइजेज, काकादेव, प्रोपराइटर मन्नू अरोड़ा: 109 करोड़ रुपये
18 राज्यों में नेटवर्क
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ठगी और निवेश के तरीके
आनलाइन ठगी, गेमिंग, डिजिटल अरेस्ट, आइपीएल मैचों में सट्टा, निवेश का झांसा देकर ठगी, बोगस फर्म में पैसा लगाकर आइटीसी चोरी, स्क्रैप कारोबार में निवेश, स्लाटर हाउस में निवेश। यह भी सामने आया है कि आरोपित शहर में स्लाटर हाउस और स्क्रैप के धंधे में सर्वाधिक बोगस फर्में बनाकर कमाई का काला कारोबार कर रहे थे।
पुलिस के नाम भी निकाले थे 15 लाख रुपये
पुलिस आयुक्त के मुताबिक सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपितों ने खुद को पुलिस के चंगुल से बचने के लिए भी रिश्वत की पेशकश की थी। बफा नाम के एक व्यक्ति से किसी जुनैद को 15 लाख रुपये दिए गए थे, ताकि पुलिस उन लोगों को छोड़ दे। तीन लाख रुपये अधिवक्ता को देने के लिए दिए गए थे।
ये भी जानें
- तीन खातों में 200 करोड़ से ज्यादा रकम
- छह खातों में 100 करोड़ से ज्यादा रकम
- आठ खातों में 50 से 100 करोड़ की रकम
- 41 खातों में एक से 50 करोड़ की रकम
- 10000 से ज्यादा खातों में जमा है ठगी का पैसा
- 18 राज्यों में मिला है नेटवर्क
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