अमरोहा में 'दूध का अकाल'? गायब हुए 1.80 लाख पशु, 21वीं पशुगणना की रिपोर्ट ने सबको चौंकाया!
अमरोहा में 21वीं पशुगणना के प्रारंभिक आंकड़े चिंताजनक हैं, जिसमें दुधारू पशुओं की संख्या में 10.74% की गिरावट दर्ज की गई है। 20वीं गणना की तुलना में ग ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक चित्र
जागरण संवाददाता, अमरोहा। जिले में 21वीं पशु गणना के प्रारंभिक आंकड़े चिंताजनक हैं। दुधारू पशुओं की संख्या में 10.74 प्रतिशत की कमी आई है। 20वीं गणना की तुलना में 86,757 गोवंशीय और 93,094 महिषवंशीय पशु कम हो गए हैं। पशु पालन विभाग ने मई 2025 में इस गणना का पूरा ब्योरा राज्य सरकार को भेज दिया है, जिसके बाद केंद्र सरकार द्वारा आंकड़े जारी किए जाएंगे।
वर्ष 2019 में हुई 20वीं पशु गणना के अनुसार, जनपद में कुल 8,24,546 पशु थे, जिनमें गोवंशीय की संख्या 2,44,056 और महिषवंशीय की 5,80,490 थी। इसके अलावा बकरियों की संख्या 73,993, सूकर की 1,055 और घोड़ों की संख्या 457 थी। नई गणना में दुधारू पशुओं की संख्या में 10.74 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
इससे 21वीं गणना के तहत पशुओं की कुल संख्या घटकर 6,44,895 रह गई है। इसमें गोवंश की संख्या 1,57,499 और महिषवंशीय की 4,87,396 है। सूकर की संख्या 1914, बकरियों की 69,295 और घोड़ों की 691 है। उल्लेखनीय है कि 21वीं पशु गणना का कार्य 25 अक्टूबर 2024 से प्रारंभ होकर अप्रैल 2025 तक चला था। मई में इसका पूरा आंकड़ा सरकार को भेजा गया था, लेकिन अभी तक इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है।
दूध के उत्पादन और आपूर्ति पर पड़ेगा असर
जिले में दूध की मांग तेजी से बढ़ रही है, जहां रोजाना लगभग तीन लाख लीटर दूध की बिक्री हो रही है। दुधारू पशुओं की घटती संख्या के कारण दूध की उपलब्धता और कीमतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। खपत के अनुसार दूध का उत्पादन करना कठिन होगा। यह चिंताजनक है कि सरकार दूध के कारोबार को बढ़ाने के लिए योजनाएं चला रही है, फिर भी लोगों का पशुपालन की ओर रुझान कम होता जा रहा है।
सरकार की योजनाएं
सरकार की ओर से नंदनी गो-पालन योजना, मिनी नंदनी गोपालन योजना, नंद बाबा दुग्ध मिशन, मुख्यमंत्री गोसंवर्धन योजना और सहभागिता योजना जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं के तहत पशुओं की खरीद में सब्सिडी उपलब्ध कराई जाती है, फिर भी लोगों का पशुपालन से मोहभंग हो रहा है।
गोशालाओं की स्थिति
जिले में 25 गोशालाएं हैं, जिनमें संरक्षित गोवंश की संख्या 5106 है, जबकि 2891 पशु सहभागिता योजना के तहत लोगों को पालन के लिए दिए गए हैं।
दुधारू पशुओं की कमी का मुख्य कारण
- दुधारू पशुओं की कमी का प्रमुख कारण चारे व भूसे पर महंगाई है। पशु पालन में होने वाला खर्च ज्यादा है और उससे होने वाली आय स्थिर है।
- हर घर में लोग कम होते जा रहे हैं। पशु पालने के लिए घर के लोगों को काम करना होता है लेकिन, आजकल के बच्चे पशु पालना नहीं चाहते हैं। उनको परेशानी मानते हैं। पशुओं को पालने की बजाय युवा नौकरी करना पसंद कर रहे हैं।
- महिलाएं भी पशु पालन से कतराने लगी हैं। आजकल के पढ़े-लिखे बच्चे गोबर उठाने की बात तो दूर उसको छूना तक नहीं जानते हैं। महिलाएं पशुओं का दूध निकालना नहीं जानती है।
21वीं पशुगणना पूरी हो चुकी है। रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। दुधारू पशुओं की कमी का मुख्य कारण किसानों का पशुपालन से दूरी बनाना है।
- डा. आभा दत्त, सीवीओ
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