जल संरक्षण बना जीवन की धारा, बूंद-बूंद पानी से बदली सूख रही बुंदेली धरती की तकदीर
रामबाबू तिवारी ने बुंदेलखंड में जल संरक्षण के लिए बड़ा अभियान चलाया है। उन्होंने बांदा के अधांव गांव में 'वाटर बैंक' स्थापित किया, जो 31 तालाबों को पु ...और पढ़ें

बबेरू के अधांव गांव में रामबाबू द्वारा तैयार किया गया वाटर बैंक व जल चौपाल में युवाओं को पानी का मोल समझाते रामबाबू तिवारी। फाइल फोटो
विमल पांडेय, बांदा। 10 साल पहले बांदा जिले के एक छोटे से गांव अधांव के रामबाबू जलसंरक्षण के लिए एक बड़ा इरादा लेकर गांव के गलियारों में पानी जागरूकता मिशन लेकर उतरे। पीड़ा थी कि बुंदेलखंड का मुख्य स्रोत खेती किसानी है लेकिन पानी ही नहीं रहेगा तो क्या खेती, क्या किसानों की मेहनत? उन्होंने सामूहिक प्रयास से सूख रही बुंदेली धरती की कोख को पानी से संतृप्त करने की मुहिम चला दी। मुहिम इस कदर रंग लाई कि वह जनपद के 31 तालाबों का जीवन बचाने में कामयाब हो गए। इस मिशन में उन्होंने अपने गांव में एक वाटर बैंक स्थापित कर दिया।
ग्रामीणों की मेहनत और खुद के प्रयास से बनाया गया यह वाटर बैंक बुंदेलखंड का पहला पानी संग्रहालय का रूप ले चुका है। यह वाटर बैंक 11 बीघे की तालाबी भूमि में तैयार किया गया है। बनाए गए इस वाटर बैंक का प्रमुख उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र में बरसात की एक-एक बूंद को सहेजना है। रामबाबू ने जिले के अधिकारियों से मिलकर ऐतिहासिक और प्राचीन सात तालाबों से अतिक्रमण भी हटवाया है। जल संरक्षण के लिए वह बांदा समेत अन्य कई जिलों में गांव- गांव जल चौपाल लगाकर हजारों लोगों से संवाद स्थापित कर रहे हैं। पानी के महत्व बताने के लिए उन्होंने कई जनपदों में पदयात्राएं भी की हैं। तीन साल पहले जल शक्ति मंत्रालय ने उन्हें वाटर हीरो अवार्ड से सम्मानित किया है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से जल प्रबंधन पर शोध कर रहे रामबाबू तिवारी ने अपनी पढ़ाई का जरिया जल संरक्षण ही बनाया। उन्होंने अपने शोध के विषय को पानी के लिए तड़पते बुंदेलखंड में ही प्रारंभ किया। वर्ष 2014 से अपने गांव में उनकी शुरू हुई यह प्रयोगशाला आम लोगों को जागरूक करने में काफी कारगर साबित हुई। रामबाबू कहते हैं कि पानी का मोल हर आम आदमी को समझना बहुत आवश्यक है। एक - एक बूंद से तालाब भर जाता है।
वह कहते हैं कि अधांव गांव में बनाए गए वाटर बैंक सिर्फ आम लोगों के लिए एक नजीर है कि खुद से प्रयास करें तो हर समस्या का हल निकाला जा सकता है। बताया कि कभी गांव के हालात ऐसे रहें कि गर्मियों के दिनों में पशु पक्षी तक पानी के लिए बेहाल रहते थे लेकिन आज ग्रामीणों के प्रयास के बाद गांव का वाटर बैंक पूरे गांव का भूजल मजबूत कर रहा है। रामबाबू के अनुसार वाटर बैंक की स्थापना के बाद भूजल में काफी सुधार हुआ है।
एक- एक बूंद का हिसाब रखता है वाटर बैंक
रामबाबू बताते हैं कि वाटर बैंक के संचालन के लिए गांव में ही एक तालाब प्रबंध समिति का गठन किया गया है। वाटर बैंक का मानक है कि जल हो, जलीय जीव जंतु,और पारिस्थितिकी तंत्र हो।वाटर बैंक के माध्यम से जल का संग्रह करना है। बताया कि वाटर बैंक के आसपास गांव में अतिरिक्त( बाढ़ )जल संग्रह किया जाता है। इससे जल का भंडारण कार्य होता है। वाटर बैंक के प्रयोग सबसे अहम बात यह भी है कि जिस प्रकार से किसी वस्तु या सामान का लेखा जोखा होता है उसी प्रकार इस वाटर बैंक में जल लेखा होता है जिससे यह बात प्रमाणित हो सके कि पूर्व में कितना जल था और वर्तमान में कितना जल जमा किया जा चुका है। इसमें सिंचाई के लिए दैनिक प्रयोग की भी कार्ययोजना है। वाटर बैंक के संचालक रामबाबू तिवारी कहते हैं कि बुंदेलखंड को पानीदार बनाने के लिए जल के संचयन और जल के महत्त्व व जल अपव्यय रोकने को वाटर बैंक की स्थापना की गई है। बुंदेलखंड की तालाबों की संस्कृति को पुनः बहाल करने के लिए यह बहुत उपयोगी साबित होगा।
अब तालाब अध्ययन केंद्र बनाने की तैयारी
रामबाबू बताते हैं कि वाटर बैंक की स्थापना के बाद अब उनका अगला लक्ष्य तालाब अध्ययन केंद्र बनाने का है। बताया कि आगामी 22 मार्च को तालाबों के अध्ययन के लिए तालाब अध्ययन केंद्र की भी शुरुआत की जाएगी। इस तालाब अध्ययन केंद्र में तालाबों के सामाजिक सांस्कृतिक धार्मिक आर्थिक व पर्यावरणीय अध्ययन किया जाएगा।

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