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    Diabetes के इलाज में क्रांति: ऊंटनी का दूध बनेगा अब 'प्राकृतिक इंसुलिन', शोध में हुआ बड़ा खुलासा

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 04:31 PM (IST)

    बरेली के सुहैल हकीम खान के शोध में ऊंटनी के दूध में मौजूद बायोएक्टिव प्रोटीन को रक्त शर्करा नियंत्रित करने में प्रभावी पाया गया है। एनडीआरआई में हुए इ ...और पढ़ें

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    ऊंटनी का दूध

    हिमांशु अग्निहोत्री, जागरण, बरेली। पुराना शहर निवासी सुहैल हकीम खान ने राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआइ) में किए शोध के दौरान पाया कि ऊंटनी के दूध में मौजूद जैव-सक्रिय (बायोएक्टिव) प्रोटीन रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने चूहों पर परीक्षण किया, जिसने मधुमेह के सस्ते और प्राकृतिक उपचार का मार्ग भी प्रशस्त किया है।

    सुहैल हकीम खान ने इसी वर्ष पीएचडी पूरी की है। उन्होंने संस्थान के 'एनिमल बायोकेमिस्ट्री डिवीजन' में पांच वर्षों का गहन अध्ययन किया। वह बताते हैं कि वर्तमान समय में मधुमेह एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट बन चुका है। यह बीमारी अब केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी तेजी से पैर पसार रही है। असंतुलित आहार, तनाव और शारीरिक सक्रियता की कमी ने हर उम्र के व्यक्ति को इसके जोखिम में डाल दिया है। उनका यह शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल्स में प्रकाशित हुआ है।

    प्रयोगशाला और परीक्षण के परिणाम

    शोध के दौरान, वैज्ञानिक विधियों से ऊंटनी के दूध से विशिष्ट प्रोटीन को अलग किया गया। इसके बाद इसे प्रयोगशाला में सेल लाइन पर टेस्ट किया गया। परीक्षणों में पाया गया कि यह प्रोटीन न केवल इंसुलिन के कार्य को बेहतर बनाता है, बल्कि अग्न्याशय (पैनक्रियाज) की बीटा कोशिकाओं के विकास और विभाजन को भी बढ़ावा देता है।

    सस्ता और सुरक्षित भविष्य

    वर्तमान में डायबिटीज की कई दवाओं के दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैं। डा. खान का शोध यह संकेत देता है कि यदि ऊंटनी के दूध के प्रोटीन पर आधारित हेल्थ सप्लीमेंट या फंक्शनल फूड तैयार किए जाते हैं, तो यह आम जनता के लिए एक सुरक्षित और किफायती विकल्प होगा। यह शोध भविष्य में नेचुरल एंटी-डायबिटिक उत्पादों के निर्माण की राह खोलेगा, जो विशेष रूप से टाइप-वन और टाइप-टू मधुमेह के प्रबंधन में कारगर साबित होगा।

    इस तरह करता है काम

    इंसुलिन सुधार: यह शरीर में इंसुलिन के स्तर को प्राकृतिक रूप से सुधारने में मदद करता है।

    जटिलताओं में कमी: शोध में सामने आया कि यह प्रोटीन खराब कोलेस्ट्राल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर को कम करने में सहायक है।

    अंगों की सुरक्षा: यह जिगर (लिवर) और गुर्दे (किडनी) की कार्यप्रणाली को बिगड़ने से रोकता है।

     

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