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फर्जी पासपोर्ट रैकेट के आगे फेल हुआ सिस्टम, फर्जी पतों पर कैसे बने 22 पासपोर्ट? जिम्मेदारों की बड़ी चूक आई सामने

Published: Mon, 02 Feb 2026 09:55 AM (IST)

गाजियाबाद में 22 फर्जी पासपोर्ट जारी होने से सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं। पुलिस, एलआइयू, डाक और पासपोर्ट ...और पढ़ें

फर्जी पासपोर्ट रैकेट से पुलिस, डाक, एलआइयू और पासपोर्ट विभाग की लापरवाही दिखी।  (सांकेतिक तस्वीर)

फर्जी पासपोर्ट रैकेट से पुलिस, डाक, एलआइयू और पासपोर्ट विभाग की लापरवाही दिखी। (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. पुलिस, एलआइयू, डाक विभाग की लापरवाही से फर्जी पासपोर्ट रैकेट ने जारी करा लिए 22 पासपोर्ट

  2. पासपोर्ट आवेदन के समय आवेदक के दस्तावेजों की होती है जांच, नहीं पकड़ पाया विभाग शुरूआत में ही फर्जीवाड़ा

विनीत कुमार, गाजियाबाद। गाजियाबाद में फर्जी नाम और पतों पर जारी हुए 22 पासपोर्ट के मामले ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। इस बेहद संवेदनशील प्रकरण में पुलिस, लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (एलआइयू), डाक विभाग और पासपोर्ट विभाग की लापरवाही सामने आई है।

जिम्मेदार तंत्र की सुस्ती और उदासीनता ने न सिर्फ जालसाजों को खुला मैदान दिया, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा को भी खतरे में डाल दिया। अब सिस्टम यह पता लगाने में जुटा है कि पासपोर्ट हासिल कर आरोपित विदेश भाग गए हैं या देश में ही हैं।

पुलिस ने बरती लापरवाही, फर्जी नाम पतों पर जारी करा दिए पासपोर्ट

नियमों के अनुसार किसी भी पासपोर्ट आवेदन का भौतिक सत्यापन संबंधित बीट पुलिस अधिकारी (बीपीओ) को मौके पर जाकर करना होता है। बीते वर्ष ही यह व्यवस्था लागू की गई थी, ताकि फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाया जा सके। बावजूद इसके भोजपुर, त्यौड़ी, अतरौली, कलछीना और सैदपुर हुसैनपुर क्षेत्र के बीपीओ ने अपने कर्तव्यों का पालन नहीं किया।

प्रारंभिक जांच में पांच गांवों से जुड़े बीपीओ की गंभीर लापरवाही सामने आई है। बिना मौके पर गए, बिना आवेदकों की पहचान पुख्ता किए, सत्यापन रिपोर्ट पास कर दी गई। इतना ही नहीं, स्थानीय खुफिया इकाई यानी एलआइयू भी इस पूरे मामले में मूकदर्शक बनी रही।

आमतौर पर एलआइयू को संदिग्ध गतिविधियों, बाहरी लोगों की आवाजाही पर नजर रखनी होती है, लेकिन इतने बड़े रैकेट के बावजूद कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया। यदि एलआइयू समय रहते सतर्कता दिखाता, तो यह नेटवर्क शुरुआती स्तर पर ही पकड़ में आ सकता था।

देर से जागा पासपोर्ट विभाग, समय रहते चेतता तो बच जाता फर्जीवाड़ा

पासपोर्ट फर्जीवाड़े में पासपोर्ट विभाग की लापरवाही भी सामने आई है। जिस आधार पर विभाग ने गाजियाबाद पुलिस से संपर्क कर जांच के लिए अनुरोध किया उसी आधार पर आवेदन आते समय भी जांच कराई जा सकती थी।

क्योंकि गाजियाबाद निवासी नागरिक अपने क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय में आवेदन करते, लेकिन इन 22 जारी हो चुके पासपोर्ट और दो आवेदकों के मामलों में गाजियाबाद निवासी आवेदकों ने दिल्ली के क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय में आवेदन किया।

आवेदन करते समय फर्जी आधार समेत अन्य फर्जी दस्तावेज एवं प्रमाण पत्र लगाए गए। पासपोर्ट सेवा केंद्र में आवेदकों का बायोमैट्रिक होते समय भी दस्तावेजों की जांच की जाती है।

डाक विभाग को करनी थी पते पर डिलीवरी, पोस्टमैन रुपये लेकर हाथ में दे बैठा पासपोर्ट

डाक विभाग की भी इस मामले में लापरवाही रही है। विभागीय कर्मचारी को आवेदकों के पते पर पासपोर्ट की डिलीवरी करनी थी, लेकिन सिर्फ दो हजार रुपये के लिए पोस्टमैन ने किसी अन्य व्यक्ति के हाथ में पासपोर्ट थमा दिए। बेहद संवेदनशील दस्तावेज होने के कारण पासपोर्ट की डिलीवरी में लापरवाही देश की सुरक्षा को बड़े संकट में डाल सकती है।

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