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शादी-विवाह या गृह प्रवेश करना चाहते हैं तो ये तिथि है बेहद खास, 10 मई का ये है शुभ मुहूर्त, विशेष महत्व के पीछे की कहानी

अक्षय तृतीया पर मांगलिक कार्यों से मिलता है अक्षय पुण्य। 10 मई को अक्षय तृतीया और भगवान परशुराम जन्मोत्सव मनाया जाएगा। अक्षय तृतीय पर अबूझ मुहूर्त की तिथि है। इस दिन बिना मुहूर्त के मांगलिक कार्य और अन्य शुभ कार्य किए जा सकते हैं। मंदिरों में भी खास व्यवस्थाएं की हैं। मंदिरों की सजावट के साथ इस दिन शरबत का वितरण किया जाएगा।

By krishna chand Edited By: Abhishek Saxena Published: Sun, 05 May 2024 09:37 AM (IST)Updated: Sun, 05 May 2024 09:37 AM (IST)
अक्षय तृतीया पर मांगलिक कार्यों से मिलता है अक्षय पुण्य

जागरण संवाददाता, अलीगढ़। वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 10 मई को अक्षय तृतीया और भगवान परशुराम जन्मोत्सव मनाया जाएगा। ज्योतिष शास्त्र में भी इस तिथि का विशेष महत्व है।

मान्यता है कि इस अबूझ मुहूर्त की तिथि पर बिना मुहूर्त का विचार किए सभी प्रकार के शुभ कार्य संपन्न किये जा सकते हैं। साथ ही इस दिन कोई भी शुभ मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, सोने-चांदी के आभूषण, घर, भूखंड या वाहन आदि की खरीदारी से सम्बंधित कार्य किए जा सकते हैं और वह कभी नष्ट नहीं होता। इस अवसर पर मंदिरों को सजाया जाएगा। विग्रहों का श्रृंगार, पूजा और शरबत का वितरण किया जाएगा।

सुबह से शुरू होगा मुहूर्त

वैदिक ज्योतिष संस्थान के प्रमुख स्वामी पूर्णानंदपुरी ने बताया कि इस बार वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 10 मई प्रातः 4:17 बजे प्रारंभ होगी। 11 मई को सुबह 02: 50 बजे तक रहेगी। ऐसे में 10 मई को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में रहते हैं, साथ ही इस तिथि पर चंद्रमा वृषभ राशि में मौजूद होते हैं।

माना जाता है इस दौरान सूर्य और चंद्रमा दोनों ही सबसे ज्यादा चमकीले यानी सबसे ज्यादा प्रकाश उत्सर्जित करते हैं। इस कारण ज्यादा से ज्यादा प्रकाश पृथ्वी की सतह पर रहता है इसलिए इस अवधि को सबसे शुभ समय माना जाता है।

ये है विशेष महत्व

इस तिथि पर पर मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है। अक्षय तृतीया तिथि पर भगवान विष्णु के छठे अवतार चिरंजीवी भगवान परशुराम का जन्मोत्सव भी मनाते हैं। इसलिए इसे चिरंजीवी तिथि भी कहा जाता है। इस तिथि को कई कारणों से विशेष माना जाता है। अक्षय तृतीया पर ही सतयुग और त्रेतायुग का प्रारंभ हुआ था।

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इस तिथि पर ही ब्रह्माजी के पुत्र अक्षय कुमार का आविर्भाव हुआ था। अक्षय तृतीया के दिन ही वेद व्यास और श्रीगणेश द्वारा महाभारत ग्रंथ के लेखन का प्रारंभ किया गया था। तथा इस दिन ही महाभारत के युद्ध का समापन हुआ था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया की तिथि पर ही मां गंगा का पृथ्वी में आगमन हुआ था।

विग्रहों का होगा श्रृंगार, बंटेगा शरबत

टीकाराम मंदिर के महंत राजू पंडित ने बताया कि अयोध्या के कनक भवन की तर्ज पर सीताराम जी का अभिषेक होगा। इसके बाद प्रसाद का वितरण किया जाएगा। अचल ताल स्थित प्राचीन गणेश मंदिर के महंत विनय नाथ ने बताया कि विग्रह का चंदन से श्रृंगार किया जाएगा। चरण दर्शन होंगे। बंशी के साथ हाथ में चंदन का लड्डू भी रखा जाएगा। शरबत के अलावा सत्तू और गुड़ बांटा जाएगा।

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गिलहराज हनुमान जी मंदिर के महंत कौशल नाथ ने बताया कि बाबा का लाल और पीले चंदन से श्रृंगार किया जाएगा। इसके बाद आरती और शरबत का वितरण होगा। जयगंज स्थित बद्रीनाथ मंदिर में भगवान विष्णु की पूजा के साथ भजन कीर्तन होंगे। सत्तू व शरबत का वितरण होगा।

मथुरा रोड स्थित आसना में भगवान परशुराम मंदिर के संस्थापक पीसी शर्मा ने बताया कि मंदिर में सुबह हवन होगा। इसके बाद भजन संध्या और आरती होगी। मंदिर को सजाया जाएगा और दीपमालिका भी होगी।


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