Gorakhpur News: सच्चाई दिखाने वाली फिल्मों के विरोध पर बोले विवेक अग्निहोत्री, कहा- किसी भी आक्रांता का महिमा मंडन ठीक नहीं
विवेक अग्निहोत्री ( Vivek Agnihotri ) ने सच्चाई दिखाने वाली फिल्मों के विरोध पर खुलकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि किसी भी आक्रांता का महिमा मंडन ठीक नहीं है। औरंगजेब ने भारत की पहचान मिटाने की कोशिश की बावजूद इसके उसका महिमा मंडन किया जाता है। उनकी नई फिल्म दिल्ली फाइल और बंगाल चैप्टर के विरोध पर भी उन्होंने आक्रोश जताया।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। 'ताशकंद फाइल' व 'कश्मीर फाइल' जैसी चर्चित फिल्मों के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री सच्चाई दिखाने वाली फिल्मों के विरोध से आहत हैं। उनका कहना जिहादी आतंकवादियों ने कश्मीरी हिंदू भाई-बहनों को मार डाला और उनके घरों पर कब्जा कर लिया और जब उसपर फिल्म बनी तो उसे विरोध का सामना करना पड़ा। अब औरंगजेब को विलेन दिखाने का विरोध हो रहा है। विवेक गुरुवार को आध्यात्मिक फिल्म महोत्सव के शुभारंभ कार्यक्रम के बाद संवाददाताओं से बातचीत मेें खुलकर अपने विचार रख रहे थे।
विवेक ने कहा कि किसी भी आक्रांता का महिमा मंडन ठीक नहीं। इसके लिए उन्होंने हिटलर का उदाहरण दिया। बताया कि जर्मनी में हिटलर का नामोनिशान मिटा दिया गया है। पोलेंड में तो उसपर होने वाली चर्चा पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। ऐसा सभी विकसित राष्ट्रों में है। वह अपने दुश्मनों का महिमा मंडन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं करते।
कहा कि सबने इसके लिए बाकायदा कानून बना दिया है। हमारे देश में भी ऐसा ही होना चाहिए। अब अधर्मी को स्वीकार नहीं करते। हमने रावण व दुर्योधन को हिंदू होने के बाद भी अस्वीकार किया है क्योंकि वह अधर्मी थे। औरंगजेब ने भी भारत की पहचान मिटाने की कोशिश की, बावजूद इसके उसका महिमा मंडन किया जाता है। उनके नाम पर सड़कें बना दी गई हैं। यह बेहद अफसोस की बात है।
फिल्म निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री । जागरण
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विवेक ने अपनी नई फिल्म 'देलही फाइल' और 'बंगाल चैप्टर' के विरोध को लेकर भी आक्रोश जताया। कहा कि फिल्म अभी रिलीज भी नहीं हुई है, लेकिन लोग उसके पीछे पड़ गए हैं। चुनौती देते हैं कि बंगाल आकर दिखाओ, फिल्म रिलीज करके दिखाओ तो कचूमर निकाल देंगे। यह मामले अर्बन नक्सल के है। इसके आगे हमें घुटने नहीं टेकने चाहिए। इसके खिलाफ मजबूती से लड़ने की जरूरत है।
धर्म व अध्यात्म की फिल्मों से सजा फिल्मोत्सव का मंच
बाबा गोरखनाथ की नगरी गोरखपुर के सांस्कृतिक इतिहास में गुरुवार को एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में धर्म और अध्यात्म की फिल्मों पर आधारित तीन दिवसीय आध्यात्मिक फिल्मोत्सव का शुभारंभ हो गया। ताशकंद फाइल और कश्मीर फाइल फिल्म के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की बतौर मुख्य अतिथि मौजूदगी फिल्मोत्सव के शुभारंभ कार्यक्रम में रंग जम गया।
पर्यटन विभाग के सहयोग से मुंबई की संस्था इंडियन इन्फोटेनमेंट मीडिया कारपोरेशन की ओर से आयोजित फिल्मोत्सव के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि विवेक अग्निहोत्री ने आध्यात्मिक फिल्मोत्सव आयोजन को समय की जरूरत बताया। कहा कि धर्म और अध्यात्म भारत की आत्मा है। ऐसे में इनपर फिल्मों का निर्माण बहुत जरूरी है।
बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित आध्यात्मिक फिल्म फेस्टीवल का उद्घाटन करते महापौर डा. मंगलेश श्रीवास्तव साथ में फिल्म निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री , फिल्म कलाकार राजेश खट्टर, धरम गुलाटी,अभिनेत्री केतकी कपाड़िया व अन्य। जागरण
धार्मिक व आध्यात्मिक फिल्में पहले भी देखी जाती थीं और अब भी देखी जा रही हैं। दर्शक इन फिल्मों से जुड़ते हैं और उनसे मिली धार्मिक और आध्यात्मिक जानकारी आत्मसात करते हैं। ऐसे में प्रदेश में इसपर आधारित फिल्मोत्सव के आयोजन की महती जरूरत थी। उन्होंने कहा कि रामायण पर काफी फिल्में बननी चाहिए परंतु एक ही फिल्म बनी है।
उन्होंने कहा कि संत कबीर, महात्मा बुद्ध और तुलसीदास पर भी फिल्म बननी चाहिए। उन्हें आध्यात्मिक फिल्मोत्सव का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। फिल्म फेस्टिवल के आयोजन के महत्व की चर्चा करते हुए विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि यह फिल्मों के महोत्सव के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा देता है। फेस्टिवल के जरिये दर्शकों को दुर्लभ फिल्मों को भी देखने का अवसर प्राप्त होता है।
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अपनी चर्चित फिल्म कश्मीर फाइल का जिक्र करते हुए विवेक ने कहा कि उस फिल्म का काफी विरोध हुआ। इसे लेकर उन्हें धमकियां भी मिलीं। आज भी इसे लेकर खतरा बना रहता है। मंच से उन्होंने यह भी साझा किया कि अब वह डेल्ही फाइल बना रहे है, जो अक्टूबर में आएगी और फिल्म के जरिये दर्शकों को विभाजन की कहानी दिखाई जाएगी।
कार्यक्रम के अतिथि महापौर डा. मंगलेश श्रीवास्तव ने कहा कि धर्म और अध्यात्म की फिल्मों को बच्चों को जरूर दिखाया जाए क्योंकि आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत को आगे ले जाने का दायित्व उन्हीं पर है। इस अवसर पर अभिनेत्री स्मृति मिश्रा, अभिनेता राजेश खट्टर, कैमरामैन धरम गुलाटी, फिल्मकार अरुण शंकर और मराठी फिल्मों के प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक पुंडलिक धुमाल, पर्यटन विभाग के उप निदेशक रवींद्र मिश्र और आयोजक संस्था की आयोजन सचिव केतकी कपाड़िया मौजूद रहीं।
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