Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck

    एनसीएपी की मुहिम रंग लाई, गोरखपुर की हवा हुई साफ

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 07:42 AM (IST)

    गोरखपुर में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के प्रभावी क्रियान्वयन से शहर की हवा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। नगर निगम द्वारा 121 करोड़ रुपये ...और पढ़ें

    Hero Image

    121 करोड़ से सुधरी शहर की आबोहवा। जागरण

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के प्रभावी क्रियान्वयन से शहर की हवा अब पहले से कहीं अधिक शुद्ध और सांस लेने योग्य हो गई है। नगर निगम द्वारा वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए खर्च किए गए 121 करोड़ रुपये का असर अब जमीन पर दिखने लगा है।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    कभी 200 के पार रहने वाला एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआइ) अब 100 के आसपास सिमट गया है, जो शहरवासियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। साल के 214 दिन शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स ग्रीन जोन में रहा। सिर्फ साल में पांच दिन ही ऐसी स्थिति रही जो एक्यूआइ रेड जोन में दर्ज किया गया।

    सड़क किनारे इंटरलाकिंग और ग्रीन बेल्ट का कमाल
    शहर में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण सड़कों के किनारे उड़ने वाली धूल (डस्ट पोल्यूशन) थी। नगर निगम ने योजनाबद्ध तरीके से शहर की मुख्य सड़कों के किनारे इंटरलाकिंग का कार्य कराया है। इससे मिट्टी ढंक गई है और वाहनों के चलने से उड़ने वाली धूल में काफी कमी आई है। इसके साथ ही, शहर के विभिन्न मोहल्लों और मुख्य मार्गों पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया गया है। विकसित की गई नई ‘ग्रीन बेल्ट’ ने कार्बन सोखने और आक्सीजन के स्तर को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    गीडा की गणना बाहर होने से रैंकिंग में होगा सुधार
    वायु गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ अब ‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण’ में भी गोरखपुर की रैंकिंग बेहतर होने की प्रबल संभावना है। दरअसल, पहले गीडा (गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण) क्षेत्र में होने वाले औद्योगिक प्रदूषण की गणना भी शहर के डेटा में शामिल हो जाती थी, जिससे शहर की रैंकिंग गिर जाती थी। नगर निगम ने अब औद्योगिक क्षेत्र के प्रदूषण के आंकड़ों को शहर की मुख्य गणना से अलग कर दिया है। इस तकनीकी सुधार से स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में शहर को बेहतर अंक मिलेंगे।

    यह भी पढ़ें- नववर्ष पर गोरखपुर में लगा भीषण जाम, नौकायन रोड समेत कई इलाकों में रेंगते रहे वाहन

    लगातार ग्रीन जोन में बना हुआ है एक्यूआइ
    पिछले कुछ दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो शहर की हवा लगातार ''''ग्रीन जोन'''' में बनी हुई है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण कार्यों पर धूल नियंत्रण के नियमों की सख्ती और सड़कों की मशीनीकृत सफाई (मैकेनिकल स्वीपिंग) ने भी इसमें योगदान दिया है। नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, एनसीएपी के तहत मिले फंड का उपयोग न केवल तत्काल राहत के लिए किया गया है, बल्कि एक दीर्घकालिक ईको-सिस्टम बनाने पर भी जोर दिया गया है।

    साल भर के दौरान ऐसा रहा एक्यूआइ

    महीना  ग्रीन येलो रेड
    मार्च - 6-24-1 6 24 1
    अप्रैल- 10-18-2 10 18 2
    मई- 19-9-0 19 9 0
    जून- 28-2-0 28 2 0
    जुलाई - 30-0-0 30 0 0
    अगस्त -28-2-0 28 2 0
    सितंबर - 25-5-0 25 5 0
    अक्टूबर-18-11-2 18 11 2
    नवंबर-26-4-0 26 4 0
    दिसंबर 24- 7 0



    हमारा लक्ष्य शहर को देश के सबसे स्वच्छ हवा वाले शहरों की सूची में शीर्ष पर लाना है। इंटरलाकिंग, सघन पौधारोपण और गीडा क्षेत्र के प्रदूषण पृथक्करण जैसे कदमों से हम इस दिशा में सफल हो रहे हैं। आने वाले समय में इलेक्ट्रिक बसों के बढ़ते बेड़े और सार्वजनिक परिवहन में सुधार से प्रदूषण का स्तर और भी कम होगा। इस सुधार से न केवल लोगों के स्वास्थ्य में बेहतरी आएगी, बल्कि शहर की सुंदरता और जीवन स्तर में भी इजाफा होगा।

    -

    -दुर्गेश मिश्रा, अपर नगर आयुक्त