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    Vinayak Chaturthi 2024: फाल्गुन माह में कब है विनायक चतुर्थी? अभी नोट करें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    Updated: Tue, 12 Mar 2024 11:56 AM (IST)

    सनातन धर्म में विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi 2024) का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन पर भक्त भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करने के व्रत भी रखते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस बार फाल्गुन माह में विनायक चतुर्थी 13 मार्च को मनाई जाएगी।

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    Vinayak Chaturthi 2024: फाल्गुन माह में कब है विनायक चतुर्थी? अभी नोट करें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Falgun Vinayaka Chaturthi 2024: सनातन धर्म में सभी पर्व किसी न किसी देवी-देवता से संबंधित होते हैं। ऐसे में चतुर्थी तिथि भगवान गणेश जी को समर्पित है। हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणपति बप्पा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही व्रत किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है। आइए, फाल्गुन माह की विनायक चतुर्थी की तिथि, शुभ मुहूर्त एवं पूजा विधि के बारें में जानते हैं।

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    फाल्गुन माह विनायक चतुर्थी 2024 शुभ मुहूर्त (Falgun Vinayaka Chaturthi 2024 Shubh Muhurat)

    पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 13 मार्च 2024 को सुबह 04 बजकर 03 मिनट से होगी और इसका समापन अगले दिन यानी 14 मार्च 2024 को देर रात्रि को 01 बजकर 25 मिनट पर होगा। ऐसे में फाल्गुन माह में विनायक चतुर्थी 13 मार्च को मनाई जाएगी।

    फाल्गुन विनायक चतुर्थी 2024 पूजा विधि (Falgun Vinayaka Chaturthi 2024 Puja Vidhi)

    • विनायक चतुर्थी के दिन ब्रम्हा मुहूर्त में उठें और दिन की शुरुआत भगवान गणेश जी के ध्यान से करें।
    • इसके बाद स्नान करें और हरे रंग के वस्त्र धारण करें।
    • अब लकड़ी की चौकी पर कपड़ा बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें।
    • गाय के घी का दीपक जलाएं, माला और दूर्वा घास अर्पित करें।
    • इसके बाद आरती करें और गणेश चालीसा का पाठ करें।
    • अब भगवान गणेश जी को मोदक, फल और मिठाई का भोग लगाएं।
    • इसके पश्चात लोगों में प्रसाद का वितरण करें और खुद भी ग्रहण करें।

    पूजा के दौरान इन मंत्रों का करें जाप

    1.गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।

    नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक :।।

    धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।

    गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम।।

    2.ॐ श्रीं गं सौभ्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।

    3. ॐ हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा।

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    डिसक्लेमर: 'इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।'