अभावों में पहले बढ़े, अब शिक्षा को हथियार बना गरीब बच्चों का भविष्य संवार रहे बांदा के इस गांव के युवा प्नधान
Special Story: बांदा के कैरी गांव के युवा रामशरन ने अभावों में पलकर शिक्षा को अपना हथियार बनाया। उन्होंने 2018 से गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देना ...और पढ़ें
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कैरी गांव में अध्ययन करते बच्चे। शिक्षक
बलराम सेंगर, बांदा। अभावों में पले बढ़े एक गांव के युवा ने शिक्षा को अपना हथियार बनाकर न सिर्फ सैकड़ों गरीब बच्चों का भविष्य संवारा, बल्कि गांव की तकदीर भी बदल दी। कभी सरकारी शिक्षक बनने का सपना देखने वाले रामशरन ने आठ वर्ष पहले गांव के एक साधारण से भवन में बच्चों को निश्शुल्क पढ़ाने की शुरुआत की थी। आज उसी समर्पण और सेवा भाव के चलते गांव वालों ने उन्हें अपना ग्राम प्रधान चुन लिया।
रामशरन प्रतिदिन दो से तीन घंटे गरीब और जरूरतमंद बच्चों को ट्यूशन देते हैं। आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई से दूर हो रहे नौनिहालों को उन्होंने शिक्षा से जोड़ा और उन्हें आगे बढ़ने की राह दिखाई। उनके मार्गदर्शन में पढ़े कई बच्चे आज आइआइटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में चयन पाकर गांव का नाम रोशन कर रहे हैं। ग्राम प्रधान चुने जाने के बाद जहां जिम्मेदारियां बढ़ गईं, वहीं रामशरन का शिक्षा के प्रति जुनून कम नहीं हुआ।
सरकारी शिक्षक बनने का था सपना
बबेरू तहसील के कैरी गांव के रामशरन बीएड व एमएससी करने के बाद सरकारी शिक्षक बनने के लिए इधर उधर भटके। नौकरी नहीं मिली तो गांव में गरीब बच्चों को घूमते देखकर उनके मन में बच्चों को काबिल बनाने का विचार आया। उन्होंने गांव के एक भवन में बच्चों को बैठाकर पढ़ाना शुरू किया। पहले करीब दो दर्जन बच्चों को निश्शुल्क शिक्षा देना शुरू किया। वर्ष 2018 में उनकी यह प्रेरणा गांव के शिवभवन व जानकी मौर्य को भी भा गई। इस पहल में दोनों युवाओं ने रामशरन का साथ देना शुरू कर दिया।
सहयोग की पाठशाला
सहयोग की पाठशाला को विकसित करने के लिए आपसी समिति बनाई। कक्षा तीन से आठ तक के बच्चों को पढ़ाना शुरू किया, जिसका लाभ गांव के करीब 190 बच्चों को मिलने लगा। उनकी टीम में शामिल नौकरी पेशा युवा आर्थिक रूप से सहयोग कर रहे हैं। जिससे गरीब बच्चों को कापी-किताबें व अन्य सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है। ग्रामीणों ने रामशरन के सेवा भाव को देख उन्हें वर्ष 2020 में ग्राम प्रधान पद का चुनाव लड़ने का सुझाव दिया। वह प्रधान पद का कार्यभार संभालने के बाद भी बच्चों के लिए दो से तीन घंटे का समय निकालते हैं।
मन में अचानक विचार आया और इस दिशा में सेवाभाव से जुट गए। आज 190 बच्चों को नियमित पढ़ाता हूं। मेरा उद्देश्य है कि बच्चे काबिल बनें और कहीं भी किसी भी क्षेत्र में कमजोर न रहें। प्रधान होने के बाद भी समय से नियमित बच्चों को पढ़ा रहा हूं।
-रामशरन, कैरी ग्राम प्रधान

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