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Jeevan Darshan: 2026 में अपनी लाइफ को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने के लिए अपनाएं ये जादुई टिप्स

Published: Mon, 05 Jan 2026 12:45 PM (IST)

दुख से बाहर निकालने वाली सबसे बड़ी शक्ति ज्ञान है। भौतिक साधन क्षणिक राहत दे सकते हैं, लेकिन वे स्थायी ...और पढ़ें

परिवर्तन की प्रतीक्षा करने के बजाय स्वयं परिवर्तन का कारण बनें

परिवर्तन की प्रतीक्षा करने के बजाय स्वयं परिवर्तन का कारण बनें

श्री श्री रवि शंकर (आर्ट आफ लिविंग के प्रणेता आध्यात्मिक गुरु)। समय आपके शरीर को बदल देता है, पर आप में भी यह सामर्थ्य है कि आप समय को बदल सकें और उसे बेहतर बना सकें। कुछ लोग अच्छे समय के आने की प्रतीक्षा करते रहते हैं, जबकि कुछ लोग अपने विवेक और कर्म से समय को अच्छा बना देते हैं। एक निर्मल हृदय और तीक्ष्ण बुद्धि किसी भी समय को सार्थक बना सकती है।

प्रश्न यह है कि हम किस श्रेणी में आते हैं? जब व्यक्ति आध्यात्मिक पथ पर होता है, तब समय बहुत जल्दी बीत जाता है। मन की स्थिति संतुलित न हो, तो समय खिंचता हुआ लगता है। इसलिए आवश्यक है कि इस नए वर्ष के हर क्षण का उपयोग समाज और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव डालने के लिए किया जाए।

परिवर्तन की प्रतीक्षा करने के बजाय स्वयं परिवर्तन का कारण बनें। आज मानवता के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि हम पर्यावरण की रक्षा कैसे करें और आने वाली पीढ़ियों के लिए इस दुनिया को बेहतर कैसे बनाया जाए?

साथ ही यह भी विचार करना होगा कि हिंसा में उलझे लोगों को शांति की राह कैसे दिखाई जाए, दुखी मनों को सांत्वना कैसे दी जाए और लोगों के चेहरों पर मुस्कान कैसे लौटाई जाए? जीवन छोटा है, लेकिन उसको सार्थक करने के अवसर अनगिनत हैं। जब व्यक्ति देने के भाव से जीता है, तब जीवन स्वयं उसे वह सब देता है जिसकी उसे वास्तव में आवश्यकता होती है। जब हम संसार को कुछ लौटाने के लिए आगे बढ़ते हैं और ज्ञान व करुणा के प्रसार का संकल्प लेते हैं, तभी जीवन की सार्थकता स्पष्ट होती है।

दुख से बाहर निकालने वाली सबसे बड़ी शक्ति ज्ञान है। भौतिक साधन क्षणिक राहत दे सकते हैं, लेकिन वे स्थायी समाधान नहीं हैं। वास्तविक और दीर्घकालिक परिवर्तन विवेक और प्रज्ञा से ही संभव है। स्पष्ट दृष्टि न केवल समस्याओं को छोटा करती है, बल्कि समाधान के नए द्वार भी खोलती है। इस वर्ष हमें यह विचार करना चाहिए कि प्रेम, प्रकाश, विवेक और ज्ञान को अधिकतम कैसे फैलाया जाए।

प्रश्न यह भी है कि हम हर गांव और हर व्यक्ति तक कैसे पहुंचें? गांवों में आपका प्रतिस्पर्धी मोबाइल फोन है। मैं हमेशा कहता हूं कि हमें मोबाइल फोन से भी अधिक लोगों तक पहुंचना चाहिए। उन कोनों तक भी, जहां मोबाइल फोन भी नहीं पहुंचे हैं। केवल तकनीक ही पर्याप्त नहीं है, हमें मानवीय संवाद, सहभागिता और संवेदनशीलता के माध्यम से उन स्थानों तक पहुंचना होगा, जहां तकनीक की पहुंच सीमित है।

इस नए वर्ष में हमें संकल्प करना चाहिए कि हम विश्व पर सकारात्मक प्रभाव डालेंगे। बीते वर्ष ने हमें बहुत कुछ सिखाया है, क्या करना है और किन बातों से बचना है? हमने सफलताएं भी देखीं और कुछ गलत निर्णयों के परिणाम भी।

अब आवश्यकता है कि हम अतीत से सीख लेकर आगे बढ़ें - बिना पछतावे, बिना क्रोध और बिना तनाव के। अतीत की हर घटना चाहे वह सुखद हो या कठिन हमें कुछ न कुछ सिखाती है। अच्छी घटनाएं बताती हैं कि क्या दोहराना है और कठिन अनुभव यह सिखाते हैं कि किन बातों से बचना है। इस दृष्टि से देखें तो संसार का हर अनुभव हमारा शिक्षक है।

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