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    Vat Savitri Vrat 2025: आज है वट सावित्री व्रत, इस विधि से करें पूजा, नोट करें भोग, मंत्र से लेकर सबकुछ

    Updated: Mon, 26 May 2025 08:46 AM (IST)

    वट सावित्री व्रत बेहद फलदायी माना जाता है। इस व्रत से पति की लंबी आयु और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यह व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाया जाता है। साल 2025 में यह 26 मई यानी आज मनाया जा रहा है। इस दिन वट वृक्ष की पूजा की जाती है।

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    Vat Savitri Vrat 2025: वट सावित्री व्रत 2025 पूजा मुहूर्त।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत महत्व रखता है। इस व्रत का पालन करने से पति की लंबी आयु और अंखड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। हर साल यह व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल यह पावन व्रत (Vat Savitri Vrat 2025) 26 मई, 2025 यानी आज के दिन रखा जा रहा है, तो आइए इस आर्टिकल में इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार है।

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    वट सावित्री व्रत 2025 पूजा मुहूर्त (Vat Savitri Vrat 2025 Puja Muhurat)

    पंचांग को देखते हुए वट सावित्री व्रत के दिन सुबह 8 बजकर 52 मिनट से लेकर 10 बजकर 25 मिनट तक चौघड़िया मुहूर्त रहेगा। फिर अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा दोपहर में 3 बजकर 45 मिनट से 5 बजकर 28 मिनट तक भी पूजा का शुभ समय रहेगा। इस दौरान आप पूजा-पाठ और अन्य मांगलिक काम कर सकते हैं।

    वट सावित्री व्रत की पूजा विधि (Vat Savitri Vrat 2025 Puja Vidhi)

    • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल रंग के कपड़े पहनें।
    • महिलाएं सोलह शृंगार जरूर करें।
    • सावित्री और सत्यवान की तस्वीर, जल, अक्षत, रोली, मौली, धूप, दीप, फल, फूल-माला और घर बनी मिठाई आदि चीजें इक्ट्ठा करें।
    • आस-पास किसी वट वृक्ष के पास जाएं।
    • वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाएं।
    • फिर विधिपूर्वक पूजा करें।
    • वट वृक्ष के चारों ओर मौली का धागा सात बार लपेटें।
    • हर परिक्रमा के साथ अपने पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।
    • सावित्री और सत्यवान की कथा सुनें या पढ़ें।
    • आखिरी में आरती करें और पूजा में हुई भूल-चूक के लिए माफी मांगे।
    • प्रसाद से व्रत का पारण करें।

    वट सावित्री व्रत के भोग (Vat Savitri Vrat Bhog 2025)

    वट सावित्री की पूजा में कई तरह के फल और मिठाई चढ़ाएं जाते हैं। जैसे - आम, केला, खजूर, व अन्य मौसमी फल आदि। कई क्षेत्रों में इस दिन पूड़ी, हलवा और चने की दाल भी भोग के रूप में चढ़ाई जाती है।

    वट सावित्री व्रत के पूजा मंत्र (Vat Savitri Vrat 2025 Puja Mantra)

    • ॐ सावित्र्यै नमः
    • ॐ सत्यवानाय नमः
    • वट सिंचामि ते मूलं सलिलैरमृतोपमैः । यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले ।

      तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च सम्पन्नं कुरु मां सदा ॥

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।