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    कांग्रेस में 'गृहयुद्ध': एक मंच पर साथ बैठना तो दूर, एक-दूसरे का चेहरा तक नहीं देखना चाहते दिग्गज!

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 06:30 AM (IST)

    अमरोहा में कांग्रेस का आंतरिक संकट गहरा गया है। 2024 लोकसभा चुनाव के बाद भितरघात और आपसी गुटबाजी के कारण जिला इकाई तीन धड़ों में बंट गई है। 1984 के बा ...और पढ़ें

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    कांग्रेस लोगो

    जागरण संवाददाता, अमरोहा। जिले में 90 के दशक तक कांग्रेस मजबूत स्थिति में थी। न सिर्फ यहां से सांसद चुने गए बल्कि विधायक भी कांग्रेसी थे। अंतिम विधायक खुर्शीद अंसारी कांग्रेस के टिकट पर 1980 में अमरोहा विस क्षेत्र से चुनाव जीते थे। हालांकि उस समय अमरोहा मुरादाबाद जिले का हिस्सा था तथा धामपुर, स्योहारा, अमरोहा, कांठ व हसनपुर विस क्षेत्र को मिला कर लोकसभा सीट थी। जिस पर ठाकुरद्वारा निवासी रामपाल सिंह 1984 अंतिम कांग्रेसी सांसद चुने गए थे।

    90 के दशक के बाद जिले में कांग्रेस की उलटी गिनती शुरू हुई जो आज तक संगठन को निरंतर कमजोर कर रही है। आलम यह है कि कांग्रेस जिला इकाई भितरघात का इतना शिकार हो चुकी है कि कांग्रेसी एक दूसरे को एक आंख नहीं सुहाते। कांग्रेसियों की आपसी खुन्नस सतह पर भी आ चुकी है। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद हालात ज्यादा बिगड़ गए हैं। कांग्रेस जिला इकाई तीन धड़ों में बंटी हुई है।

    दरअसल जिले में कांग्रेस की स्थिति काफी कमजोर रही है। संगठन से लोगों का जुड़ाव केवल कागजी रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद संगठन में फूट पड़ गई थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में सचिन चौधरी कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े थे। इसी चुनाव में बसपा के टिकट पर सपा गठबंधन के साथ कुंवर दानिश अली चुनाव जीत कर सांसद बने थे।

    2024 के चुनाव से ऐन पहले दानिश अली बसपा छोड़ कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे तथा पार्टी ने उन्हें प्रत्याशी घोषित किया था। जबकि सचिन चौधरी भी टिकट के दावेदारों में शामिल थे। पार्टी ने उन्हें दरकिनार कर दानिश अली पर भरोसा जताया था। इसी चुनाव से जिला इकाई में फूट पड़ना शुरू हो गई थी।

    अंदरूनी रूप से कुछ कांग्रेसियों ने दानिश अली का विरोध किया था। हालांकि दानिश अली यह चुनाव नहीं जीत सके थे तथा भाजपा के कंवर सिंह तंवर से हार गए थे। उसके बाद से कांग्रेस की फूट बाहर निकल आई थी। लिहाजा इन दिनों जिले में कांग्रेस हाशिए पर है। संगठन में भितरघात चरम पर है। यहां कांग्रेस दो नहीं बल्कि तीन धड़ों में बंटी हुई है।

    पूर्व सांसद बनाम पूर्व प्रदेश सचिव सचिन चौधरी, जिलाध्यक्ष ओमकार कटारिया बनाम नगराध्यक्ष इंद्रेश शर्मा के साथ ही तीसरा धड़ा यूथ कांग्रेस का है। इसकी बागनी पिछले दिनों पूर्व सांसद व पूर्व प्रदेश सचिव द्वारा एक दूसरे पर इंटरनेट मीडिया पर लगाए गए आरोप हैं। पार्टी का कोई भी आयोजन होता है तो तीनों धड़े अलग आयोजन करते हैं।

    पिछले दिनों एसआइआर को लेकर बनाए गए कोआर्डिनेटर में भी अपनी पसंद के नेताओं का चयन कराने के लिए खूब जोरआजमाइश हुई थी। पार्टी से जुड़े सूत्र बताते हैं कि अक्तूबर 2025 में तेजी के साथ सतह पर आए कांग्रेसियों के मनमुटाव को शांत करने के लिए प्रदेश हाईकमान को हस्तक्षेप करना पड़ा था। जिसके बाद मामला शांत हो गया था। अब संगठन को धार देना तो दूर जिले के कांग्रेसी एक दूसरे से हाथ मिलाने से भी परहेज करते हैं।

     

    संगठन में पदाधिकारियों-कार्यकर्ताओं में मनमुटाव जैसी कोई बात नहीं है। यह बात अलग है कि प्रत्येक व्यक्ति की सोच अलग हो सकती है। पिछले दिनों जो भी विवाद सामने आया था वह संगठन की नीति के मुताबिक आपसी तालमेल से दूर कर दिया गया है। सभी पदाधिकारी संगठन को मजबूत बनाने के लिए काम कर रहे हैं।

    - ओमकार कटारिया, जिलाध्यक्ष कांग्रेस


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