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    आवारा कुत्तों का 'खूनी' आतंक: हर दिन 300 शिकार, फिर भी कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन!

    Updated: Sat, 03 Jan 2026 12:39 AM (IST)

    बदायूं में आवारा कुत्तों का आतंक जारी है, जिससे प्रतिदिन 300 से अधिक लोग एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाने अस्पताल पहुँच रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट और प्रमुख सचिव ...और पढ़ें

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    प्रतीकात्‍मक च‍ित्र

    जागरण संवाददाता, बदायूं। सड़क पर आवारा घूमने वाले कुत्तों को लेकर नगर पालिका परिषद प्रशासन पूरी तरह खामोश है जबकि प्रमुख सचिव ने सभी सरकारी विभागों को इस बात के निर्देश दिए थे कि किसी भी कार्यालय में आवारा कुत्ता न घुसने पाएं। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकारों को निर्देश दिए थे कि वह आवारा घूमने वाले कुत्तों को शेल्टर हाउस में व्यवस्था कराएं ताकि उनके द्वारा लोगों पर किए जाने वाले हमले से बचा जा सके।

    यह भी निर्देश थे कि सरकारी विभाग जहां पर बाउंड्री बाल नीची है। उसे ऊंचा कर लें। इन सब के बाद भी किसी भी विभाग ने कोई कार्रवाई शुरू नहीं की है। सड़कों पर घूमने वाले आवारा कुत्ते अक्सर लोगों पर हमला कर देते हैं। कुत्तों की काटने से लोगों की जान भी चली गई है। बड़ी संख्या में सरकारी अस्पतालों में लोग एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने को आते हैं ।

    आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी चिंता जताई थी और सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिए थे कि वह सड़कों पर आवारा घूमने वाले कुत्तों को शेल्टर हाउस में पहुंचने की व्यवस्था करें । सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार भी गंभीर हुईं और सरकार की ओर से प्रमुख सचिव ने सभी प्रशासनिक अधिकारियों को दफ्तरों में आवारा कुत्तों पर रोक लगाने के लिए निर्देश दिए।

    देखा भी जाता है कि तमाम सरकारी दफ्तर के कैंपस को आवारा कुत्तों ने अपना आशियाना बना रखा है। जहां हर समय वह मौजूद रहते हैं, उस वक्त सरकारी दफ्तर में अपने काम के लिए आने वाले व्यक्ति को सावधान रहना पड़ता है। प्रमुख सचिव ने नगर पालिका परिषद और नगर निगम को यह निर्देश दिए थे कि आवारा कुत्तों के घूमने पर रोक लगाने के लिए तत्काल कदम उठाएं।

    साथ ही सभी सरकारी विभागों को यह निर्देश दिए कि यदि किसी भी विभाग की बाउंड्री बाल नहीं बनी है या फिर नीची है तो उसे ऊंचा कराएं। जिले में कई स्थान ऐसे हैं, जहां पर बड़ी संख्या में आवारा कुत्ते हर समय सड़क पर विचरण करते हैं। प्रमुख सचिव और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी सरकारी विभागों ने इस दिशा में अभी कोई कदम नहीं उठाया है।

    आम लोगों का मानना है कि यदि सड़कों पर घूमने वाले कुत्तों के विचरण पर रोक लगाने के लिए कदम उठाया जाए तो निश्चित तौर पर लोगों को काफी राहत मिलेगी और आवारा कुत्तों के हमलों से भी बचा जा सकेगा

    कुछ जिलों में शिक्षक बना दिए नोडल प्रभारी

    आवारा कुत्तों पर निगरानी के लिए प्रदेश के कुछ जिलों में बेसिक शिक्षा अधिकारियों द्वारा शिक्षकों को नोडल अधिकारी बना दिया गया है और उन जिलों में नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि उनके क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति को काटता है तो वह संबंधित व्यक्ति के लिए एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाएं ताकि उसका जीवन बचाया जा सके। बदायूं जिले में अभी इस तरह की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।

    रोजाना वैक्सीन लगवाने पहुंचे तीन सौ मरीज

    जिला अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने वाले मरीजों की संख्या भी अच्छी खासी हो रही है। कम से कम रोजाना तीन सौ से ज्यादा मरीज अस्पताल में पहुंच रहे हैं। उनमें सबसे ज्यादा कुत्ता काटने वाले मरीज शामिल हैं। एक महीने में इनकी संख्या तीन हजार से लेकर चार हजार तक पहुंच रही है।

    इसी तरह जिले के स्वास्थ्य केंद्रों पर भी भीड़ लग रही है। प्रमुख सचिव का निर्देश है कि अस्पतालों में वक्सीन की कमी नहीं होनी चाहिए। प्रत्येक मरीज को वैक्सीन लगाई जाए। अगर वैक्सीन कम है तो उसका पहले से इंतजाम कराया जाएगा।


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