न्यू ईयर पार्टी में 11 दोस्तों ने कर दी युवक की हत्या, परिवार संग की धक्का-मुक्की; एक महीने बाद दर्ज हुई Zero FIR
Kanpur कानपुर के नजीराबाद थाना क्षेत्र में एक होटल में युवक का शव मिला था। वह दोस्तों के साथ न्यू ईयर की पार्टी करने गया था। स्वजन ने दोस्तों पर हत्या का आरोप लगाया था। पुलिस के सुनवाई न करने पर मृतक की चाची ने कोर्ट की शरण लेकर चमनगंज थाने में जीरो एफआइआर का आदेश कराकर मुकदमा दर्ज करवा दिया।
जागरण संवाददाता, कानपुर। नजीराबाद के गुमटी स्थित होटल में दोस्तों के साथ न्यू ईयर पार्टी मनाने के दौरान एक युवक की मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ब्रेन हैमरेज से मौत की बात सामने आई थी। हालांकि स्वजन ने दोस्तों पर हत्या का आरोप लगाया था।
पुलिस के सुनवाई न करने पर मृतक की चाची ने कोर्ट की शरण लेकर चमनगंज थाने में जीरो एफआइआर का आदेश कराकर मुकदमा दर्ज करवा दिया। जिसके आधार पर चमनगंज पुलिस ने चार नामजद समेत 11 दोस्तों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की। मुकदमे को नजीराबाद थाने में जांच के लिए ट्रांसफर कर दिया।
कैफे में काम करता था युवक
चमनगंज भन्नानापुरवा निवासी दिव्यांग अवधेश गुप्ता का 23 वर्षीय इकलौता बेटा गौरव स्वरूप नगर के एक कैफे में काम करता था। परिवार में मां संगीता है। चमनगंज हिना मैरिज हॉल के सामने रहने वाली चाची शिखा गुप्ता ने बताया कि एक जनवरी की रात गौरव न्यू ईयर पार्टी मनाने के लिए अपने दोस्त रितिक, सत्यम, कुनाल, उदय व अन्य के साथ गुमटी स्थित एएसवी ग्रांड होटल में गए थे।
पार्टी में दोस्तों ने कर दी युवक की हत्या
शिखा गुप्ता का आरोप है कि पार्टी के दौरान सभी दोस्तों ने मिलकर गौरव की हत्या कर दी। जानकारी पाकर जब वह लोग पहुंचे तो आरोपितों ने उनके साथ भी झगड़ा करते हुए जान से मारने की धमकी दी। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ब्रेन हैमरेट से मौत की बात सामने आई है। इसके बावजूद स्वजन संतुष्ट नहीं हुए। गौरव की चाची शिखा गुप्ता ने मामले को लेकर कोर्ट की शरण ली और चमनगंज थाने में जीरो एफआइआर दर्ज कराने का आदेश करवा लिया।
इन पर दर्ज हुआ मुकदमा
चमनगंज थाना प्रभारी संजय राय ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर रितिक, सत्यम, कुनाल, उदय व सात अज्ञात दोस्तों समेत 11 के खिलाफ हत्या, धमकाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। घटनास्थल नजीराबाद थानाक्षेत्र का होने के चलते मुकदमा नजीराबाद पुलिस को जांच के लिए ट्रांसफर कर दिया गया है।
क्या होती है जीरो एफआइआर
जीरो एफआइआर सामान्य एफआइआर की तरह ही होती है। हालांकि, इसका एक सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें किसी भी तरह के अधिकार क्षेत्र की अड़चनें पैदा नहीं होती हैं। आमतौर पर, जब किसी भी थाने में पुलिस एफआइआर तभी लिखती है, जब अपराध उसे थानाक्षेत्र के अंतर्गत हुआ हो जबकि जीरो एफआइआर में ऐसा नहीं होता है।
इसमें पीड़ित व्यक्ति या उस व्यक्ति का कोई जानकार, रिश्तेदार या कोई चश्मदीद भी किसी भी थाने में जाकर एफआइआर दर्ज करवा सकता है। इसे ही जीरो एफआइआर कहा जाता है। जीरो एफआइआर के आधार पर पुलिस अपनी कार्रवाई या जांच शुरू कर देती है। इसके बाद वह केस संबंधित प्रदेश, जिले अथवा थानाक्षेत्र को ट्रांसफर कर देती है।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।