Gorakhpur News: अपनों से ठुकराए बुजुर्गों के लिए वृद्धाश्रम बना सहारा, सुबह राम भजन, शाम को कृष्ण भक्ति में रमते हैं लोग
गोरखपुर के वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्ग सुबह राम भजन और शाम को कृष्ण भक्ति में लीन होकर अपने जीवन को सार्थक बना रहे हैं। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित इस वृद्धाश्रम में वृद्धजनों की दिनचर्या में भजन-कीर्तन का कार्यक्रम शामिल है। अपनों से ठुकराए गए इन बुजुर्गों के लिए वृद्धाश्रम ही सहारा बनता है जहाँ उन्हें परिवार जैसा माहौल मिलता है।

सुनील सिंह, जागरण गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में सुबह की शुरुआत राम नाम के संगीतमयी भजन से होती है तो शाम को कृष्ण भक्ति में वृद्धजन लीन हो जाते हैं। समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित वृद्धाश्रम में रहने वाले वृद्धजन की दिनचर्या में यह शामिल है। वृद्धाश्रम के मंदिर में ही हारमोनियम व ढोलक की थाप पर प्रतिदिन भजन-कीर्तन का कार्यक्रम चलता है।
अपनों से ठुकराए वृद्धजन के लिए वृद्धाश्रम ही सहारा बनते हैं। घर से दूर होना उनके लिए पीड़ादायक हो सकती है, लेकिन यहां उनको कोई दिक्कत न हो और परिवार जैसा ही माहौल मिलता रहे, इसकी कोशिश समाज कल्याण विभाग की ओर से की जाती है। वृद्धजन यहां अपने परिवार जैसा ही महसूस करते हैं। समय से काम करने के बाद वह पूरा समय खाली रहते हैं। समय नहीं कट पाता था तो वह आपस में मिलकर भजन-कीर्तन कर लेते थे।
कई वृद्धजन में गायन व वादन की प्रतिभा छिपी है, लेकिन मौका नहीं मिल रहा था। यह तब निरख कर सामने आई, जब कुछ दिन पूर्व गोरखपुर ग्रामीण के विधायक विपिन सिंह ने ढोलक, हारमोनियम, झाल समेत अन्य वाद्य यंत्र उपलब्ध कराए। सरवर खातून व मुसाफिर में हारमोनियम तो कलावती व शीला में ढोलक बजाने की कला है। अन्य महिलाएं झाल बजाती हैं।
सांकेतिक तस्वीर। जागरण
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सभी वृद्धजन एक संग वृद्धाश्रम के मंदिर में सुबह रामनाम का गुणगान करते हैं तो शाम के समय कृष्ण की भक्ति करते हैं। इस दौरान वृद्ध रामायण की प्रेरक कहानियां भी सुनते-सुनाते हैं। वृद्धाश्रम के निवासियों के लिए यह भक्ति का समय बहुत महत्वपूर्ण है। यह उनके लिए आध्यात्मिक और मानसिक शांति प्रदान करता है। वृद्धाश्रम के अधीक्षक रामसिंह बताते हैं कि जब भजन-कीर्तन का कार्यक्रम चलता है तो बहुत अच्छा लगता है। इसमें शामिल होकर सभी लोग भक्ति में खो जाते हैं।
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सोरठी-बिरजाभार गाती हैं कलावती
वृद्धाश्रम में रहने वाली कलावती श्रीराम व श्रीकृष्ण की भक्ति के अलावा सोरठी बिरजाभार भी बहुत अच्छा गाती हैं। सोरठी बिरजाभार भोजपुरी का प्रेमकाव्य है। यह पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा बिहार में गाया व सुना जाता है। उनका साथ वृद्धाश्रम के सभी वृद्धजन देते हैं।
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