Railways News: एनईआर में तीसरी व चौथी लाइन के लिए सर्वे शुरू, बढ़ाई जाएगी ट्रैक क्षमता
पूर्वोत्तर रेलवे (एनईआर) ने अपने 12 उच्च घनत्व वाले रेलमार्गों पर तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने के लिए सर्वेक्षण कार्य शुरू कर दिया है। इस कदम का उद्देश्य ट्रैक क्षमता बढ़ाना और यात्रियों को बेहतर सुविधाएँ प्रदान करना है। सर्वेक्षण के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी और रेलवे बोर्ड की स्वीकृति के बाद निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।

प्रेम नारायण द्विवेदी, गोरखपुर। पूर्वोत्तर रेलवे (एनईआर) के 12 'हाई डेंसिटी रूट' (उच्च घनत्व वाले रेलमार्ग) पर तीसरी और चौथी रेल लाइन के लिए सर्वे कार्य शुरू हो गया है। रेलवे प्रशासन के दिशा-निर्देश पर इंजीनियरों की टीम चिन्हित सभी मार्गों पर सर्वे की प्रक्रिया आरंभ कर दी है।
अगले वर्ष चिन्हित 457 किमी रेल लाइन का सर्वे कार्य पूरा कर लिया जाएगा। सर्वे के बाद डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। रेलवे प्रशासन ने डीपीआर की भी तैयारी आरंभ कर दी है। डीपीआर पर रेलवे बोर्ड की मुहर लगते ही निर्माण कार्य के लिए आगे की कार्यवाही शुरू हो जाएगी।
रेलवे बोर्ड के निर्देश पर रेलवे प्रशासन ने उच्च घनत्व वाले रेलमार्गों की ट्रैक क्षमता बढ़ाने की कवायद तेज कर दी है। ताकि, अधिक से अधिक ट्रेनें चलाकर यात्रियों को सहूलियत प्रदान की जा सके। इसके लिए युद्धस्तर पर तीसरी और चौथी रेल लाइन के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। विद्युतीकृत तीसरी व चौथी रेल लाइनें भी 110 की गति के लायक तैयार की जा रही है।
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कुसम्ही से कैंट करीब 10 किमी और गोंडा कचहरी-करनैलगंज तक (23.65 किमी) तीसरी लाइन का निर्माण पूरा हो गया है। इन रेल लाइनों पर ट्रेनें भी चलने लगी हैं। गोरखपुर के रास्ते खलीलाबाद से बैतालपुर तक करीब 85 किमी तथा बुढ़वल से गोंडा 62 किमी तक तीसरी लाइन के लिए सर्वे पूरा हो चुका है। डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी तैयार है।
अब मुख्यालय गोरखपुर के रास्ते लखनऊ से छपरा 425 किमी के शेष बचे और बुढ़वल से सीतापुर लगभग 88 किमी के बीच रेल लाइनों पर तीसरी व चौथी लाइन बिछाने के लिए सर्वे शुरू हो चुका है। दरअसल, बाराबंकी से छपरा तथा बुढ़वल से सीतापुर मुख्य रेलमार्गों का दोहरीकरण और विद्युतीकरण पूरा होने के बाद भी रेलवे प्रशासन मांग के अनुरूप ट्रेनों का परिचालन नहीं कर पा रहा।
गर्मी की छुट्टियों व त्योहारों में यात्रियों की भीड़ बढ़ने पर ट्रैक क्षमता कम पड़ जा रही। इस दीपावली और छठ पर्व में पूर्वोत्तर रेलवे के विभिन्न रूटों पर 150 से अधिक पूजा स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं। इसके बाद भी यात्रियों की भीड़ कम नहीं हुई। पहले से ही ट्रेनों की संख्या अधिक होने पर अतिरिक्त गाड़ियों का संचालन नहीं हो पा रहा।
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रेलवे प्रशासन चाहकर भी और नियमित ट्रेनें नहीं चला पा रहा। पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्यालय गोरखपुर रूट से होकर प्रतिदिन लगभग 200 ट्रेनें चल रही हैं। गोरखपुर जंक्शन से रोजाना एक लाख यात्री आवागमन कर रहे हैं।
इन रूटों पर चल रहा सर्वे कार्य
- बैतालपुर से देवरिया सदर तक 7 किमी तक तीसरी लाइन के लिए।
- देवरिया सदर से भटनी 21 किमी तक तीसरी रेल लाइन के लिए।
- भटनी से सिवान 50 किमी तक तीसरी रेल लाइन के लिए।
- सिवान से दुरौंधा 18 किमी तक तीसरी रेल लाइन के लिए।
- दुरौंधा से कोपा और समोता 33 किमी तक तीसरी लाइन के लिए।
- छपरा जंक्शन से छपरा कचहरी 4 किमी तक तीसरी व चौथी लाइन।
- सीतापुर से बुढ़वल 88 किमी तक तीसरी व चौथी लाइन के लिए।
- बुढ़वल से बाराबंकी 27 किमी तक तीसरी रेल लाइन के लिए।
- बुढ़वल से गोंडा 62 किमी तक चौथी रेल लाइन के लिए।
- गोंडा से मनकापुर 56 किमी तीसरी रेल लाइन के लिए।
- बस्ती से मनकापुर 61 किमी तीसरी रेल लाइन के लिए।
- बस्ती से खलीलाबाद 30 किमी तीसरी रेल लाइन के लिए।
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