Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    Raksha Bandhan: तारीखाें को लेकर भ्रम खत्म, अलीगढ़ में कब मनेंगे रक्षाबंधन, ज्योतिषाचार्य ने बताया शुभ मुहूर्त

    By Jagran NewsEdited By: Abhishek Saxena
    Updated: Sat, 26 Aug 2023 03:12 PM (IST)

    रक्षाबंधन को लेकर लोगों में तारीखाें को लेकर काफी भ्रम है। 30 अगस्त को राखी बांधने का मुहूर्त बताया जा रहा है। वहीं अलीगढ़ के ज्योतिषाचार्य का कहना है कि 31 अगस्त को राखी पूरे दिन बांधी जा सकती है। वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में 31 अगस्त को ही रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा और आराध्य को राखी अर्पित की जाएगी।

    Hero Image
    Raksha Badhan: असमंजस में न रहें, 31 अगस्त को मनाएं रक्षाबंधन : पूर्णानंदपुरी

    अलीगढ़, जागरण संवाददाता। पिछले दो वर्षों से त्योहारों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। रक्षाबंधन त्योहार के साथ भी ऐसा हो रहा है। रक्षाबंधन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस बार पूर्णिमा तिथि लगने के साथ ही भद्रा लग रहा है। इसकी वजह से रक्षाबंधन मनाने की तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति है।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    उदया तिथि के कारण पूरे दिन बंधेंगी राखी

    ज्योतिषियों के मुताबिक 30 अगस्त को रात में भद्रा समाप्त होने के बाद राखी बांधी जा सकती है। साथ ही 31 अगस्त को उदया तिथि के कारण पूरे दिन राखी बांधी जा सकेंगी। वैदिक ज्योतिष संस्थान के प्रमुख स्वामी पूर्णानंदपुरी के अनुसार श्रावण पूर्णिमा 30 अगस्त 10:58 बजे से प्रारंभ होगी। उससे पूर्व चतुर्दशी तिथि रहने के कारण रक्षाबंधन को चतुर्दशी तिथि में नहीं मनाया जाता। इसलिए सुबह 10:58 से पूर्व तो रक्षाबंधन मनाया ही नहीं जा सकता। पूर्णिमा तिथि प्रारंभ होने के साथ ही भद्रा तिथि प्रारंभ हो जाएगी, जिसका वास पृथ्वी लोक पर रहेगा, जिसकी समाप्ति रात 09:01 बजे होगी।

    ज्योतिषाचार्य ने बताए ये शुभ मुहूर्त

    • इस वर्ष रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त 30 अगस्त रात 09:01 बजे के बाद रहेगा।
    • 31 अगस्त सुबह 07:05 बजे तक पूर्णिमा तिथि के रहने के कारण तीन मुहूर्त नहीं कही जाएगी।
    • बहनें इस समय रक्षासूत्र बांंध सकती हैं।

    स्वामी ने बताया कि राखी का यह पर्व भद्रा रहित और तीन मुहूर्त से अधिक उदयकाल व्यापिनी पूर्णिमा के अपराह्न प्रदोष काल में करना चाहिए। उदयकाल में यदि तीन मुहूर्त से कम हो तब पहले दिन भद्रा रहित प्रदोष काल में करना चाहिए। ग्रहण, संक्रांति आदि के दिन भी इस पर्व को किया जा सकता है।