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    गोरखपुर में सील हो चुके निजी अस्पताल में गर्भवती की मौत, तोड़फोड़

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 10:08 AM (IST)

    गोरखपुर के एक निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान एक महिला की मौत हो गई। यह अस्पताल तीन साल पहले अवैध रूप से संचालित होने के कारण सील किया गया था, लेकिन न ...और पढ़ें

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    फाइल फोटो रीतू। सौ. इंटरनेट मीडिया

    संवाद सूत्र, भटहट। निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान शनिवार को महिला की मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ। आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल में तोड़फोड़ की। सूचना पर पहुंची गुलरिहा पुलिस ने किसी तरह स्थिति को संभाला।

    घटना के बाद अस्पताल संचालक और स्टाफ मौके से फरार हो गए। बताया जा रहा है कि जिस अस्पताल में यह घटना हुई है उसे तीन वर्ष पहले स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सील किया था।

    महराजगंज जिले के श्यामदेउरवां स्थित लखिमा गांव के सुनील कुमार ने गुलरिहा पुलिस को बताया कि उनकी पत्नी रीतू प्रसव के लिए अपने मायके परसौना आई हुई थी। शनिवार सुबह करीब नौ बजे प्रसव पीड़ा होने पर मायके पक्ष के लोग उसे तरकुलहां चौराहे पर स्थित निजी अस्पताल लेकर पहुंचे।

    सुनील कुमार का आरोप है कि अस्पताल पहुंचते ही संचालक ने इलाज शुरू करने से पहले 40 हजार रुपये जमा करा लिए। कुछ देर बाद रीतू की हालत बिगड़ने लगी। इस पर परिजनों ने डाक्टरों से स्थिति की जानकारी मांगी, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।

    आरोप है कि हालत गंभीर होने पर अस्पताल संचालक ने बिना परिजनों को बताए ही पत्नी को अपने निजी वाहन में बैठाया और बीआरडी मेडिकल कालेज के गेट पर छोड़कर फरार हो गया। परिजनों के अनुसार, तब तक महिला की मौत हो चुकी थी।

    मौत की जानकारी मिलते ही परिजन और स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए। वे वापस अस्पताल पहुंचे और हंगामा करते हुए तोड़फोड़ शुरू कर दी। सूचना मिलने पर सीओ गोरखनाथ और गुलरिहा थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे।कार्रवाई का भरोसा देकर शांत कराया।

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    नाम बदलकर शुरू कर दिया था धंधा
    जांच में यह भी सामने आया है कि करीब तीन साल पहले इसी भवन में संचालित अस्पताल को अवैध मानते हुए एडिशनल सीएमओ डा. अनिल सिंह की मौजूदगी में सील किया गया था। स्वास्थ्य विभाग की सील किए गए अस्पतालों की सूची में आज भी इस भवन का नाम दर्ज है।

    इसके बावजूद आरोप है कि नाम बदलकर दोबारा रजिस्ट्रेशन कर अस्पताल का संचालन किया जा रहा था।स्थानीय लोगों में चर्चा है कि यदि स्वास्थ्य विभाग ने पहले ही सख्ती बरती होती और अवैध अस्पताल को दोबारा संचालन की अनुमति न दी होती, तो शायद महिला की जान बच सकती थी। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

    पति ने अस्पताल संचालक पर लापरवाही का आरोप लगाया है।मामले की जांच कराई जा रही है।पोस्टमार्टम रिपोर्ट व साक्ष्य के अाधार पर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

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    - रवि कुमार सिंह,सीओ गोरखनाथ।