Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck

    क्या है 3 वट वृक्षों और उस चरवाहे का रहस्य? त्रिवटीनाथ मंदिर की अनसुनी कहानी अब दुनिया देखेगी

    Updated: Sat, 03 Jan 2026 05:11 PM (IST)

    बरेली में त्रिवटीनाथ मंदिर और कैंट किला में लाइट एंड साउंड शो की सैद्धांतिक सहमति मिल गई है। पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित इन शो में त्रिवटीनाथ मंदिर का ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    त्रिवटीनाथ मंदिर में चल रहे पर्यटन विकास के कार्य। जागरण

    कमलेश शर्मा, जागरण, बरेली। नाथ कारिडोर परियोजना में श्रभ् त्रिवटीनाथ मंदिर में लाइट एंड साउंड शो की स्थापना की तैयारी पहले से चल रही है। अब कैंट किला में भी लाइट एंड साउंड शो की सैद्धांतिक सहमति मिल गई है। पर्यटन विभाग और कैंट बोर्ड के बीच इसको लेकर विमर्श हो चुका है।

    श्री त्रिवटीनाथ मंदिर में जहां धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व प्रदर्शित होगा, वहीं किला में सेना के शौर्य का प्रदर्शन किया जाएगा। पहले कैंट क्षेत्र का ऐतिहासिक किला आम जनता के लिए खुला रहता था, लेकिन सुरक्षा कारणों से बंद करा दिया गया था। लाइट एंड साउंड शो का आयोजन होने से फिर आम जनता के लिए इसे खोल दिया जाएगा।

    आस्था के साथ पर्यटन को जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में पर्यटन विभाग की ओर से शहर में सात नाथ मंदिरों को आपस में जोड़ने के लिए नाथ कारिडोर विकसित कराया जा रहा है। सप्त नाथ मंदिरों में एक श्री त्रिवटीनाथ मंदिर का अपना अलग इतिहास है।

    अतीत के पन्ने पलटने पर ज्ञात होता है कि वर्ष 1474 में एक चरवाहा दोपहर के वक्त वहां आराम करते हुए सो गया, जिसको भगवान भोले शंकर ने सपना दिया कि यहां तीन वट वृक्ष के बीच में उनका शिवलिंग है। चरवाहा उठा तो उसने वहां पर खोदाई कराई जहां शिवलिंग दिखा। इसके बाद आसपास के लोग वहां पर जलाभिषेक करने लगे।

    तीन वट वृक्षों के बीच शिवलिंग निकलने से उसको त्रिवटी कहने लगे और वर्तमान में श्री त्रिवटीनाथ मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है। इस मंदिर में 6.55 करोड़ रुपये की लागत से पर्यटन विकास के कार्य कराए जा रहे हैं। परिसर में सत्संग भवन, प्रसाद एंड फ्लोरिस्ट शाप, टायलेट ब्लाक का काम चल रहा है।

    इसमें जिलेभर के धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक धरोहरों के महत्व प्रदर्शित करने के लिए लाइट एंड साउंड शो के प्रदर्शन की सहमति बन चुकी है। जल्द ही इसका प्रस्ताव शासन को भेजने की तैयारी है। प्राचीन धार्मिक स्थलों के अलावा रुहेलखंड की धरती पौराणिक और क्रांतिकारियों की शौर्य गाथा से भी भरी पड़ी है।

    वर्ष 1857 की क्रांति के समय रुहेलखंड के क्रांतिकारियों की गौरवगाथा से पूरा देश परिचित हो उठा था। उससे पहले भी यहां के नवाब और राजाओं का यश दूर तक था। कैंट क्षेत्र में सेना के शौर्य का प्रतीक किला है। ब्रिटिश काल में सेना ने इसे संरक्षित किया। दो दशक पहले तक यह आम लोगों के लिए खुला रहता था, लेकिन सुरक्षा कारणों से बंद करा दिया गया था।

    उप निदेशक पर्यटन ने कैंट बोर्ड के अधिकारियों से संपर्क साधा और किला में नियमित लाइट एंड साउंड शो का प्रस्ताव रखा तो कैंट बोर्ड की सचिव डा. तनु जैन समेत अन्य अधिकारियों ने इस पर सैद्धांतिक सहमति दे दी है। इसमें स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी सेना की शौर्य गाथा का प्रदर्शन किया जाएगा। श्री त्रिवटीनाथ और किला दोनों जगह लाइट एंड साउंड शो शुरू हो जाने पर पर्यटकों को ठहरने का अवसर मिलेगा।

     

    श्री त्रिवटीनाथ मंदिर में जिले के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों का लाइट एंड साउंड शो से जबकि कैंट के किला में क्रांतिकारियों और सैनिकों की शौर्य गाथा का प्रदर्शन करने के लिए लाइट एंड साउंड शो की सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है। पर्यटकों के रात्रि विश्राम के भी प्रबंध किए जाएंगे। वर्ष 2024 के मुकाबले 2025 में पर्यटकों की संख्या 20 प्रतिशत बढ़ी है। नाथ कारिडोर के कार्य पूर्ण हो जाने और दो स्थानों पर विशेष आयोजन होने से पर्यटकों की संख्या में और बढ़ोत्तरी होगी।

    - रवींद्र कुमार, उप निदेशक पर्यटन


    यह भी पढ़ें- तैयार हो जाइए! महाशिवरात्रि पर लगने जा रहा है भव्य 'फ्लावर-शो', एक हफ्ते तक शहर में दिखेगा अद्भुत नजारा