Health Alert: एंटीबायोटिक का ज्यादा उपयोग है जानलेवा, कानपुर के माइक्रोबायोलाजिस्ट ने जताई चिंता
Health Alert: जीएसवीएम के माइक्रोबायोलाजिस्ट डा. विकास मिश्रा ने एंटीबायोटिक के अत्यधिक उपयोग को 'साइलेंट किलर' बताया है। उन्होंने कहा कि यह शरीर की र ...और पढ़ें

जीएसवीएम के माइक्रोबायोलाजिस्ट डा. विकास। जागरण
जागरण संवाददाता, कानपुर। Interview: मनमाने ढंग से एंटीबायोटिक (Antibiotic) दवा लेना शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है। यह साइलेंट किलर की तरह शरीर के जीन में बदलाव कर जानलेवा स्थिति तक पहुंचा रहा है। इसी कारण दुनिया भर में सबसे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंट के मामले भारत में मिल रहे हैं।
हमारे यहां एंटीबायोटिक दवा को लेकर कोई पालिसी नहीं है। जबकि दूसरे देशों में एंटीबायोटिक दवा का प्रयोग डाक्टर मरीज की कल्चर जांच के बाद ही जरूरी एंटीबायोटिक का चुनाव करता है। इससे परे हमारे यहां सामान्य बुखार, जुकाम और खांसी तक में एंटीबायोटिक दवा देने की प्रथा चल रही है। हालांकि, इसमें डाक्टर के साथ जिम्मेदार हम खुद हैं, जो खुद ही मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक दवा लेकर खाते हैं और शरीर में बिना कारण ही एंटीबायोटिक रेजिस्टेंट की स्थिति पैदा करते हैं। यह साइलेंट किलर है, जो रिजर्व एंटीबायोटिक को खत्म कर रहा है। इसलिए हमें भविष्य के लिए सचेत होकर एंटीबायोटिक दवा के प्रयोग के बारे में सोचना चाहिए। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के माइक्रोबायोलाजिस्ट डा. विकास मिश्रा ने जागरण संवाददाता अंकुश शुक्ल को साक्षात्कार में सवालों के जवाब दिए...

जीएसवीएम के माइक्रोबायोलाजिस्ट डा. विकास।
- एंटीबायोटिक की अधिकता से प्रतिरोधक क्षमता किस प्रकार प्रभावित होती है। क्या यह जानलेवा हो सकता है?
- एंटीबायोटिक की अधिकता से प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) सीधे तौर पर प्रभावित होती है। क्योंकि यह शरीर के अच्छे और बुरे दोनों बैक्टीरिया को मार देती है, खासकर आंत के माइक्रोबायोम को बिगाड़कर, इससे प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है और संक्रमण से लड़ने की क्षमता घट जाती है, यह जानलेवा हो सकता है क्योंकि इससे एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी बैक्टीरिया (सुपरबग्स) विकसित होते हैं, जो सामान्य एंटीबायोटिक दवाओं से ठीक नहीं होते और गंभीर, जानलेवा संक्रमण का कारण बन सकते हैं, जिससे मृत्यु दर बढ़ जाती है एंटीबायोटिक दवा की अधिकता से एंटीबायोटिक रेजिस्टेंट का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। टीबी, कैंसर और अन्य क्रोनिक बीमारियों से ग्रसित मरीजों में यह रेजिस्टेंट जानलेवा बन रहा है। एंटीबायोटिक का सामान्य बुखार, खांसी, जुकाम में खाने से रेजिस्टेंट की समस्या बढ़ रही है।
- एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस क्या है, क्या गंभीर बीामरियों में दवा के प्रभाव को निष्क्रिय करती है?
- एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंट बैक्टीरिया, वायरल, फंगस के कारण होने वाली बीमारियों के निवारण में लेने वाली दवा का असर इन पर नहीं होता है, जो बीमारियों के इलाज को गंभीर बना देता है। वह स्थिति है जब बैक्टीरिया दवाओं के खिलाफ खुद को बदलकर इतना मजबूत हो जाते हैं कि एंटीबायोटिक्स उन्हें मार नहीं पाती है। इससे संक्रमण का इलाज मुश्किल और असंभव हो जाता है, और यह निमोनिया, टीबी जैसी गंभीर बीमारियों को जानलेवा बना सकता है, खासकर एंटीबायोटिक्स के गलत और अत्यधिक उपयोग से यह समस्या बढ़ती है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, भारत में सबसे ज्यादा मौत एंटीबायोटिक दवा लेने में चल रही मनमानी के कारण हो रही है। यह साइलेंट किलर के साथ एक महामारी बनकर सामने आ रही है।
- आज-कल हर बीमारी में डाक्टर एंटीबायोटिक लिख रहे हैं। क्या एंटीबायोटिक रेजिस्टेंट के बढ़ रहे मामलों के लिए डाक्टर भी जिम्मेदार हैं?
- निश्चित ही इस गंभीरता के लिए डाक्टर और हम लोग भी जिम्मेदार हैं। सामान्य सर्दी, बुखार और जुकाम में भी डाक्टर एंटीबायोटिक दे रहे हैं। अनावश्यक प्रिस्क्रिप्शन और गलत एंटीबायोटिक चुनने के लिए और मरीज डॉक्टर की सलाह के बिना दवा लेने, अधूरा कोर्स करने या एंटीबायोटिक का दुरुपयोग करने के लिए जिम्मेदार हैं, इससे बैक्टीरिया शक्तिशाली हो जाते हैं और भविष्य में दवा रोग से लड़ने में बेअसर हो साबित हो रही है।
- क्या एंटीबायोटिक का अधिक सेवन करने से बैक्टीरिया के जीन में बदलाव हो सकता है। कैसे इस समस्या से बचें?
- एंटीबायोटिक के अधिक सेवन से बैक्टीरिया में एंटीबायोटिक प्रतिरोध (एंटीबायोटिक रेजिस्टेंट) विकसित हो रहा है। यह बैक्टीरिया दवा के संपर्क में आने पर खुद को बचाने के लिए अपने जीन बदल देता है। इससे वे दवा के प्रति प्रतिरोधी बन जाते हैं और संक्रमण का इलाज मुश्किल हो जाता है। इस स्थिति में कई सामान्य दवाएं बेअसर होने लगती हैं। इस कारण ही निमोनिया, मेनिन्जाइटिस जैसे गंभीर संक्रमण को जानलेवा बना देती है। इससे बचने के लिए डाक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक न लें, पूरा कोर्स करें, सामान्य वायरल इन्फेक्शन (जैसे सर्दी-जुकाम) में इनका उपयोग न करें और सही खुराक लें।
- विश्व के हर देश में एंटीबायोटिक दवा को लेकर अलग-अलग नियम हैं। जबकि भारत में ऐसा नहीं है?
- हर देश में एंटीबायोटिक दवा को लेकर अलग-अलग नियम हैं। भारत में एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल यानी बिना सलाह के प्रयोग करने से सुपरबग्स का खतरा बढ़ रहा है, जबकि कई विकसित देशों में डाक्टर पहले टेस्ट करके ही लिखते हैं, लेकिन भारत में भी अब इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) और सरकार एंटीबायोटिक दवाओं के सही उपयोग के प्रयास कर रही है। देश के कई शहरों में एंटीबायोटिक देने से पहले मरीजों में उसके प्रभाव की जांच की जा रही है।

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