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गाजियाबाद में नए साल का पहला दिन 4 साल में सबसे प्रदूषित, दिल्ली-नोएडा के बाद तीसरे नंबर पर रहा शहर

Published: Thu, 01 Jan 2026 05:15 PM (IST)

गाजियाबाद में नववर्ष पर प्रदूषण का स्तर बीते चार वर्षों में सबसे अधिक रहा, जहां एक्यूआई 356 दर्ज किया गया। ...और पढ़ें

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HighLights

  1. गाजियाबाद में नववर्ष पर एक्यूआई 356 दर्ज

  2. चार वर्षों में नववर्ष पर सबसे अधिक प्रदूषण

  3. दिल्ली, नोएडा के बाद तीसरा सबसे प्रदूषित शहर

राहुल कुमार, साहिबाबाद। एक तरफ लोग नववर्ष का जश्न मनाते रहे, दूसरी ओर प्रदूषण के कारण लोगों की सांसें घुटती रहीं। बीते चार वर्ष के मुकाबले नववर्ष के दिन जिले की हवा सबसे जहरीली रही।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार बृहस्पतिवार को एक्यूआई 356 दर्ज किया गया। दिल्ली, नोएडा के बाद तीसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा। इससे पहले वर्ष 2021 में नववर्ष पर सबसे अधिक एक्यूआई 470 दर्ज किया गया था।

जिले के लोगों को प्रदूषण से बचाने के लिए खासकर शहरी आबादी को, हर वर्ष योजनाएं बनाई जाती हैं। नगर निकाय प्रदूषण रोकथाम के नाम पर करोड़ों का बजट भी खर्च करती हैं।

यह बजट सड़कों पर पानी का छिड़काव, मशीनों से सड़कों से धूल को हटाना, टूटी सड़कों के मेंटेनेंस समेत विभिन्न कार्यों में दिखाया जाता है। इसकी निगरानी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) करता है।

इसके बाद भी विभिन्न कार्यों के दावे करने वालीं और निगरानी करनी वालीं दोनों ही सरकारी संस्थाएं लोगों को साफ हवा नहीं दिला पातीं। वर्ष के पहले दिन से लेकर आखिरी दिन तक हवा ज्यादातर दिन जहरीली बनी रहती है।

साफ हवा की उम्मीद में साल दर साल गुजरती रहती हैं। बीते पांच वर्ष की बात करें तो वर्ष 2021 में नववर्ष के दिन एक्यूआइ सबसे अधिक 470 गंभीर श्रेणी में रहा था। वहीं वर्ष 2023 में नववर्ष पर एक्यूआइ 209 खराब श्रेणी में सबसे कम रहा था।

वर्ष 1 जनवरी 31 दिसंबर
2021 470 270
2022 352 322
2023 209 294
2024 236 173
2025 237 312

हम बेशक नववर्ष मनाने की खुशी में लगे रहे, लेकिन आंखों और सांसों में प्रदूषण का असर अलग ही महसूस होता रहा। अब छोड़कर गांव में बसने का मन करता है।

- अमित प्रकाश, निवासी, दिल्ली-99


वर्ष के पहले दिन ही इतनी जहरीली हवा में रहना पड़ा है कि आंखों में जलन व गले में खराश रही। प्रदूषण के कारण एनसीआर में रहना सबसे मुश्किल हो रहा है।

- शिल्पी गुप्ता, निवासी, शिखर एन्क्लेव

हर वर्ष अधिकारियों से ये ही आस रहती है कि वह प्रदूषण रोकथाम के लिए कोई ठोस योजना लेकर आएंगे। राहत के बजाय हर वर्ष हवा और जहरीली हो रही है।

- राहुल झा, संयुक्त सचिव, भारत सिटी

एनसीआर में इस उम्मीद के साथ आए थे कि बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन यहां प्रदूषण ही पीछा नहीं छोड़ रहा है। केवल कागजी योजनाओं के सहारे प्रदूषण रोका जा रहा है।

- शंकर झा, निवासी, भारत सिटी

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हर वर्ष प्रदूषण रोकथाम को लेकर योजना बनाकर कार्य किया जाता है। प्रदूषण का कम-ज्यादा होना हवा की गति व मौसम में नमी पर भी निर्भर करता है। हवा की गति कम होने पर प्रदूषण बढ़ जाता है।


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- अंकित सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।