भर्ती में फर्जीवाड़ा: विजिलेंस टीम अपने साथ ले गई तकनीशियन और लोको पायलट भर्ती की फाइलें, जांच में मदद करेगा NER
रेलवे भर्ती बोर्ड गोरखपुर में भर्ती घोटाले की जांच में रेलवे बोर्ड की विजिलेंस टीम ने मंगलवार को भी अभिलेखों की गहनता से जांच की। टीम ने वर्ष 2018 की तकनीशियन और लोको पायलट भर्ती की फाइलें और जारी किए गए पैनल की रिपोर्ट जब्त कर ली है। जांच में सहयोग के लिए पूर्वोत्तर रेलवे की विजिलेंस टीम भी मदद कर रही है।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। रेलवे भर्ती बोर्ड कार्यालय गोरखपुर में फर्जीवाड़ा मामले में रेलवे बोर्ड विजिलेंस टीम ने मंगलवार को भी गहनता से अभिलेखों की जांच की। दिनभर छानबीन करने के बाद देर रात वर्ष 2018 तकनीशियन व लोको पायलट भर्ती की फाइलें और जारी किए गए पैनल की रिपोर्ट जब्त कर उनकी अटेस्टेड फोटो कापी अपने साथ ले कर चली गई।
फाइलों के साथ लेनदेन में भी हेराफेरी की आशंका में बैंक अकाउंट और चेकबुक को भी जब्त कर लिया है। इस दौरान टीम ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ कर उनके बयान भी दर्ज की। साथ ही सब के मोबाइल फोन के काल डिटेल को खंगालते हुए गहन जांच के लिए अपने सिस्टम में अपलोड कर के ले गई है।
रेलवे भर्ती बोर्ड कार्यालय गोरखपुर के पूरे स्टाफ में हड़कंप मचा है। विजिलेंस के पंजे में जालसाजों की गर्दन फंसी हुई है। कार्रवाई को लेकर सब डरे और सहमे हैं। रेलवे भर्ती बोर्ड गोरखपुर के अध्यक्ष नुरुद्दीन अंसारी निलंबित किए जा चुके हैं।
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जानकारों का कहना है कि आशंका जताई जा रही है कि तकनीशियन और लोको पायलट की भर्ती प्रक्रिया के फर्जीवाड़ा में रेलवे भर्ती बोर्ड कार्यालय गोरखपुर का पूरा स्टाफ शामिल है। ऐसे में अब वर्ष 2018 में पूर्वोत्तर रेलवे में आरंभ हुई 354 पद पर तकनीशियन और 1234 पद पर लोको पायलट भर्ती प्रक्रिया की पूरी गहना के साथ जांच होगी।
सवाल है कि वर्ष 2018 की तकनीशियन और लोको पायलट की भर्ती में इतना विलंब क्यों हुआ है। एक-एक कर पांच से सात लोगों का पैनल क्यों जारी किया गया। एक ही बार पैनल क्यों निकाला गया। रेलवे बोर्ड को समय- समय पर स्थिति से अवगत क्यों नहीं कराया गया। विजिलेंस ने ढेर सारे सवाल कर उनके उत्तर की तलाश कर रही है।
दरअसल, इस भर्ती प्रक्रिया में इसके पूर्व भी शिकायत हुई थी। शिकायत पर रेलवे बोर्ड दिल्ली की विजिलेंस टीम नवंबर 2022 में भी रेलवे भर्ती बोर्ड कार्यालय गोरखपुर में छापेमारी की फाइलों की जांच की थी। अनियमितता पाए जाने परे तत्कालीन रेलवे भर्ती बोर्ड अध्यक्ष और कार्यालय के पूरे स्टाफ को पद से हटा दिया गया था। दिसंबर 2022 में पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य कार्मिक अधिकारी नुरुद्दीन अंसारी को रेलवे भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई।
इसके बाद भी फर्जीवाड़ा जारी रहा। फिलहाल, एक से दो सप्ताह के अंदर जांच पूरी होने की संभावना जताई जा रही है। रेलवे बोर्ड की विजिलेंस पूरी फाइल लेकर रवाना हो गई है। बोर्ड की विजिलेंस दिल्ली में और गोरखपुर में पूर्वोत्तर रेलवे की विजिलेंस सहयोग करेगी।
जांच पूरी होने पर संबंधित आरोपितों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई होगी। आवश्यकता पड़ने पर प्रकरण की जांच सीबीआइ को भी साैंपी जा सकती है। जल्द ही इस प्रकरण का पर्दाफाश हो जाएगा। मामले में और कई नपेंगे। फर्जीवाड़ा में दफ्तर के पूरे स्टाफ की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता है।
बर्खास्त किए जा सकते हैं रेलकर्मी राम सजीवन, चार्जशीट की तैयारी
अपने बेटे को फर्जी ढ़ंग से नौकरी दिलाने वाले रेलवे भर्ती बोर्ड कार्यालय गोरखपुर में तैनात रहे निजी सचिव द्वितीय राम सजीवन बर्खास्त किए जा सकते हैं। जानकारों के अनुसार रेलवे प्रशासन ने उन्हें सिग्नल एवं दूर संचार विभाग से कार्मिक विभाग में स्थानांतरित कर दिया है।
उनके खिलाफ चार्जशीट की तैयारी चल रही है। चार्जशीट तैयार है। रेलवे भर्ती बोर्ड कार्यालय गोरखपुर में कार्यालय अधीक्षक ने भी फर्जी ढंग से अपने बेटे को नौकरी दी है। वह सेवानिवृत्त हो चुके हैं। रेलवे प्रशासन उनके खिलाफ पेंशन कटौती की कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है।
ऐसे हुआ है भर्ती में फर्जीवाड़ा
रेलवे भर्ती बोर्ड कार्यालय गोरखपुर में तैनात दो रेलकर्मियों ने माडर्न कोच फैक्ट्री (एमसीएफ) रायबरेली में फर्जी ढंग से अपने बेटों को पैनल में शामिल कर नौकरी दे दी। कर्मचारियों ने अधिकारियों की नाक के नीचे 26 अप्रैल, 2024 को जारी पैनल में फर्जी ढंग से अपने बेटों का नाम शामिल कर दिया। सात अभ्यर्थियों के पैनल की जगह नौ कर दिया।
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रेलवे भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष के हस्ताक्षर से ही पैनल जारी किया गया। कार्यालय अधीक्षक चंद्र शेखर आर्य के बेटे राहुल प्रताप और निजी सचिव (द्वितीय) राम सजीवन के बेटे सौरभ कुमार बिना फार्म भरे, परीक्षा दिए और मेडिकल टेस्ट के ही माडर्न कोच फैक्ट्री रायबरेली में फिटर बन गए। फिलहाल, रेलवे प्रशासन ने दोनों की सेवा समाप्त कर दी है। कार्यालय अधीक्षक सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि निजी सचिव गोरखपुर में कार्यरत हैं।
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