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    यूपी के किसान की प्रेरक कहानी, कुछ नया करने की सोच ने बदली किस्मत, चंदन के पौधों से महक उठी बगिया

    Updated: Sat, 03 Jan 2026 04:50 PM (IST)

    Success Story: उरई के प्रगतिशील किसान लक्ष्मीनारायण चतुर्वेदी ने कर्नाटक से प्रेरित होकर चंदन की खेती शुरू की। 2007 में लाए गए पौधे अब विशाल वृक्ष बन ...और पढ़ें

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    बाग में चंदन के पेड़ के नीचे खड़े किसान लक्ष्मी नारायण चतुर्वेदी। जागरण

    जागरण संवाददाता, उरई। Success Story: उरई के प्रगतिशील किसान लक्ष्मीनारायण चतुर्वेदी के मन में कुछ नया करने की सोच लेकर खेती करते रहे हैं। 2007 में वह कर्नाटक भ्रमण पर गए तो वहां चंदन के खेती देखी। उनके मन में भी जिले में इसका बाग लगाने की सूझी और वह पूरी जानकारी करके कुछ पौधे वहां से लाए। अपने बाग की मिट्टी में मौरंग मिलाकर पौधे रोपे जो अब वृक्ष बन गए हैं। इतना ही नहीं अब और भी किसान चंदन की खेती के प्रति रुचि दिखा रहे हैं।


    किसान लक्ष्मी नारायण चतुर्वेदी एमए अर्थ शास्त्र से हैं। वह कभी केले की खेती, प्राकृतिक खेती और बागवानी करने की पहल करते रहते हैं। 2007 में वे कर्नाटक भ्रमण के दौरान चंदन की खेती से जुड़ी सारी जानकारी एकत्रित कीं और संकल्प लिया कि वे जिले में चंदन की खेती को विस्तारित करेंगे। वहां से पौधे लाकर बाग में रोपे और पौधों की देखभाल की तो 2019 तक चंदन के पौधे विशाल रूप लेकर वृक्ष में परिवर्तित हो गए।

     

    चंदन की लकड़ी बहुत महंगी होती है जिसके चलते अब अन्य कई किसान चंदन के पौधे लगा रहे हैं। कृषि विज्ञानी मो. मुस्तफा ने बताया कि सम्य ऊष्म क्षेत्र में यह पेड़ लग सकते हैं लेकिन तेज की क्वालिटी पर किसान की आय निर्भर रहती है। चंदन का पेड़ दूसरे पौधों की जड़ों से भोजन प्राप्त करता है।


    सफेद चंदन में 4 से 6 प्रतिशत तक पाया जाता तेल

    सफेद चंदन में 4 से 6 प्रतिशत तक तेल की मात्रा पाई जाती है। सबसे अच्छा तेल उन चंदन के वृक्षों में पाया जाता है जो बबूल के पौधों के साथ लगाए गए हों। वैसे तो किसी भी पौधों के साथ चंदन के पौधे लगाए जा सकते हैं। चंदन का तेल सात हजार रुपये प्रति पांच ग्राम बिकता है जबकि लकड़ी 18 हजार रुपये किलो तक बिकती है।

     

    कभी बुंदेलखंड में होती रही चंदन की खेती

    किसान लक्ष्मी नारायण चतुर्वेदी के अनुसार कभी बुंदेलखंड में चंदन की खेती होती थी। आल्हा खंड में जिक्र है कि जब बेला सती हुई थी तो उसको चंदन की लकड़ी के साथ ही जलाया गया था। किसान ने बताया कि अब तक क्लब के सहयोग से दस हजार पौधों का रोपण किया जा चुका है।