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फर्जी पासपोर्ट रैकेट का पर्दाफाश: मोदीनगर के भोजपुर के पतों पर बनवा लिए 22 पासपोर्ट, महिला समेत पांच अरेस्ट

Published: Sun, 01 Feb 2026 10:30 PM (IST)

गाजियाबाद के मोदीनगर में फर्जी पासपोर्ट रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। जालसाजों ने भोजपुर इलाके के अधूरे पतों पर 22 ...और पढ़ें

जालसाजों ने दिल्ली के पासपोर्ट कार्यालय से भोजपुर इलाके के फर्जी और अधूरे पतों पर 22 पासपोर्ट जारी करा लिए। प्रतीकात्मक तस्वीर

जालसाजों ने दिल्ली के पासपोर्ट कार्यालय से भोजपुर इलाके के फर्जी और अधूरे पतों पर 22 पासपोर्ट जारी करा लिए। प्रतीकात्मक तस्वीर

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जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। मोदीनगर के भोजपुर में फर्जी दस्तावेज तैयार कर पासपोर्ट बनाने वाले रैकेट का पर्दाफाश किया है। जालसाजों ने दिल्ली के पासपोर्ट कार्यालय से भोजपुर इलाके के फर्जी और अधूरे पतों पर 22 पासपोर्ट जारी करा लिए। सभी पासपोर्ट सिख समाज के लोगों के हैं। जांच में सामने आया कि जिन पतों पर ये पासपोर्ट बने, वहां आवेदक कभी रहे ही नहीं। वहीं, सभी पासपोर्ट आवेदन में एक ही मोबाइल नंबर था।

26 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

पुलिस ने 26 लोगों के खिलाफ भोजपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया है। जानकारी पर खुफिया एजेंसियां भी जांच में जुट गई हैं। यह मामला तब उजागर हुआ जब दिसंबर 2025 में रीजनल पासपोर्ट अधिकारी दिल्ली की ओर से गाजियाबाद पुलिस को पत्र भेजकर संदिग्ध पासपोर्टों की सूची उपलब्ध कराई। पुलिस ने जांच की तो पता चला कि भोजपुर, त्यौड़ी, अतरौली, कलछीना और सैदपुर हुसैनपुर के नाम पर अधूरे पते पर पासपोर्ट बनवाए गए थे। पुलिस ने महिला, एक पोस्टमैन समेत पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

छह मोबाइल, दो कार और 4030 रुपये बरामद

पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए आरोपित कुतुब विहार फेज एक गोयल डेरी दिल्ली का विवेक गांधी, हरगोविंद एन्क्लेव छतरपुर दिल्ली का प्रकाश सुब्बा, गांव ढिढाला थाना परतापुर जिला मेरठ का अरुण कुमार, शिवनगर दिल्ली का अमनदीप सिंह, और शिवनगर एक्सटेंशन तिलक नगर पश्चिम दिल्ली की सातवंत कौर हैं। इनसे चार फर्जी आधार कार्ड, दो फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस, दो पासपोर्ट, दो फर्जी बैंक पासबुक, छह मोबाइल, दो कार और 4030 रुपये बरामद किए हैं।

सभी पासपोर्ट आरोपितों को सौंप दिए

पुलिस की जांच में सामने आया कि भोजपुर पोस्ट आफिस में तैनात पोस्टमैन अरुण कुमार ने फर्जीवाड़े में अहम भूमिका निभाई। पूछताछ में उसने बताया कि करीब पांच महीने पहले एजेंट प्रकाश सुब्बा और विवेक गांधी नाम के व्यक्ति उससे मिले थे। दोनों ने हर पासपोर्ट की डिलीवरी सीधे अपने हाथ में देने पर दो हजार रुपये देने का लालच दिया। लालच में उसने बिना पते पर डिलीवरी किए ही सभी पासपोर्ट आरोपितों को सौंप दिए।

एक पासपोर्ट बनवाने के लिए 15 हजार रुपये दिए

वहीं, प्रकाश सुब्बा ने पुलिस को बताया कि उसे प्रत्येक पासपोर्ट बनवाने के लिए 15 हजार रुपये दिए थे। विवेक गांधी ने आधार कार्ड में पते बदलने का काम किया था, इसके लिए उसने फर्जी दस्तावेज बनाकर लगाए थे। बता दें कि दो आवेदक जिनके पासपोर्ट जारी नहीं हो पाए उनमें सातवंत कौर और उनका बेटा अमनदीप से भी पुलिस ने पूछताछ की, जिन्होंने इसी रैकेट के जरिए फर्जी पहचान पर आवेदन किया है।

पुलिसकर्मियों की भूमिका बेहद लापरवाही भरी

पुलिस दोनों से जानकारी जुटा रही है कि वह पूर्व में जारी हुए 22 आवेदकों को नहीं जानते हैं। वह एजेंट के जरिए विदेश जाने के लिए पासपोर्ट बनवा रहे थे। हालांकि, पुलिस आरोपितों से मिली जानकारी की पुष्टि में लगी हुई है। वहीं, पासपोर्ट सत्यापन पुलिस द्वारा किया जाता है। पूरे मामले में पुलिसकर्मियों की भूमिका बेहद लापरवाही भरी रही है। आवेदक का मौके पर सत्यापन करना होता है। पुलिसकर्मियों ने यदि मौके पर जांच की होती तो फर्जी पासपोर्ट बनते ही नहीं।

कबूतरबाजी से जुड़ा हो सकता है नेटवर्क

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यह पूरा नेटवर्क कबूतरबाजी से भी जुड़ा हो सकता है। आशंका है कि इन फर्जी पासपोर्टों का इस्तेमाल खालिस्तानी समर्थकों, आतंकियों, भ्रष्टाचार के आरोपितों और संगीन अपराधों में वांछित लोगों को विदेश भेजने के लिए किया गया। ऐसे लोग विदेश जाकर अपनी पहचान छिपा लेते हैं, जिससे उन्हें भारत वापस लाना जांच एजेंसियों के लिए मुश्किल होता है। जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि इन पासपोर्टों पर अब तक कितने लोग देश छोड़ चुके हैं और किन देशों की यात्रा की है। यदि कोई संदिग्ध विदेश फरार पाया, तो उसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की मदद से कार्रवाई की जाएगी।

"पोस्टमैन, एजेंट समेत पांच आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ कर जानकारी जुटाई जा रही है। सभी पहलुओं की जांच हो रही है। पासपोर्ट विभाग द्वारा सभी पोस्टपोर्ट निरस्त कर दिए हैं।"

-आलोक प्रियदर्शी, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, पुलिस कमिश्नरेट गाजियाबाद।

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