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    भारतीय Android यूजर्स को निशाना बना रहे हैं पाकिस्तानी हैकर्स, इन 3 ऐप्स का हो रहा इस्तेमाल

    By Ankita PandeyEdited By: Ankita Pandey
    Updated: Wed, 20 Sep 2023 09:59 AM (IST)

    साइबर सिक्योरिटी आज के समय में एक बहुत बड़ी समस्या है जिसके चलते आए दिन हमें कोई ना कोई साइबर अटैक की घटनाएं सुनाई देती है। हाल ही में एक समस्या सामने आई है जिसके चलते भारतीय एंड्रॉइड यूजर्स को साइबर हमलों का शिकार होना पड़ा। बता दें कि यह एक ट्रोजन अटैक है जिसे पाकिस्तान से लिंक किया जा रहा है।

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    भारतीय Android यूजर्स को निशाना बना रहे हैं पाकिस्तानी हैकर्स, इन 3 ऐप्स का हो रहा इस्तेमाल

    नई दिल्ली, टेक डेस्क। टेक्नोलॉजी के बढ़ने के साथ-साथ ही इससे जुड़ी समस्याएं भी बढ़ती ही जा रही है। इसमें सबसे बड़ी समस्या साइबर क्राइम है, जो भारत के साथ-साथ दुनिया भर के लोगों, यहां तक की सरकारों को भी प्रभावित कर रहा है।

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    हाल ही में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसमें पाकिस्तान से जुड़ा एक संदिग्ध हैकर 'ट्रांसपेरेंट ट्राइब' पर CapraRAT मोबाइल रिमोट एक्सेस ट्रोजन (RAT) फैला रहा है। इसके लिए वह YouTube की नकल करने वाले एंड्रॉइड ऐप का उपयोग कर रहा है।

    रिपोर्ट में मिली जानकारी

    • साइबर सुरक्षा कंपनी सेंटिनलवन ने बताया कि CapraRAT टूलसेट का उपयोग कश्मीर से जुड़े मामलों की जानकारी रखने वाले स्पीयर-फिशिंग लक्ष्यों को पूरा करने के लिए किया जाता है।
    • इसके साथ इसको पाकिस्तान से संबंधित मामलों पर काम करने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की निगरानी के लिए भी उपयोग किया गया है। रिसर्च से पता चला है कि यह एंड्रॉइड डिवाइस को प्रभावित कर रहा है।

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    कौन हैं ये हैकर्स

    • जानकारी के लिए बता दे कि ये हैकर ग्रुप भारत और पाकिस्तान दोनों में सैन्य और राजनयिक जानकारी को निशाना बनाने के लिए जाना जाता है।
    • इतना ही नहीं शोधकर्ता एलेक्स डेलामोटे का मानना है कि CapraRAT एक खतरनाक टूल है, जो हैकर्स को एंड्रॉइड डिवाइसों के ज्यादा डेटा को उनके कंट्रोल में रखने देगा।

    क्या है CapraRAT

    • बता दें कि CapraRAT एक एंड्रॉइड फ्रेमवर्क है, जो किसी भी दूसरे ऐप के अंदर RAT फीचर्स को छुपाता है। सबसे बड़ी बात है कि इन ऐप्स को आप गूगल प्ले स्टोर पर नहीं पा सकेंगे।
    • ट्रांसपेरेंट ट्राइब हैकर्स इन एंड्रॉइड ऐप्स को Google Play Store के बाहर रखता हैं, ताकि यूजर्स को इन्हें इंस्टॉल करने के लिएऑटोमेटिक वेबसाइटों और सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों पर भरोसा करते हैं।
    • सीधाी भाषा में कहें तो ये लोकप्रिय एंड्रॉइड ऐप्स के फेक वर्जन की एपीके फाइलें बना लेते हैं। यहां हम आपको उन ऐप्स की लिस्ट में com.Base.media.service, com.moves.media.tubes, com.videos.watches.share शामिल है। 

    एंड्रॉइड यूजर्स की एक्टिविटी को ट्रैक करते हैं ऐप्स

    • इसके लिए ये हैकर्स कुछ तरकीब आजमाते हैं, जिसमे माइक्रोफोन, फ्रंट और रियर कैमरे से रिकॉर्ड करना।
    • SMS और मल्टीमीडिया मैसेज कंटेंट, कॉल लॉग इक्टठा करते हैं।
    • मैसेज भैजते है और उन्य मैसेज को ब्लॉक करते हैं।
    • फ़ोन पर कॉल करना।
    • स्क्रीन कैप्चर करना या जीपीएस और नेटवर्क जैसी सिस्टम सेटिंग्स को ओवरराइड करना शामिल है। 

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