रक्षा क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भर बनने की राह में एक और कदम बढ़ा, तेजस एयरक्राफ्ट को कानपुर देगा स्वदेशी सुरक्षा कवच
कानपुर की ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड ने तेजस एयरक्राफ्ट के लिए स्वदेशी हाइब्रिड ब्रेक पैराशूट विकसित किया है। यह पैराशूट आपात स्थिति में 340 किमी प्रति ...और पढ़ें

तेजस एलसीए के पीछे लगा हाइब्रिड ब्रेक पैराशूट। ओपीएफ
विवेक मिश्र, कानपुर। अब तेजस एयरक्राफ्ट को कानपुर स्वदेशी सुरक्षा कवच देगा। इससे रक्षा क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भर बनने की राह में एक कदम और आगे बढ़ेगा। भारतीय वायुसेना के लाइट कांबैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस को सुरक्षित लैंड कराने के लिए रक्षा मंत्रालय के पीएसयू ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड (जीआइएल) ने आयुध पैराशूट निर्माणी, कैंट में हाइब्रिड ब्रेक पैराशूट बनाया है। इसका सफल परीक्षण भी हो चुका है। ये हाइब्रिड ब्रेक पैराशूट सिस्टम लड़ाकू जेट को आपात स्थिति में 340 किमी प्रति घंटा की गति में भी छोटे रनवे में सुरक्षित लैंडिंग कराने में मददगार होगा।
यह पैराशूट 'यूनि-क्रास' मेन कैनोपी डिजाइन पर आधारित है। इसका विस्तार 5.75 मीटर है व कुल 17 वर्ग मीटर के क्षेत्र को कवर करता है। इस खास बनावट की वजह से यह हवा के दबाव को कुशल तरीके से झेलने में सक्षम है। विमान को स्थिर रखते हुए उसकी गति को तेजी से कम करता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता महज 10 किग्रा का वजन है। यह पैराशूट लड़ाकू विमान की तेज गति को संभालता है। यह सिस्टम युद्ध के मैदान में पायलटों के आत्मविश्वास को बढ़ाएगा व छोटे रनवे पर भी विमान की सफल लैंडिंग सुनिश्चित करेगा। इस पहल से भारत की रूस पर से निर्भरता नहीं रहेगी।
सात साल पहले ओपीएफ पैराशूट बनाने की तकनीक
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने सात साल पूर्व आयुध पैराशूट निर्माणी यानी ओपीएफ को तेजस लड़ाकू विमान के लिए ब्रेक पैराशूट बनाने की तकनीकी हस्तांतरित की थी। इसके बाद से ओपीएफ में भारतीय वायुसेना और हिन्दुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड की मांग पर ब्रेक पैराशूट की आपूर्ति की जाती रही है। अब रक्षा उत्पादन विभाग से 300 हाइब्रिड ब्रेक पैराशूट के आर्डर को लेकर ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड, रक्षा उत्पादन विभाग और एचएएल के बीच वार्ता चल रही है। सब कुछ सही रहा तो जल्द ही पैराशूट सिस्टम के आर्डर मिल सकते हैं।

एमसी बालासुब्रमणियम, सीएमडी, जीआइएल। ओपीएफ
तेजस एलसीए के लिए हाइब्रिड ब्रेक पैराशूट सिस्टम बनाना संस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि है। जीआइएल की इकाई ओपीएफ के पास ये पैराशूट सिस्टम बनाने की तकनीकी दक्षता है। आत्मनिर्भर भारत मुहिम में ये उपलब्धि अहम योगदान देगी। नए आर्डर के लिए वार्ता चल रही है।
एमसी बालासुब्रमणियम, सीएमडी, ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड।
ये है खासियत
- फैब्रिक नायलान से बनी है कैनोपी
- 10 किलोग्राम पैराशूट का वजन है।
- यूनि-क्रास डिजाइन में बनाई गई है कैनोपी।
- आठ साल है पैराशूट की मियाद
- 340 किमी प्रति घंटे की गति में इमरजेंसी लैंडिंग कराने में है सक्षम।

कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।