पुलिस की हुई किरकिरी तो कमिश्नर ने हाईकोर्ट में मांगी माफी...फौरन उठाया सख्त कदम, इंस्पेक्टर समेत चार निलंबित
Agra News Update चेक बाउंस के मामले में समन और वारंट तामील करने को लेकर हाईकोर्ट में झूठा शपथ पत्र देने पर कमिश्नरेट पुलिस की जमकर किरकिरी हुई। मामले में हाईकोर्ट ने पुलिस आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया। इसके बाद यहां खलबली मच गई। हाईकोर्ट की सख्ती देखकर पुलिस आयुक्त जे रविंद्र गौड दौड़े-दौड़े पहुंचे।

जागरण संवाददाता, आगरा। Agra News: पुलिस कमिश्नर आगरा जे रविंदर गौड ने अपनी गलती के लिए शुक्रवार को बिना शर्त माफी मांगी। इसके बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति एके सिंह देशवाल ने चेतावनी देते हुए प्रकरण समाप्त करते हुए याचिका गुण-दोष पर निस्तारित कर दी। हाई कोर्ट में पेश होने से पहले ही पुलिस आयुक्त ने इस मामले में लापरवाही बरतने में इंस्पेक्टर सदर और तत्कालीन चौकी प्रभारी सीओडी समेत चार को निलंबित कर दिया।
पुलिस आयुक्त ने पूर्व में कोर्ट में दिए गए हलफनामे में कहा था कि स्थानीय अदालत से जारी कोई भी समन, जमानती या गैर जमानती वारंट सदर बाजार थाने को नहीं मिला। इस कारण आदेश का अनुपालन करते हुए अभियुक्त को कोर्ट में पेशी की कार्रवाई नहीं की गई। इस पर कोर्ट ने जिला जज आगरा से रिपोर्ट मांगी।
जिला जज ने पुलिस आयुक्त के हलफनामे को गलत करार देते हुए कहा कि समन सदर बाजार थाने के एसएचओ को सर्व हुआ है। वारंट पुलिस पैरोकार को हाथों-हाथ दिया गया। इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि पुलिस आयुक्त का हलफनामा गलत है। हाई कोर्ट ने कारण बताओ नोटिस जारी कर पुलिस आयुक्त को हाजिर होने का निर्देश दिया। साथ ही इस बात के लिए सफाई मांगी थी कि क्यों न उनके खिलाफ कोर्ट कार्यवाही के दौरान गलत हलफनामा दाखिल करने के लिए आपराधिक अवमानना कार्यवाही की जाए।
ये पुलिसकर्मी किए गए निलंबित
इंस्पेक्टर सदर और तत्कालीन चौकी प्रभारी व दो सिपाहियों को निलंबित करने के बाद अपर पुलिस आयुक्त संजीव त्यागी शुक्रवार को हाईकोर्ट में पेश हुए। मगर, हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति अरुण सिंह देशवाल के सख्त रुख को देखकर पुलिस आयुक्त जे रविन्दर गौड सफारी गाड़ी से दौड़े-दौड़े दोपहर बाद तक हाई कोर्ट पहुंच गए। उनके मांफी मागने के बाद ही याचिका निस्तारित हो सकी।
तीन लाख रुपये दिए थे उधार
सदर में मधु नगर के रहने वाले डांस अकादमी संचालक अंकित शर्मा ने वर्ष 2018 में देवरी रोड के रहने वाले मनोज कुमार को तीन लाख रुपये उधार दिए थे। मनोज फूल विक्रेता हैं। उसने रकम वापस लौटाने के लिए उन्हें चेक दिए थे। जो दो बार बाउंस हो गए। अंकित शर्मा ने बताया कि मनोज कुमार के विरुद्ध वर्ष 2019 में न्यायालय में एनआइ एक्ट का वाद दायर किया था। चेक बाउंस के मामले में न्यायालय द्वारा जारी समन व गैर जमानती वारंट सदर पुलिस ने प्रतिवादी को तामील नहीं किए। जिसे लेकर उन्होंने पांच महीने पहले अपने अधिवक्ता रघुवीर के माध्यम से इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
सदर थाने की ओर से भेजी गई थी हाईकोर्ट में आख्या
हाई कोर्ट ने पुलिस आयुक्त से अब तक की गई कार्रवाई के बारे में आख्या मांगी थी। सदर थाने की ओर से हाई कोर्ट को भेजी गई आख्या में कहा गया कि उसे समन एवं वारंट प्राप्त नहीं हुए हैं।यही आख्या पुलिस आयुक्त की ओर से हाईकोर्ट में भेज दी गई। इस पर हाई कोर्ट ने स्थानीय न्यायालय से आख्या मांगी। स्थानीय न्यायालय ने समन एवं वारंट की सदर थाने के पैरोकार को रिसीव कराई गई प्रति हाई कोर्ट को भेजी गई।
पुलिस गलत आख्या भेजने पर हाई कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए पुलिस आयुक्त को शुक्रवार व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के आदेश दिए थे। मामले में सदर थाने की लापरवाही को देखते हुए इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार, तत्कालीन चौकी प्रभारी सीओडी प्रभारी सोनू कुमार, डाक मुंशी सौरभ कुमार और पैरोकार नीटू सिंह को निलंबित कर दिया।
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संजीव त्यागी को भेजा था प्रतिनिधि के रूप में हाईकोर्ट
पुलिस आयुक्त ने प्रतिनिधि के रूप में हाई कोर्ट में अपर पुलिस आयुक्त संजीव त्यागी को भेजा। कोर्ट ने उनकी पेशी न मानते हुए शुक्रवार काे ही पुलिस आयुक्त को पेश होने के निर्देश दिए। न्यायमूर्ति का रुख देखकर पुलिस आयुक्त जे रविन्दर गौड सफारी गाड़ी से सुबह 11 बजे से पहले ही यहां से निकल गए।
हाई कोर्ट में अंकित शर्मा की ओर से याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता रघुवीर ने बताया कि शुक्रवार शाम पांच बजे पुलिस आयुक्त जे. रविन्दर गौड पेेश हुए। मामले में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जानकारी दी।उनके मांफी मांगने के बाद हाई कोर्ट ने भविष्य में इस तरह की लापरवाही न होने की चेतावनी दी।
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