गोरखपुर में खोजने पर भी नहीं मिल रही मंकी कैप, ऊनी वस्त्रों के दाम बढ़े
गोरखपुर में शीतलहर के कारण ऊनी वस्त्रों का बाजार गर्म है। मंकी कैप ढूंढने पर भी मुश्किल से मिल रही हैं, और अन्य ऊनी कपड़ों के दाम 20-30 प्रतिशत बढ़ गए ...और पढ़ें

मौसम का साथ पाकर 20 से 30 प्रतिशत तक का उछाल। जागरण
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। शीतलहर और तीव्र गलन के कारण ऊनी वस्त्रों का बाजार पूरी तरह गरम है। स्थिति यह है कि मंकी कैप खोजने पर भी आसानी से नहीं मिल रही है। अन्य ऊनी वस्त्रों के दामों में लगभग 20 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि हो गई है।
विक्रेताओं का कहना है कि लंबे समय तक ठंड बने रहने से बिक्री बढ़ी है। व्यापारियों के अनुसार बीते वर्षों के अनुभव को ध्यान में रखकर ही स्टाक मंगाया गया था, लेकिन इस बार मौसम ने पूरा साथ दे दिया है। दुकानदारों का मानना है कि यदि इसी तरह ठंड बनी रही तो फरवरी के अंत तक ऊनी वस्त्रों का स्टाक समाप्त हो सकता है।
ठंड बढ़ने के साथ ही शहर की दुकानों पर ऊनी कपड़ों की बिक्री में तेजी आई है। लोग पहनने और ओढ़ने दोनों तरह के इंतजाम में जुटे हैं। टाउनहाल स्थित कश्मीरी बाजार हो या तिब्बती बाजार, हर जगह ग्राहकों की भारी भीड़ देखी जा रही है।
बुधवार को रानीडीहा निवासी शांति देवी बुजुर्गों के लिए मंकी कैप खरीदने निकलीं, लेकिन कई दुकानों पर भटकना पड़ा। अंततः गोलघर की एक दुकान पर उन्हें 460 रुपये में टोपी मिली, जिसे मोलभाव के बाद खरीदा।
शाहमारूफ के थोक विक्रेता इरफान ने बताया कि अच्छी गुणवत्ता वाली टोपियां, मोजे, स्वेटर सहित अन्य ऊनी वस्त्रों की जमकर बिक्री हुई है। थोक के साथ ही फुटकर खरीदारी भी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि पिछले 15 दिनों से लगातार ठंड के कारण कारोबार में तेजी आई है, वहीं अब स्टाक समाप्त होने की चिंता भी सताने लगी है।
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कश्मीरी बाजार में भी मौसम का असर साफ दिख रहा है। एक सप्ताह पहले जो स्टाल चार सौ रुपये में मिल रहा था, उसकी कीमत अब साढ़े पांच सौ रुपये तक पहुंच गई है। इसी तरह सूट, जैकेट, स्वेटर और शाल की कीमत में 20 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। बच्चों के लिए हेडफोन लगी टोपी की कीमत चार सौ रुपये तक पहुंच गई है। मफलर, दस्ताने सहित अन्य ऊनी वस्त्रों के दाम भी बढ़े हुए हैं।
तिब्बती बाजार के दुकानदार छवांग ने बताया कि ठंड के चलते लोग बड़ी संख्या में खरीदारी करने पहुंच रहे हैं। जैकेट, ब्लेजर, स्वेटर, स्वेटशर्ट, शाल, स्टाल और कार्डिगन बिक रहे हैं। विक्रेता टैपा और लेपसांग ने बताया कि ऊनी वस्त्रों का पूरा बाजार मौसम पर निर्भर करता है। इसलिए सभी दुकानदार काफी खुश हैं।

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