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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 30, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

गोरखपुर अपहरण कांड: एक हफ्ते तक पुलिस को उलझाया, भेद खुला तो खुद ही घर लौट आया 'पीड़ित'

Published: Thu, 30 Jan 2025 09:25 AM (IST)

गोरखपुर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां एक व्यक्ति ने खुद के अपहरण की साजिश रची। भीम ...और पढ़ें

स्वजन के साथ रोहित : सौ. इंटरनेट मीडिया
स्वजन के साथ रोहित : सौ. इंटरनेट मीडिया

HighLights

  1. 22 जनवरी को घर पर फिरौती की चिट्ठी भेज लापता हुआ था सर्राफ का बेटा
  2. घर पहुंचने पर पुलिस से बोला गलती हो गई, कर्ज में डूबने से रची थी झूठी कहानी

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। हिंदी बाजार के सर्राफा कारोबारी भीम सावंत के बेटे रोहित सावंत के कथित अपहरण की कहानी ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया था। घर पर फिरौती की चिट्ठी पहुंची, 10 करोड़ मांगे गए, पुलिस जांच में जुटी और परिवार सदमे में डूब गया। लेकिन जब हकीकत सामने आई, तो सबके होश उड़ गए।

जांच में पता चला कि कर्ज में डूबने की वजह से यह पूरा खेल खुद उसने ही रचा था। फिरौती की चिट्ठी भी उसने ही भेजी थी, ताकि कर्ज के चक्र से बच सके। साजिश का पर्दाफाश होने पर बुधवार को वह अपने जीजा के साथ घर लौट आया और राजघाट थानेदार के सामने हाथ जोड़कर बोला मुझसे गलती हो गई, माफ कर दीजिए।

22 जनवरी की सुबह रोहित अपने घर से स्कूटी लेकर निकला और फिर अचानक लापता हो गया। कुछ ही देर बाद एक डिलीवरी बॉय स्वेटर और फिरौती की चिट्ठी लेकर घर पहुंचा। चिट्ठी में लिखा था 10 करोड़ रुपये नहीं मिले, तो रोहित की हत्या कर दी जाएगी।

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इसके बाद घरवालों के होश उड़ गए। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। मामला हाई-प्रोफाइल बन गया और पुलिस ने अपहरण की जांच शुरू कर दी। लेकिन जल्द ही पुलिस को शक होने लगा, क्योंकि सीसी फुटेज में रोहित खुद ही शहर से बाहर जाते हुए नजर आया। सर्विलांस डेटा खंगालने पर पता चला कि वह उन्नाव तक गया, फिर लखनऊ में उसकी कार चलाने का वीडियो सामने आया। इसके बाद पुलिस ने राहत की सांस ली।

फिरौती की चिट्ठी घर भेजकर लापता हुआ सर्राफ का बेटा रोहित बुधवार को घर लौट आया। सौज. इंटरनेट मीडिया।


स्वजन ने पुलिस को बताया कि वह लोग मूल रुप से महाराष्ट्र के पुणे जिले के रहने वाले हैं।रोहित वहां जा सकता है उसके बाद पुलिस की एक टीम को पुणे भेज दिया गया।जानकारी होने पर रोहित ने स्वजन से संपर्क किया और बताया कि घर लौट रहा हूं।तब से वह परिवार व पुलिस के संपर्क में था।

खुद ही डिलीवरी बाय को बुलाया, खुद ही चिट्ठी भेजी

पुलिस ने जैसे-जैसे तहकीकात की, वैसे-वैसे साजिश के परतें खुलती चली गईं। जांच में सामने आया कि रोहित ने खुद ही आनलाइन 40 रुपये देकर एक डिलीवरी बॉय को बुलाया था और उसे अपने घर स्वेटर लेकर भेजा जिसमें चिट्ठी देने को कहा था।इतना ही नहीं, उसने डिलीवरी बॉय को अपने पिता का नंबर भी दिया और फिर घर पहुंचने के बाद फोन कर कन्फर्म भी किया कि चिट्ठी मिल गई या नहीं।

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भागने की पूरी प्लानिंग कर रखी थी

अपहरण का नाटक करने के बाद रोहित ने अपनी स्कूटी अपने दोस्त के यहां खड़ी कर दी और फिर अपने दोस्त की कार (UP53EM8079) लेकर शहर से निकल गया।सीसी कैमरे के फुटेज में देखा गया कि वह अकेले ही जीडीए पार्किंग से कार निकालता है, फिर छात्रसंघ चौराहे पर उसकी गाड़ी दिखती है।जब पुलिस ने मोबाइल ट्रैकिंग की, तो रोहित की आखिरी लोकेशन उन्नाव के पास मिली, फिर लखनऊ में उसके होने के सबूत मिले।

कर्ज में डूबा था, बचने के लिए साजिश रची

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि रोहित पुणे में अपने जीजा के पास छिपा हुआ था। जब पुलिस ने दबाव बनाया और कार्रवाई की चेतावनी दी, तो रोहित ने खुद ही पुलिस से संपर्क किया और घर लौटने की इच्छा जताई।बुधवार को वह अपने जीजा के साथ गोरखपुर लौटा।थानेदार को बताया कि उसके ऊपर भारी कर्ज था। पैसे के दबाव और मानसिक तनाव की वजह से उसने यह पूरी साजिश रची, ताकि वह कर्जदाताओं से बच सके।