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    गोरखपुर में रिटायर्ड होने से एक दिन पहले सहायक लेखाकार बर्खास्त, 11 लाख रुपये से ज्यादा जुर्माना भी लगा

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 11:55 AM (IST)

    गोरखपुर में उप मुख्य लेखाधिकारी कार्यालय के सहायक लेखाकार ईशपाल सिंह को सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले बर्खास्त कर दिया गया। उन पर बागपत में तैनाती के दौ ...और पढ़ें

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    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। बिजली निगम के उप मुख्य लेखाधिकारी कार्यालय गोरखपुर में तैनात सहायक लेखाकार ईशपाल सिंह को सेवानिवृत्त होने के एक दिन पहले 30 दिसंबर को बर्खास्त कर दिया गया है। उन पर पश्चिमांचल विद्युत वितरण खंड से जुड़े बागपत जिले में सहायक लेखाकार रहने के दौरान गबन का आरोप है।

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    गोरखपुर जोन प्रथम के मुख्य अभियंता आशुतोष श्रीवास्तव ने प्रकरण की जांच की। ईशपाल सिंह को बर्खास्त करने के साथ ही 11 लाख छह हजार 457 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

    ईशपाल सिंह की विद्युत वितरण खंड बागपत में 27 फरवरी, 2016 से 29 मई 2018 तक तैनाती थी। आरोप है कि उन्होंने तत्कालीन तकनीशियन ग्रेड दो (टीजी टू) सुरेश बाबू के साथ मिलकर एक करोड़ 69 लाख 52 हजार 473 रुपये का गबन किया। यह धनराशि 25 रसीद बुक पर उपभोक्ताओं से बिजली बिल के रूप में जमा कराई गई थी लेकिन इसे बिजली निगम के खाते में नहीं जमा किया गया।

    इनमें से 12 रसीद बुक ईशपाल सिंह के नाम से निर्गत थी। ईशपाल सिंह का तबादला 28 मई 2018 को पश्चिमांचल से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड कर दिया गया था। 29 मई 2018 को उन्हें कार्यमुक्त किया गया।

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    बागपत थाने में दर्ज हुई थी एफआइआर
    16 मई 2019 को बागपत थाने में एफआइआर दर्ज कराई गई थी। विद्युत वितरण खंड प्रथम बागपत के तत्कालीन अधिशासी अभियंता राजीव कुमार आर्य ने ईशपाल सिंह के साथ ही तत्कालीन टीजी टू व गाजियाबाद कमिश्नरेट के मंडोला लोनी उपकेंद्र के अवर अभियंता सुरेश बाबू, विद्युत वितरण खंड प्रथम बागपत के कार्यकारी सहायक/मुख्य खजांची राजीव कुमार गौड़, विद्युत वितरण खंड चतुर्थ के किठौर उपखंड अधिकारी विकल्प महेश सहारनपुर के विद्युत वितरण खंड नकुड़ के तत्कालीन व वर्तमान में विद्युत वितरण खंड प्रथम गुलरिहा के अधिशासी अभियंता राजवीर सिंह को आरोपित बनाया गया था।

    गबन के प्रकरण में उप मुख्य लेखाधिकारी कार्यालय गोरखपुर के सहायक लेखाधिकारी ईशपाल सिंह को दोषी पाया गया है। बिजली निगम के प्रबंध निदेशक ने उन्हें 30 दिसंबर को बर्खास्त करने के साथ ही अर्थदंड लगाया है।

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    -आशुतोष श्रीवास्तव, मुख्य अभियंता।