डायबिटीज ठीक करने के लिए इस मंदिर में लगती है भीड़, प्रसाद में चढ़ाते हैं शक्कर
भारत में डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं लेकिन तमिलनाडु के वेन्नी करुम्बेश्वर मंदिर में लोग डायबिटीज ठीक होने की उम्मीद से आते हैं। यहां भक्त शक्कर को प्रसाद के रूप में चढ़ाते हैं क्योंकि उनका मानना है कि इससे उनकी बीमारी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत में मधुमेह एक महामारी के रूप में उभरी है। देश में 18 साल के ज्यादा उम्र के 7.7 करोड़ से ज्यादा लोग डायबिटीज के शिकार बन चुके हैं। साल 2022 में लैंसेट द्वारा किए गए एक अध्ययन में बताया गया कि दुनिया भर में मधुमेह मरीजों की संख्या 21.2 करोड़ से ज्यादा है। इसमें से 62% का इलाज नहीं हो पाया है।
इस लिहाज से भारत अगर डायबिटीज की कैपिटल कहें, तो यह गलत नहीं होगा। सबसे गंभीर बात यह है कि इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है। इसे बस खान-पान की आदतों को सुधार कर कंट्रोल किया जा सकता है। मगर, इससे पूरी तरह से छुटकारा पाना आसान नहीं है।
इन सब के बीच भारत में एक ऐसा मंदिर चर्चा में हैं, जहां डायबिटीज की बीमारी खत्म हो जाती है। तमिलनाडु राज्य को तिरुवरुर के पास स्थित वेन्नी करुम्बेश्वर मंदिर (Vennikurumbeswarar Temple) में इसी विश्वास के साथ हजारों की संख्या में भक्त इस लाइलाज बीमारी से छुटकारा पाने की आस में देशभर से पहुंचते हैं।
स्थानीय लोगों बुलाते हैं शुगर मंदिर
यही वजह है कि स्थानीय लोग इस मंदिर को शुगर मंदिर के नाम से भी बुलाते हैं। यहां प्रसाद भी बड़ा ही अनोखा चढ़ाया जाता है। शुगर के मरीज यहां प्रसाद के रूप में शक्कर चढ़ाते हैं। लोगों की मान्यता है कि ऐसा करने से उनकी बीमारी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।
यह भी पढ़ें- व्रत के दौरान पीरियड हो जाने से क्या टूट जाता है व्रत, जानिए ऐसी ही कुछ और जरूरी बातें
शिव जी को समर्पित है यह मंदिर
वेन्नी करुम्बेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। भक्तों का मानना है कि इस मंदिर में शक्कर चढ़ाने और शुगर लेवल कंट्रोल हो जाता है। कुछ लोगों का दावा है कि इस मंदिर में आने के बाद उनकी शुगर पूरी तरह से खत्म हो गई। इसी वजह से इस मंदिर में डायबिटीज से मरीजों की लंबी लाइन लगी रहती है।
कैसे पहुंचा जाए वेन्नी करुम्बेश्वर मंदिर
वेन्नी करुम्बेश्वर मंदिर तमिलनाडु के तिरुवरुर जिले में स्थित है। यहां रेलवे स्टेशन भी है, जहां पहुंचने के बाद बस या टैक्सी से मंदिर पहुंचा जा सकता है। तमिलनाडु राज्य सड़क परिवहन निगम की बस या टैक्सी से भी यहां पहुंचा जा सकता है। सबसे नजदीकी एयरपोर्ट 100 किमी दूर स्थित तिरुचिरापल्ली अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है।
यह भी पढ़ें- Ashadha Month 2025: 12 जून से लगेगा आषाढ़, जानिए किस देवता को समर्पित है ये माह और क्या करें
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।