सिर्फ घर का काम नहीं, अब व्यापार संभाल रही हैं हसनपुर की महिलाएं; जानिए कैसे बदली इनकी तकदीर
हसनपुर में स्वयं सहायता समूहों से 10 हजार से अधिक महिलाएं रोजगार पाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। 835 समूहों के माध्यम से वे पशुपालन, मधुमक्खी पालन, नर्सरी ...और पढ़ें

हसनपुर के गांव बावनखेड़ी गांव में कान्हा जी नर्सरी पर काम करती स्वयं सहायता समूह की सदस्य। जागरण
संवाद सहयोगी, जागरण, हसनपुर। स्वयं सहायता समूह योजना के तहत 10 हजार से अधिक महिलाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। ये महिलाएं विभिन्न तरीकों से अपने व्यवसाय स्थापित कर अपने परिवार की आय में वृद्धि कर रही हैं, जिससे उनके जीवन में खुशहाली और आर्थिक स्थिति में मजबूती आ रही है। विकास खंड हसनपुर क्षेत्र में 835 स्वयं सहायता समूह गठित किए गए हैं।
इनमें प्रत्येक समूह में 10 से 13 महिलाएं सदस्य हैं। इन समूहों को सरकार द्वारा कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड (सीआइएफ) के तहत डेढ़ लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई है। इसके अतिरिक्त, बैंकों से छह लाख रुपये तक ऋण की सुविधा भी प्रदान की गई है। समूह से जुड़ी महिलाएं पशुपालन, डेयरी, मधुमक्खी पालन, मछली पालन, बकरी पालन और नर्सरी का कारोबार कर रही हैं।
कान्हा जी स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष रेनू चौहान ताहरपुर में बावनखेड़ी गांव के निकट नर्सरी का व्यवसाय चला रही हैं। वे नर्सरी में स्वयं काम करने के साथ-साथ अन्य सदस्यों को भी रोजगार प्रदान कर रही हैं। कई स्वयं सहायता समूह की महिलाएं मधुमक्खी पालन के माध्यम से आर्थिक रूप से उन्नति कर रही हैं।
बकरी पालन से भी समूह की महिलाओं को हर वर्ष अच्छी आमदनी हो रही है। ब्लॉक मिशन मैनेजर मोनू कुमार का कहना है कि विकास खंड हसनपुर में 835 स्वयं सहायता समूहों से 10 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। समूह की महिलाओं ने प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अपने-अपने व्यवसाय को सफलतापूर्वक स्थापित किया है।
पेठे की मिठाई तैयार कर तरक्की कर रहीं सोनम
स्वयं सहायता समूह से जुड़ कर अपने गांव ताहरपुर में पेठे की मिठाई की फैक्ट्री स्थापित कर अपने परिवार को प्रगति की राह पर ला रही हैं। वह अपने पति के साथ बेटे की मिठाई तैयार कर दुकानों पर सप्लाई करती हैं। स्वयं सहायता समूह के माध्यम से उन्हें घर बैठे अच्छा रोजगार मिल गया है।
घरेलू काम के साथ नर्सरी में पौध तैयार कर रहीं रेनू
कान्हा जी नर्सरी से गांव में नर्सरी का कार्य कर खुद को स्थापित किया है। अपने घरेलू कामकाज को पूरा करने के बाद नर्सरी में मेहनत करके अच्छे पेड़ पौधे तैयार कर रही हैं। जिससे उन्हें हर वर्ष अच्छी आमदनी हो रही है।
सास-बहू चला रहीं दूध संग्रह केंद्र
ग्राम ताहरपुर में स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपनी सास संतोष देवी को भी समूह से जोड़कर दूध संग्रह केंद्र स्थापित कर लिया है। दोनों सास बहू मिलकर गांव के पशुपालकों से दूध खरीद कर बाहर डेयरियों को भेजती हैं। जिससे परिवार के खर्चे में वह काफी हाथ बटा रही हैं।

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