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    केदारनाथ आपदा: गोरखपुर के पीड़ित परिवारों को 12 साल बाद मिलेगा मुआवजा, शासन ने मांगी रिपोर्ट

    Updated: Sat, 03 Jan 2026 11:50 AM (IST)

    उत्तराखंड की 2013 की भीषण आपदा में जान गंवाने वाले या लापता हुए लोगों के परिजनों को 12 साल बाद मुआवजे की उम्मीद जगी है। उत्तर प्रदेश शासन ने गोरखपुर ज ...और पढ़ें

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    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    अरुण चन्द, गोरखपुर। उत्तराखंड में वर्ष 2013 की भीषण प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वाले और स्थायी रूप से लापता लोगों के परिजनों की पीड़ा 12 साल बाद खत्म होने की उम्मीद जगी है। इन्हें मुआवजा मिलने की फिर उम्मीद जगी है। शासन ने जिला प्रशासन से इन लोगों की सूची पर अद्यतन रिपोर्ट मांगी है।

    हादसे के बाद से ही पीड़ित परिवार आज भी मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए तहसील, जिला मुख्यालय से लेकर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड शासन के कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। मुआवजा न मिलना तो एक अलग समस्या है, लेकिन मृत्यु प्रमाण पत्र न बन पाने के कारण वरासत, बैंक खाते, बीमा, पारिवारिक बंटवारा जैसे जरूरी कार्य भी वर्षों से लटके हुए हैं।

    इस गंभीर मामले को लेकर शासन स्तर पर एक बार फिर सक्रियता दिखाई गई है। अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग (नियंत्रण प्रकोष्ठ) द्वारा जारी पत्र के क्रम में डीएम दीपक मीणा की ओर से संबंधित तहसीलों के एसडीएम निर्देश जारी किए हैं। सभी से यह जानकारी मांगी गई है कि उत्तराखंड आपदा में मृत या स्थायी रूप से लापता व्यक्तियों के मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध हुए हैं या नहीं।

    उप्र शासन ने संभावना जताई है कि कुछ मामलों में परिजनों को सीधे डाक के माध्यम से प्रमाण पत्र मिले हों, लेकिन इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। सूची में बांसगांव, सदर और खजनी तहसील क्षेत्र के मृतक एवं लापता शामिल हैं। इनमें धस्का कौड़ीराम के गब्बू लाल वर्मा, शहर के जागेसर पासी चौराहा निवासी मोनी व मियां बाजार निवासी फूलमती देवी, बांसगांव के लकुड़ी निस्फी बाबू निवासी उमा मिश्रा और खजनी के कोटहा घुरहू निवासी मिट्ठू प्रजापति के नाम दर्ज हैं।

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    शासन ने निर्देश दिए हैं कि इन सभी मामलों की वर्तमान स्थिति रिपोर्ट तत्काल उपलब्ध कराई जाए, ताकि शासन स्तर पर आगे की कार्यवाही की जा सके। इस कार्य को शीर्ष प्राथमिकता पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इस आपदा में जिले के करीब 60 लोग शामिल थे। सभी की मुआवजे आदि की प्रक्रिया पूरी हो गई है लेकिन, ये पांच परिवार अभी भी परेशान हैं।


    वर्ष 2013 में उत्तराखंड आपदा के दौरान जिले के भी कई लोग मृत या स्थायी रूप से लापता हुए थे। इनमें से ज्यादातर को मुआवजा मिल गया है लेकिन, पांच परिवार को उत्तराखंड शासन की ओर से मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं जारी हो पाने की वजह से मुआवजा नहीं मिल पाया है। शासन ने इनकी अद्यतर रिपोर्ट मांगी है। उम्मीद जताई जा रही है कि इन्हें डाक से मृत्यु प्रमाण पत्र मिल गए हों। संबंधित एसडीएम को पत्र लिखकर रिपोर्ट मांगी गई है।

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    - विनीत कुमार सिंह, प्रभारी अधिकारी आपदा व एडीएम वित्त एवं राजस्व