सियासी रण: पिताओं ने राज किया, पर बेटों को नहीं मिला जनता का साथ; जानें कौन रहा सफल
बरेली के सियासी रण में दिग्गजों के उत्तराधिकारी अपनी चमक बिखेरने में नाकाम रहे। सर्वराज सिंह और डॉ. दिनेश जौहरी जैसे धुरंधरों की विरासत उनके वारिस नही ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक चित्र
अशोक आर्य, जागरण, बरेली। दो संसदीय और नौ विधानसभा सीटों वाले जिले के सियासी मैदान में कई धुरंधरों ने जमकर पारी खेली, लेकिन उनके उत्तराधिकारी रण में कौशल नहीं दिखा पाए। कुछ ने स्थानीय स्तर पर चमक छोड़ी, लेकिन विधानसभा व संसद तक पहुंच नहीं पाए। सिर्फ एक बेटा और एक बेटी ही उस मुकाम तक पहुंच सके। आने वाले विधानसभा चुनाव में भी कुछ नए चेहरे दिखाई देने की उम्मीद, लेकिन वह कितना कौशल दिखा पाएंगे, यह भविष्य में छिपा है।
आंवला संसदीय क्षेत्र से सर्वराज सिंह तीन बार सांसद रहे। वह दो बार समाजवादी पार्टी से और एक बार जनता दल (यूनाइटेड) से चुनाव जीतकर संसद में पहुंचे। उनके पुत्र सिद्ध राज सिंह ने वर्ष 2017 में आंवला सीट से विधायकी का चुनाव लड़ा, लेकिन विजय नहीं पा सके। इसी सीट पर तीन बार भाजपा से सांसद बने राजवीर सिंह ने अच्छी पारी खेली।
1989, 1991 और 1998 में जनता ने उन्हें संसद में पहुंचाया। उनके पुत्र धीरेंद्र सिंह धीरू भी राजनीति से जुड़े, लेकिन उस स्तर पर नहीं पहुंच पाए। बरेली शहर सीट पर भाजपा से डा. दिनेश जौहरी वर्ष 1985 से तीन बार विधायक बने। उनके पास स्वास्थ्य मंत्री का पद भी रहा। वर्ष 2022 में उनके बेटे राहुल जौहरी ने टिकट मांगा, लेकिन टिकट नहीं मिलने के कारण वह चुनाव नहीं लड़ पाए।
बरेली सीट से चार बार और कैंट से दो बार विधायक रहे और मौजूदा समय में भाजपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल के बेटे मनीष अग्रवाल अब तक सक्रिय राजनीति से दूर हैं। समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद व विधायक रहे वीरपाल सिंह यादव के बेटे डा. देवेंद्र सिंह और पूर्व विधायक महीपाल सिंह के बेटे अमित राज यादव भी राजनीति में सक्रिय हैं। वह उस स्तर तक पहुंचने के लिए दम लगा रहे हैं।
कांग्रेस से पांच बार विधायक रहे रामेश्वर नाथ चौबे का लंबे समय तक क्षेत्र की जनता ने साथ दिया। उनके बेटे राजुलनाथ चौबे ने बिथरीचैनपुर सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं पाए। जिले में रहने वाले हरीश गंगवार बीसलपुर से दो बार विधायक रहे। सपा सरकार में उन्हें मंत्री पद भी मिला। उनके बेटे देवेश गंगवार ने बरेली महापौर का चुनाव लड़ा, लेकिन जीत दर्ज नहीं करा पाए।
पवन विहार निवासी वीरेंद्र सिंह ने बसपा के टिकट पर बिथरी चैनपुर सीट से वर्ष 2012 और 2017 में चुनाव जीता। उनके बेटे आशीष सिंह ने वर्ष 2022 में बसपा के ही टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन बहुत कम वोट पाए। फरीदपुर से तीन बार विधानसभा चुनाव जीते सियाराम सागर के बेटे विशाल सागर ने वर्ष 2022 में विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन जीत दर्ज नहीं करा पाए।
नवाबगंज से वर्ष 2017 में भाजपा के टिकट पर विधायक बने केसर सिंह की पत्नी ऊषा गंगवार दो बार जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं। केसर सिंह के बेटे विशाल गंगवार ब्लाक प्रमुख रहे, विधायकी में उन्हें मौका नहीं मिला। बहेड़ी सीट पर समाजवादी पार्टी के टिकट पर मंजूर अहमद ने तीन बार विधानसभा का चुनाव लड़ा।
जनता ने उन्हें तीनों बार विधानसभा पहुंचाया। उनके बेटे नगर पालिका चेयरमैन पद तक ही पहुंच पाए हैं। वही, भाजपा से एक बार विधायक और शहर के पहले महापौर बने कुंवर सुभाष पटेल के बेटे प्रशांत पटेल ने वर्ष 2007 में विधानसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन पांच हजार वोट भी नहीं पा सके। मौजूदा समय में उनकी पुत्रवधू रश्मि पटेल जिला पंचायत अध्यक्ष हैं।
सिर्फ तीन उत्तराधिकारी ही जीत सके मैदान
समाजवादी पार्टी के नेता मौजूदा समय में भोजीपुरा विधायक शहजिल इस्लाम अपनी परिवार में तीसरी पीढ़ी के नेता हैं। उनका दादा अश्फाक अहमद चार बार विधायक रहे और पिता इस्लाम साबिर ने एक बार वर्ष 1991 में जीत दर्ज की थी। बेटियों में सुमनलता सिंह का नाम आता है। वह सन्हा (अब बिथरीचैनपुर) सीट पर एक बार विधायक बनीं। उनके पिता ओमप्रकाश सिंह मंत्री रहे थे। कांग्रेस सांसद मिसरयार खां के बेटे शराफत यार खां भी एक बार कांवर (अब मीरगंज) सीट पर विधानसभा चुनाव जीता था।
मैदान में दिखाई देंगे कुछ नए चेहरे
आने वाले विधानसभा चुनाव में शहर के कुछ दिग्गज नेताओं के उत्तराधिकारियों के चेहरे सामने दिखाई देंगे। इसके लिए उन्होंने तैयारी भी शुरू कर दी है। यह नए चेहरे नवाबगंज, बहेड़ी, भोजीपुरा, बिथरीचैनपुर, आंवला विधानसभा सीट पर दिखाई देने की उम्मीद है। बीते दिनों पहले इन चेहरों के साथ देश-प्रदेश की कई राजनीतिक हस्तियां नजर आई थीं।
लेख का संक्षिप्त सार
| नेता (पिता/दादा) | उत्तराधिकारी | परिणाम/स्थिति |
| सर्वराज सिंह (3 बार सांसद) | सिद्ध राज सिंह | 2017 में चुनाव हारे |
| राजवीर सिंह (3 बार सांसद) | धीरेंद्र सिंह धीरू | सक्रिय, पर बड़ी जीत का इंतजार |
| डा. दिनेश जौहरी (मंत्री/3 बार MLA) | राहुल जौहरी | टिकट की दौड़ में पिछड़ गए |
| ओमप्रकाश सिंह (मंत्री) | सुमनलता सिंह | सफल (एक बार विधायक बनीं) |
| इस्लाम साबिर (पूर्व विधायक) | शहजिल इस्लाम | सफल (तीसरी पीढ़ी के सफल नेता) |
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