आवारा कुत्तों का 'खूनी' खेल: 3 साल में 3 लाख से ज्यादा शिकार, क्या कागजी नोडल बचाएंगे आपके बच्चे की जान?
सुप्रीम कोर्ट और शासन के आदेशों के बावजूद, बरेली में आवारा कुत्तों का आतंक जारी है। शिक्षा विभाग ने स्कूलों में नोडल अधिकारी कागजों पर नियुक्त किए हैं ...और पढ़ें

गेट के पास जमा आवारा कुत्ते
मनीस पांडेय, जागरण, बरेली। सुप्रीम कोर्ट और शासन के आदेशों की किस तरह खानापूर्ति करनी है, यह शिक्षा विभाग की कार्यशैली से पता चल जाएगा। आवारा आतंक की रोकथाम को बीते दिनों जारी निर्देशों का पालन सिर्फ कागजों तक ही सिमटा दिया गया। विभाग ने जो रिपोर्ट तैयार की है, उसमें अधिकतर विद्यालयों को आवारा आतंक से सुरिक्षत बताया है, जबकि हकीकत कुछ और है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शासन ने स्कूलों और अस्पतालों को कुत्तों के आतंक से सुरक्षित करने के लिए नोडल अधिकारियों की व्यवस्था के निर्देश दिए थे। इसके तहत नगर निकाय क्षेत्रों में स्थित बेसिक व माध्यमिक विद्यालयों में नोडल अधिकारी नामित किए जा रहे हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति अब भी जस की तस बनी हुई है।
शहर से लेकर गांव तक हर जगह आवारा कुत्तों का आतंक लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। शहर के कई प्रमुख स्कूलों, सरकारी व निजी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और बाजारों के आसपास आवारा कुत्तों के झुंड देखे जा सकते हैं। सुबह और छुट्टी के समय बच्चों पर हमले की आशंका बनी रहती है।
अभिभावक डरे-सहमे रहते हैं, जबकि स्कूल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ते नजर आते हैं।बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. विनीता ने बताया कि आवारा कुत्तों से सुरक्षा के लिए सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को नोडल अधिकारी नामित किया गया है।
इसके साथ ही प्रत्येक बेसिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक को भी नोडल बनाया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके। वहीं जिला विद्यालय निरीक्षक डा. अजीत कुमार ने बताया कि सभी माध्यमिक विद्यालयों में नोडल अधिकारी नामित करने के निर्देश दिए गए हैं। नोडल अधिकारी का नाम और फोन नंबर स्कूल परिसर में प्रदर्शित किया जाएगा। अभिभावक-शिक्षक बैठकों में भी इसकी जानकारी दी जाएगी।
डीआइओएस ने बताया कि स्कूलों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने कैंपस के आसपास स्थित सीएचसी और पीएचसी का डाटा अपने पास रखें, ताकि किसी बच्चे के घायल होने पर तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। प्रत्येक स्कूल का नोडल अलग होगा, जिसे प्रधानाचार्य नामित करेंगे। नगर निगम व अन्य स्थानीय निकायों को भी इन नोडल अधिकारियों की सूची उपलब्ध कराई जाएगी।
फिलहाल स्कूलों से नोडल अधिकारियों की सूचना मांगी गई है और कैंपस की सुरक्षा स्थिति का विवरण भी तलब किया गया है। हालांकि जमीनी हकीकत यह है कि नोडल अधिकारी बनने के बावजूद आवारा कुत्तों की संख्या कम नहीं हुई है। नसबंदी, टीकाकरण और पकड़ने की कार्रवाई बेहद धीमी है। अस्पतालों के बाहर भी कुत्तों के झुंड मरीजों और तीमारदारों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं।
कुत्ता काटने के आंकड़े
- वर्ष-2023 में 1,00,613 मामले
- वर्ष-2024 में 1,10,895 मामले
- वर्ष-2025 में 1,14,996 मामले - 30 नवंबर तक
केस स्टडी
- नवंबर में बारादरी थाना क्षेत्र के जोगी नवादा में घर के बाहर खेल रही एक छोटी बच्ची पर आवारा कुत्ते ने हमला कर उसका चेहरा नोच लिया था। बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई थी।
- जुलाई में भोजीपुरा क्षेत्र के सगलपुर गांव में तीन वर्षीय बच्चे के चेहरे पर आवारा कुत्ते ने हमला कर दिया था, जिससे वह बुरी तरह जख्मी हो गया और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
- अगस्त में नैनीताल रोड स्थित एक स्कूल में छुट्टी के बाद चार बच्चों पर कुत्तों ने हमला कर दिया था। चारों घायल हो गए थे, जबकि एक बच्चे की जांघ पर गंभीर चोट आने के कारण उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।

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