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    Samudra Manthan: आखिर क्यों हुआ था समुद्र मंथन, निकले थे ये 14 रत्न, पढ़ें कथा

    Updated: Mon, 26 May 2025 12:55 PM (IST)

    समुद्र मंथन से हलाहल नाम का विष निकला था। यह विष बेहद शक्तिशाली था। धार्मिक मान्यता के अनुसार महादेव ने सृष्टि की रक्षा के लिए विष को पी लिया था जिससे तेज जलन की वजह से महादेव का कंठ नीला पड़ गया। ऐसे में आइए जानते हैं समुद्र मंथन (Samudra Manthan) के बारे में।

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    Samudra Manthan Significance: समुद्र मंथन का महत्व

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में विष्णु पुराण का विशेष महत्व है। इस पुराण में समुद्र मंथन के बारे में विस्तार से बताया गया है। विष्णु पुराण के अनुसार, सावन के महीने में समुद्र मंथन हुआ था। समुद्र मंथन से 14 रत्न निकले थे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर क्यों हुआ था समुद्र मंथन (Samudra Manthan Story) और कौन-से रत्न निकले थे। अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए जानते हैं इसकी कथा के बारे में।

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    समुद्र मंथन की कथा

    पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि दुर्वासा (Devas and Asuras Mythology) महादेव के अवतार थे। एक बार ऐसा समय आया कि जब महर्षि दुर्वासा के श्राप की वजह से धन और वैभव विहीन हो गया, तो ऐसी स्थिति में देवता परेशान होकर जगत के पालनहार भगवान विष्णु की शरण में पहुचें। श्रीहरि ने देवताओं को असुरों के साथ समुद्र मंथन करने के लिए उपाय के बारे में बताया। भगवान विष्णु ने देवताओं से कहा कि समुद्र मंथन जो अमृत निकलेगा, उस अमृत को पीने से तुम अमर हो जाओगे।

    देवताओं ने इस बात की जानकारी राजा बलि को दी। वे भी समुद्र मंथन के लिए तैयार हो गए। इसके बाद वासुकी नाग की नेती और फिर मंदाचल पर्वत की मदद से समुद्र को मथा गया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि समुद्र मंथन से 14 चीजें निकलीं, जिन्हें रत्नों के नाम से जाना गया। इसके बाद इन 14 रत्नों को असुरों और देवताओं में बाटा गया, लेकिन अमृत कलश के बटबारे को लेकर देवताओं और असुरों के बीच विवाद खड़ा हो गया।

    यह भी पढ़ें: Samudra Manthan: कब और कैसे हुई चंद्र देव की उत्पत्ति? समुद्र मंथन से जुड़ा है कनेक्शन

    निकले थे ये 14 रत्न (14 Ratnas of Samudra Manthan)

    विष, कामधेनु, उच्चै:श्रवा, ऐरावत, कौस्तुभ मणि, कल्पवृक्ष, रंभा, देवी लक्ष्मी,  मदिरा, चंद्रमा, पारिजात पुष्प,  पांचजन्य शंख, धन्वन्तरि,अमृत  

    इस वजह से भगवान शिव को कहा जाता है नीलकंठ

    समुद्र मंथन से निकला विष बेहद तीव्र था, जिसकी वजह महादेव के कंठ में जलन होने लगी और उनका कंठ नीला पड़ गया है, जिसकी वजह भगवान शिव को नीलकंठ के नाम से जाना गया।  

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।