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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 29, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

ब्रिटिशकाल क्वीन एम्प्रेस मैरी लाइब्रेरी: 7 हजार किताबें, 19 कंप्यूटर... राज्यपाल आनंदीबेन पटेल करेंगी उद्घाटन

Published: Tue, 29 Jul 2025 02:49 PM (IST)

आगरा की क्वीन एम्प्रेस मैरी लाइब्रेरी का 3.30 करोड़ रुपये की लागत से जीर्णोद्धार किया गया है। अब इसमें डिजिटल ...और पढ़ें

Agra News: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की फाइल फोटो।
Agra News: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की फाइल फोटो।

HighLights

  1. 3.30 करोड़ से हुआ लाइब्रेरी का जीर्णोद्धार
  2. डिजिटल लाइब्रेरी में 19 कंप्यूटर स्थापित
  3. फरवरी से फिर शुरू हुई क्वीन एम्प्रेस लाइब्रेरी

जागरण संवाददाता, आगरा। देश के आजादी से पहले स्थापित क्वीन एंप्रेस मैरी लाइब्रेरी का जीर्णोद्धार हो गया है। वर्ष 1911 में दिल्ली दरबार के आयोजन के वक्त इसका निर्माण एक व्यापारी द्वारा हुआ था। सात हजार 800 पुस्तकों के साथ भव्य रूप में लाइब्रेरी फरवरी से एक बार पुन: शुरू हो गई है। 100 से अधिक इसके सदस्य भी बन चुके हैं।

बुधवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल इसका औपचारिक उद्घाटन करेंगी। इसी परिसर में पब्लिक प्राइवेट पार्टनर्शिप मॉडल पर बने कैफे की शुरुआत भी होगी। लाइब्रेरी में पहले इतिहास, बायोग्रॉफी, डिक्शनरी सहित दूसरी पुस्तकें थी। अब 16 लाख रुपये से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा सिविल, मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी भी अभ्यर्थी कर सकेंगे। वहीं लाइब्रेरी को डिजिटल भी बनाया गया है, जिसमें 19 कंप्यूटर, इंटरनेट सेवा की सुविधा के साथ लगाए गए हैं।

3.30 करोड़ की लागत से हुआ है कार्य, डिजिटल बनाने के लिए लगाए 19 कंप्यूटर

सदर बाजार स्थित क्वीन एंप्रेस मैरी लाइब्रेरी रखरखाब के अभाव में जर्जर हो रही थी। इसके परिसर में घास जम गई थी, तो दीवारें भी जर्जर हो गई थी। स्मार्ट सिटी लिमिटेड के कार्यो के तहत 3.30 करोड़ रुपये की लागत से इस एतिहासिक विरासत को संजोने और फिर से उपयोगी बनाने के लिए तैयार किया गया। 5812 स्क्वायर मीटर एरिया में पार्क, पार्किंग और कैफेटेरिया का विकसित किया गया है।

सात हजार 800 पुस्तकों का है भंडार, सुबह आठ से रात 10 बजे तक संचालन

लाइब्रेरी में एक समय में 60 व्यक्तियों के बैठने की व्यवस्था है। 100 सदस्य वर्तमान में इसका लाभ ले भी रहे हैं। लाइब्रेरी में पहले से साढ़े तीन हजार पुस्तकें थी, जिसमें कई प्राचीनतम इतिहास को संजोय हुए हैं। कई प्रसिद्ध लोगों की बायोग्रॉफी भी मौजूद है। वहीं साहित्य से जुड़े और कुछ अन्य तरह की एक हजार पुस्तकों को दान में प्राप्त हुई है। वहीं 16 लाख रुपये से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए पुस्तकों को संकलन किया गया है।

मॉनिटरिंग के लिए लगाया गया सीसीटीवी

इसके अतिरिक्त भी अगर सदस्यों को कुछ चाहिए तो डिजिटल लाइब्रेरी इंटरनेट सुविधा के साथ उपलब्ध है। मानीटिरिंग के लिए सीसीटीवी कैमरा लगाया गया है। वहीं पार्क में बच्चों के लिए झेलू भी लगाए गए हैं। लाइब्रेरी का संचालन सुबह आठ बजे से रात 10 बजे तक होता है। कोई भी व्यक्ति एक हजार रुपये सिक्यरोटी मनी और एक हजार रुपये वार्षिक शुल्क से इसकी सदस्यता ले सकता है। वहीं डिजिटल लाइब्रेरी के लिए दो हजार रुपये प्रति माह, दो घंटे की सुविधा मिल सकेगी।

ये है इतिहास

क्वीन एंप्रेस मैरी लाइब्रेरी सार्वजनिक पुस्तकालय है। ब्रिटिश काल में बनी लाइब्रेरी उत्तर भारत की प्राचीनतम में से एक है। बताया जाता है कि क्वीन मैरी एलीजावैथ जब पहली बार आगरा आई थी, तभी मैसर्स ए. जान एंड कंपनी द्वारा उनकी पहली यात्रा को यादगार बनाने के लिए वर्ष 1961 में उक्त लाइब्रेरी का नाम क्वीन एम्प्रैस मैरी लाइब्रेरी रखा गया।

लाइब्रेरी का भवन ब्रिटिश औपनिवेशिक शैली में बना है। यह एक विरासत भवन के रूप में पहचान रखता है। प्रारंभ में इसका संचालन ब्रिटिश प्रशासन द्वारा किया जाता था। स्वतंत्रता के बाद संचालन के लिए कमेटी का गठन किया गया। इसमें मंडलायुक्त अध्यक्ष होते हैं। वहीं जिलाधिकारी, अपर जिला जल सदस्य और अपर जिला मजिस्ट्रेट सचिव होते हैं।

ये सुविधा की गई हैं विकसित

  • 40 कार की पार्किंग
  • 1287 स्क्वायर मीटर का ईवेंट पार्क
  • 19 कंप्यूटर की डिजीटल लाइब्रेरी
  • 600 स्क्वायर मीटर का कैफेटेरिया
  • 750 स्क्वायर मीटर का बुक स्टोर
  • 4 लाकर सामान सुरक्षित के लिए

कार्यक्रम के आमंत्रण पत्र का हुआ विमोचन

सदर बाजार स्थित क्वीन एंप्रेस मैरी लाइब्रेरी का लोकार्पण बुधवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल करेंगी। आगरा स्मार्ट सिटी लिमिटेड के तहत इस लाइब्रेरी का जीर्णोद्धार 3.30 करोड़ रुपये से हुआ है। कार्यक्रम के आमंत्रण पत्र का विमाेचन सोमवार को परिसर में किया गया।

स्मार्ट सिटी लिमिटेड के जीएम अरुण कुमार ने बताया कि क्वीन एंप्रेस मैरी लाइब्रेरी का पुनर्विकास स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत एक ऐतिहासिक जिम्मेदारी थी जिसे गर्व के साथ पूर्ण किया गया है। यह भवन अब आधुनिक सुविधाओं से युक्त होकर नई पीढ़ी के लिए एक प्रेरणास्थली बनेगा।

पंकज स्कैनिंग एंड पैथोलाजी रिसर्च सेंटर के निदेशक डा. पंकज महेन्द्रू ने बताया कि यह केवल एक इमारत नहीं, बल्कि हमारी पीढ़ियों को जोड़ने वाली एक बौद्धिक और ऐतिहासिक कड़ी है। यह पुस्तकालय आगरा की गौरवशाली विरासत का प्रतीक है।

डॉ. रेनू महेंद्रू ने कहा कि एक पुस्तकालय किसी भी समाज की आत्मा होता है। इस ऐतिहासिक धरोहर के पुनर्निर्माण से शहर की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊर्जा मिली है। 

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