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गोरखपुर विशाल हत्याकांड में तीन सगे भाइयों समेत चार मजदूर गिरफ्तार, शराब के लिए रुपये देना पड़ा भारी

Published: Sun, 28 Dec 2025 07:36 AM (IST)

गोरखपुर के सहजनवा में कारपेंटर विशाल यादव हत्याकांड का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। बिहार के तीन सगे भाइयों ...और पढ़ें

गया जिले के आरोपित सहजनवा में ईंट भट्ठा पर करते थे मजदूरी। जागरण

गया जिले के आरोपित सहजनवा में ईंट भट्ठा पर करते थे मजदूरी। जागरण

HighLights

  1. विशाल यादव हत्याकांड का सहजनवा पुलिस ने किया पर्दाफाश।

  2. शराब के 50 रुपये के विवाद में हुई थी हत्या।

  3. बिहार के तीन भाइयों सहित चार मजदूर गिरफ्तार।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। कारपेंटर विशाल यादव हत्याकांड का सहजनवा पुलिस ने पर्दाफाश कर लिया है। इस सनसनीखेज वारदात को बिहार के रहने वाले तीन सगे भाइयों ने अपने एक साथी के साथ मिलकर अंजाम दिया था। पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर शनिवार को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। मामले की जांच के दौरान हिरासत में ली गई एक युवती और उसके परिजनों के निर्दोष मिलने पर छोड़ दिया गया।

एसपी उत्तरी ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि गया (बिहार) के अतरी तपोवन टटारू निवासी पप्पू मांझी, अपने भाई राजू मांझी,मंगल मांझी तथा वजीरगंज मरड्डी निवासी बबलू मांझी सहजनवां के जोगियाकोल स्थित राममिलन यादव के ईंट-भट्ठे पर रहकर मजदूरी करते थे।

पुलिस विवेचना में सामने आया कि 24 दिसंबर की रात में विशाल यादव भी आरोपियों के साथ मौजूद था। सभी ने साथ बैठकर शराब पी, इसी दौरान शराब के लिए और रुपये देने को लेकर विवाद हो गया। आरोप है कि विशाल ने 50 रुपये देने से इनकार कर दिया और गुस्से में पप्पू मांझी को गाली देते हुए चेहरे पर मुक्का मार दिया।

इस बात पर आरोपितों ने विशाल का पीछा किया और कुछ दूरी पर उसे पकड़कर पीटना शुरू कर दिया। हमले में विशाल को गंभीर चोटें आईं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के बाद आरोपित मौके से फरार हो गए।

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घटना का पर्दाफाश करने के लिए चार टीमें गठित की गई। तकनीकी साक्ष्य, कॉल डिटेल और स्थानीय लोगों से मिली सूचना के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उन्हें हिरासत में लिया गया।

पूछताछ के दौरान चारों ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया, जिसके बाद विधिक कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेज दिया गया। जांच के दौरान पुलिस ने एक युवती और उसके परिजनों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की थी, लेकिन साक्ष्य न मिलने पर उन्हें छोड़ दिया गया।