Diwali 2026: घर में सुख-समृद्धि चाहते हैं तो दीवाली पर जरूर अपनाएं ये वास्तु टिप्स, दूर होगी नेगेटिव एनर्जी
दीवाली पर सुख-समृद्धि और महालक्ष्मी की कृपा पाने के लिए घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल और दीपों से जुड़े ...और पढ़ें
-1794104110980_m.webp)
दीवाली से जुड़े वास्तु टिप्स (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
मुख्य द्वार को साफ कर शुभ चिह्न बनाएं।
पूजा स्थल ईशान कोण में, सही दिशा में दीप जलाएं।
नवग्रह दोष मुक्ति के लिए विशेष दीपक अनुष्ठान करें।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज दीवाली के पावन पर्व पर डा. जय मदान लेकर आई हैं कुछ सरल मगर प्रभावशाली वास्तु उपाय, जो घर के हर कोने से नकारात्मकता को मिटाकर सुख, समृद्धि और महालक्ष्मी की कृपा को आपके आंगन में रोक लेंगे...
दीवाली की सुबह मैं सबसे पहले अपने घर के मुख्य द्वार को साफ करती हूं। मां लक्ष्मी का आगमन मुख्य प्रवेश द्वार से होता है। आज आप अपने घर की दहलीज के ठीक बाहर चूने से एक सीधी, साफ रेखा जरूर खींचें। यह रेखा दिव्य सुरक्षा कवच है जो नकारात्मक ऊर्जा को घर के भीतर कदम नहीं रखने देती। द्वार पर चावल के लेप या आलता से अंदर की ओर आती हुई मां लक्ष्मी की चरण- पादुकाएं बनाएं।
प्रवेश द्वार पर आध्यात्मिक पवित्रता बनाए रखने के लिए वहां जूते-चप्पल के स्टैंड या कूड़ेदान को हटाएं, नेमप्लेट साफ करें और यह सुनिश्चित करें कि दरवाजा बिना किसी रुकावट के पूरा खुलता हो। दरवाजे पर ताजा आम के पत्तों या गेंदे का तोरण सजाएं। मुख्य द्वार के दोषों को दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा के स्वागत के लिए नेमप्लेट के पास कुमकुम से श्री और द्वार के दोनों तरफ शुभ-लाभ लिखें।
सजावट से जगाएं सकारात्मक ऊर्जा
पूजा स्थल घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) हिस्से में स्थापित करें। पूजा करते समय पूर्व दिशा की ओर मुख रखें। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाओं को फर्श से थोड़ा ऊपर, एक साफ कपड़े से ढकी हुई चौकी पर स्थापित करें। यदि जगह की कमी या फ्लैट के लेआउट के कारण घर के उत्तर-पूर्व में पूजा स्थान बनाना संभव न हो, तो घर का पूर्वी या उत्तरी भाग इसके लिए अच्छा विकल्प है। लिविंग रूम के उत्तर-पूर्व कोने में एक समर्पित शेल्फ लगाकर भी पूजा स्थल तैयार कर सकते हैं।
शुभ रंग लाएंगे पवित्रता
पूजा कक्ष में रंगों का चयन वातावरण में आध्यात्मिक तरंगें घोलने का काम करता है। मंदिर की पृष्ठभूमि में क्रीम, आइवरी या हल्के पीले रंग के रेशमी कपड़े का प्रयोग करें। चौकी पर लाल या गुलाबी रेशमी वस्त्र बिछाएं। चौकी पर हाथ से कमल का चित्र बनाना भी शुभ होता है। इसके अलावा गोमती चक्र, कौड़ियां और एक चांदी का सिक्का लाल कपड़े में बांधकर पूजा के समय देवी के समक्ष रखें और बाद में इसे अपनी तिजोरी में संभालकर रखें। महालक्ष्मी पूजन के दौरान पूजा की थाली में चांदी का सिक्का, साबुत धनिया, कमलगट्टा, पीली कौड़ियां, रोली और शुद्ध घी रखें।
दीपों का सही चयन लाएगा संतुलन
पारंपरिक रूप से विषम संख्या (जैसे 3, 5, 11 या 21) में दीये जलाना शुभ माना जाता है। पूजा स्थान पर जो दीया रखें, उसकी बाती का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें। घर के हर कोने, खिड़कियों, तुलसी के पौधे और रसोई में पानी के स्थान के पास भी दीपक रखें। मुख्य पूजा के दीये के लिए शुद्ध देसी घी का उपयोग करें, जो पवित्रता का प्रतीक है। वहीं मुख्य द्वार के दीयों के लिए तिल या सरसों के तेल का उपयोग परंपरा के अनुकूल है।
दीपक से नवग्रह
मैं हर दीवाली घर के केंद्र स्थान यानी ब्रह्मस्थान या मंदिर में नौ दीपकों का एक विशेष अनुष्ठान करती हूं। आप भी एक थाली में दीपक जलाकर या नौ अलग-अलग दीयों में ग्रहों से जुड़ी सामग्रियां अर्पित करें। सूर्य के लिए दीपक में थोड़ी हल्दी और चंद्रमा के लिए साबुत चावल डालें। मंगल के लिए लाल मसूर दाल और बुध के लिए तीन हरी इलायची रखें। बृहस्पति के लिए गुड़ का एक छोटा टुकड़ा और शुक्र के लिए गुलाब की पंखुड़ियां अर्पित करें। अंत में शनि के लिए दस लौंग, राहु के लिए जौ और केतु के लिए काले-सफेद तिल दीपक में डालें। यह सरल सा उपाय आपके जीवन के सारे ग्रह दोषों को दूर कर देगा।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।