Vat Savitri Purnima 2025: इस दिन मनाई जाएगी व्रट सावित्री पूर्णिमा, जानें पूजा नियम और शुभ मुहूर्त
वट सावित्री पूर्णिमा व्रत (Vat Savitri Purnima 2025) को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं सौभाग्य की प्राप्ति के लिए उपवास रखती हैं और पूजा करती हैं। इस व्रत को लेकर लोगों की अपनी-अपनी मान्यताएं हैं। कहा जाता है कि इस उपवास का पालन करने से पति की आयु लंबी होती है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। व्रट सावित्री पूर्णिमा व्रत का हिंदुओं के बीच खास महत्व है। इस दिन सुहागिन महिलाएं उपवास रखती हैं और पूजा-अर्चना करती हैं। इस व्रत का पालन करने से अखंड-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। हर साल यह व्रत ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है।
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल यह पावन व्रत (Vat Savitri Purnima Vrat 2025) कब रखा जाएगा? आइए इस आर्टिकल में पूजा विधि से लेकर सबकुछ जानते हैं।
व्रट सावित्री पूर्णिमा 2025 कब है? (Vat Savitri Purnima 2025 Shubh Muhurat)
हिंदू पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 10 जून को सुबह 11 बजकर 35 मिनट पर शुरू होगी और वहीं, इसका समापन अगले दिन यानी 11 जून को दोपहर 01 बजकर 13 मिनट पर होगा। ऐसे में 10 जून (Kab Hai Jyeshtha Purnima 2025) को व्रट सावित्री पूर्णिमा व्रत रखा जाएगा। हालांकि स्नान-दान 11 जून को किया जाएगा।
व्रट सावित्री पूर्णिमा 2025 की पूजा विधि (Vat Savitri Purnima 2025 Puja Vidhi)
- इस दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
- लाल रंग के कपड़े पहनें।
- इस दिन महिलाएं 16 शृंगार करें।
- वट वृक्ष के पास जाएं और उसकी सफाई करें।
- वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाएं।
- फिर उसकी विधिवत पूजा करें।
- वट वृक्ष के चारों ओर मौली का धागा सात बार लपेटें।
- हर परिक्रमा के साथ अपने पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।
- सावित्री और सत्यवान की कथा पढ़ें या फिर सुनें।
- अंत में आरती करें।
- सात्विक भोजन से व्रत का पारण करें।
- व्रती तामसिक चीजों से दूर रहें।
व्रट सावित्री पूर्णिमा 2025 भोग (Vat Savitri Purnima 2025 Bhog)
व्रट सावित्री पूर्णिमा व्रत में विभिन्न प्रकार के फल और मिठाई अर्पित किए जाते हैं। इसके अलावा कुछ जगहों पर इस दिन पूड़ी, हलवा और चने की दाल भी भोग के रूप में चढ़ाए जाते हैं। कहा जाता है इन भोग को अर्पित करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही जीवन में बरकत बनी रहती है।
पूजा मंत्र ( Puja Mantra)
- वट सिंचामि ते मूलं सलिलैरमृतोपमैः । यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले।
तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च सम्पन्नं कुरु मां सदा ॥
- अवैधव्यं च सौभाग्यं देहि त्वं मम सुव्रते। पुत्रान् पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तु ते॥
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