संसद भवन आत्मदाह प्रकरण: साढ़े तीन साल से दो परिवारों में चल रही रंजिश, छात्र की दर्दनाक मौत से हड़कंप; PHOTOS
संसद भवन के सामने आत्मदाह की घटना ने देश को झकझोर कर रख दिया है। बागपत के छपरौली थाना क्षेत्र में साढ़े तीन साल से दो परिवारों के बीच चल रही रंजिश ने एक छात्र की जान ले ली। जितेंद्र नाम के छात्र ने पुलिस की कार्यशैली से परेशान होकर यह कदम उठाया। इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जागरण संवाददाता, बागपत। छपरौली थाने से करीब 200 मीटर की परिधि में होमगार्ड कविंद्र और एलएलबी के छात्र जितेंद्र के मकान हैं। साढ़े तीन साल में दोनों परिवार के बीच कई बार झगड़ा हुआ। तीन मुकदमे तो पुलिस ने दर्ज भी किए, लेकिन विवाद को खत्म करने का प्रयास नहीं किया। जितेंद्र के परिवार ने तो पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाया।
जितेंद्र के संसद भवन के सामने आत्मदाह के प्रयास करने की घटना से खलबली मच गई। इस घटना के बाद सवाल उठा रहा है कि आखिर पुलिस की चौपाल किस काम की है। घटना में पुलिस का खुफिया तंत्र भी फेल नजर आया।
बता दें कि एलएलबी के छात्र जितेंद्र की शुक्रवार सुबह मौत हो गई। शव पोस्टमार्टम के बाद दोपहर एक बजे घर पहुंचा। शव को देखते ही स्वजनों में कोहराम मच गया। पुलिस की मौजूदगी में शव को अंतिम संस्कार के लिए यमुना घाट ले जाया गया।
गांव में बॉडी पहुंचते ही हड़कंप मच गया। जागरण
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यह हुई कार्रवाई
मुकदमा- 1
एसएसबी के जवान विकेंद्र कुमार ने छपरौली थाने में एक जून 2021 को मुकदमा दर्ज कराते हुए बताया था कि वह 31 मई की सुबह सात बजे कस्बे की मार्केट से सामान खरीदकर घर लौट रहा था। आरोप है कि चौपाल के निकट जितेंद्र उर्फ भोला व शीलू ने अपने पिता महीपाल के साथ मिलकर तमंचे से फायरिंग की और चाकू व लाठी-डंडों से वार किया। वह पहली गोली लगने से बाल-बाल बचा तथा दूसरी गोली मिस हुई थी।
शोर शराबा होने पर रेशपाल व कविंद्र आए तो आरोपित जान से मारने की धमकी देकर भाग गए। यह घटना थाने से 50 मिनट दूर हुई थी। पुलिस ने विवेचना के आधार पर जानलेवा हमले की धारा का विलोप किया था। मारपीट, धमकी व अन्य धारा के मामले में सीआरपीसी की धारा 41ए के तहत आरोपितों को नोटिस जारी कर अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। पत्रावली अदालत में विचाराधीन है।
गमगीन माहौल में जितेंद्र के शव को अंत्येष्टि के लिए यमुना घाट पर ले जाया जा रहा है। जागरण
मुकदमा-2
होमगार्ड कविंद्र ने छपरौली थाने में 18 अप्रैल 2022 को मुकदमा दर्ज कराते हुए बताया था कि वह 17 अप्रैल की शाम 8.15 बजे थाने से चला था। उसके साथ भाई विकेंद्र भी था। आरोप है कि थाने से 100 मीटर दूर चौपाल के निकट पहुंचे तो भूरा पुत्र सहदेव, जितेंद्र उर्फ भोला व शीलू पुत्र महीपाल व दो अज्ञात व्यक्तियों ने गाली-गलौज कर लाठी-डंडों व धारदार हथियार (दांव) से हमला किया था। विकेंद्र के सिर में गंभीर चोट लगी थी।
थाना पुलिस न आती तो आरोपित जान से मार देते। वहीं, पुलिस ने मुकदमे में गैर इरादतन हत्या के प्रयास, गाली-गलौज, धमकी व अन्य धाराएं अंकित की थीं। नामजद आरोपितों ने 22 अप्रैल 2022 को अदालत में आत्मसमर्पण किया था। बाद में आरोपित जमानत पर जेल से रिहा हो गए थे। पुलिस ने आरोपितों के विरुद्ध अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। पत्रावली अदालत में विचाराधीन है।
गांव में तैनात पुलिस। जागरण
मुकदमा- 3
महीपाल ने छपरौली थाने में 14 मई 2024 को मुकदमा दर्ज कराया था कि वह 9 मई की रात साढ़े 12 बजे ग्राम तिलवाड़ा में स्थित भट्ठे पर ईंट पथाई करने के लिए साइकिल से जा रहा था। आरोप है कि किरठल रोड पर पहुंचने पर विकेंद्र उर्फ विक्की ने उसकी साइकिल में कार से टक्कर मारी। इससे वह जमीन पर गिरकर चोटिल हो गया। आरोपित ने गाली-गलौज व जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए जान से मारने की धमकी दी।
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पुलिस ने मुकदमे में गाली-गलौज, मारपीट, एससी-एसटी एक्ट की धारा अंकित की थी। बाद में सीआरपीसी की धारा 41ए के तहत आरोपित विकेंद्र को नोटिस जारी कर अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। पत्रावली अदालत में विचाराधीन है। वहीं, इस मामले में कविंद्र ने बताया कि अदालत से घर पर समन पहुंचा है। भाई विकेंद्र के अदालत में पेश होने की आगामी तिथि तीन जनवरी नियत है।
गांव में शव पहुंचने से पहले फोर्स को तैनात कर दिया गया था। जागरण
भूरा की हो चुकी है मृत्यु
एक मुकदमे के आरोपित भूरा की करीब दो माह पूर्व बीमारी के कारण मृत्यु हो चुकी है। वह जितेंद्र का पड़ोसी था।
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