सरकारी ही नहीं, अब निजी अस्पतालों में भी अनिवार्य होगी ARV और ARS वैक्सीन, 500 प्राइवेट अस्पतालों को नोटिस
बरेली में अब निजी अस्पतालों में भी एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) और इम्युनोग्लोबिन (ARS) रखना अनिवार्य होगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक चित्र
अनूप गुप्ता, जागरण, बरेली। कुत्ता या बंदर के काटने पर अभी तक मरीजों को सरकारी अस्पताल दौड़ना पड़ता था। कई बार हास्पिटल बंद होने से उन्हें एआरवी समय से नहीं लग पाती थी। इसे लेकर सु्प्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब सरकारी ही नहीं, अब सभी निजी अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) और इम्युनोग्लोबिन (एआरएस) रखना अनिवार्य हो गया है।
इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिले के सभी करीब पांच सौ प्राइवेट मेडिकल कालेज और अस्पताल संचालकों को नोटिस भी जारी कर दिए हैं। इतना ही नहीं, इसके लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) से भी सहयोग लिया जा रहा है। इसके बाद अब लोगों को पास में ही किसी निजी चिकित्सालय में ही एआरवी और एआरएस लगने की सुविधा मिल सकेगी।
अभी तक तीन सौ बेड और जिला चिकित्सालय के साथ 16 सीएचसी और 80 यूपीएससी-पीएचसी में ही एआरवी और एआरएम लगाए जाते हैं। जबकि कुत्ता और बंदर काटने की घटनाएं काफी बढ़ गई हैं। ऐसे में कई बार ऐसा होता है कि पीड़ित व्यक्ति इन वैक्सीन को लगवाने के लिए घर से दूर सरकारी अस्पताल तक दौड़ लगाता है।
अगर वहां किसी वजह से चिकित्सालय बंद मिला तो समय से टीका न लग पाने से उसे इसके गंभीर नतीजे झेलने पड़ सकते है। जबकि अभी तक प्राइवेट हास्पिटल और नर्सिंग होम अपनी सहूलियत के हिसाब से एआरवी रखते हैं। इसे लेकर उच्चतम न्यायालय ने सख्ती की तो स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी करीब पांच सौ निजी अस्पतालों के संचालकों को एआरवी और एआरएस अनिवार्य रूप से रखने के निर्देश दिए हैं।
हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं किया गया है कि प्राइवेट हास्पिटल में यह वैक्सीन सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जाएगी या नहीं। लिहाजा, पीड़ित को इसके लिए भुगतान करना होगा। उसे पांच वैक्सीन लगाने का पूरा कोर्स करने के लिए ढाई से तीन हजार रुपये तक खर्च करना पड़ सकता है।
रिपोर्ट में शामिल होंगे प्राइवेट हास्पिटल में भी आने वाले केस
सरकारी अस्पतालों में कुत्ता-बंदर काटने के जितने केस आते हैं, उसी आधार पर रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है लेकिन बड़ी संख्या में निजी हास्पिटल में आने वाले मामलों को इसमें दर्ज ही नहीं किया जा पा रहा था। अब निजी अस्पताल में आने वाले मामले की जानकारी भी शासन तक पहुंचे, इसके लिए प्राइवेट हास्पिटल में भी एक नोडल अधिकारी को नामित कर इसकी रिपोर्टिंग नियमित तौर से सीएमओ कार्यालय में करने के निर्देश जारी किए गए हैंं।
हर साल कुत्ता काटने के एक लाख से ज्यादा आ रहे केस
हर साल कुत्ता काटने के एक लाख से ज्यादा केस सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध डाग बाइट के आंकड़ों को देखे तो वर्ष 2023 में 1,00,613 मामले सामने आए। जबकि वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 1,10,895 रहा। एक जनवरी से नवंबर तक 1,14,996 मामलों को दर्ज किया गया है।
जबकि माहवार एआरवी लगाने की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में 11,123, अगस्त में 10,030, सितंबर में 9,421, अक्टूबर में 9,207, नवंबर में 10,200 लोगों को एंटी रैबीज की वैक्सीन लगाई गई है। इस रिपोर्ट से जाहिर है कि काफी संख्या में लोग कुत्ता और बंदर काटने का शिकार हो रहे हैं।
कुत्ता काटने पर एआरएस लगवाना भी जरूरी
डा. अतुल ने बताया कि ज्यादातर मरीजों को एआरएस के बारे में पता ही नहीं है। इसे लेकर सचेत करते हुए आइएमए अध्यक्ष डा. अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि कुत्ता या बंदर काटने पर सिर्फ खरोंच आई है तो केवल एआरवी लगाई जाती है, जबकि जानवर के काटने के बाद खून भी बहना शुरू हो गया है तो फौरन एआरएस भी लगवाना भी जरूरी होता है।
सीरम लगाने पर खून में पहुंचे संक्रमण को तत्काल खत्म करने में मदद मिलती है। जबकि आमतौर पर मरीज दोनों ही मामलों में केवल एआरवी ही लगवा लेता है। निजी अस्पतालों में भी एआरवी और एआरएम की उपलब्धता को लेकर सीएमओ से जो निर्देश मिले हैं, उसका अनुपालन कराया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन मे भी निजी मेडिकल कालेज और प्राइवेट अस्पतालों में एआरवी और एआरएम की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जानी है। इसके लिए उन्हें नोटिस दे दिए गए हैं। साथ ही प्राइवेट हास्पिटल में इसकी रिपोर्ट देने के लिए नोडल अधिकारियों की तैनाती करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
- डा. विश्राम सिंह, सीएमओ
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