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Pradosh Vrat 2025 Date: 03 या 04 नवंबर, प्रदोष व्रत कब है? यहां नोट करें सही तिथि और शुभ मुहूर्त

Published: Fri, 31 Oct 2025 09:00 PM (IST)

प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat 2025 Date) का फल दिन अनुसार मिलता है। सोम प्रदोष व्रत करने से मनचाही मुराद पूरी ...और पढ़ें

Pradosh Vrat 2025 Date: प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

Pradosh Vrat 2025 Date: प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

HighLights

  1. प्रदोष व्रत देवों के देव महादेव को समर्पित होता है।

  2. इस दिन शिवजी और मां पार्वती की पूजा की जाती है।

  3. शिवजी की पूजा करने से हर परेशानी से मुक्ति मिलती है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सोमवार का दिन देवों के देव महादेव को प्रिय है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही शिव-शक्ति की कृपा से घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। इसके अलावा, जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के दुख और संकट दूर हो जाते हैं।

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सोमवार के अलावा त्रयोदशी और चतुर्दशी तिथि पर देवों के देव महादेव और मां पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत मनाया जाता है। इस व्रत की महिमा शिव पुराण में विस्तार पूर्वक बताया गया है। आइए, कार्तिक माह की आखिरी प्रदोष व्रत की सही तिथि और शुभ मुहूर्त जानते हैं-

प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त (Pradosh Vrat Shubh Muhurat)

  • त्रयोदशी तिथि की शुरुआत - 03 नवंबर को सुबह 05 बजकर 07 मिनट पर
  • त्रयोदशी तिथि की समापन - 04 नवंबर को देर रात 02 बजकर 05 मिनट पर

प्रदोष व्रत (Shukra Pradosh Vrat 2025 Kab Hai)

त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत मनाया जाता है। इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा की जाती है। इसके लिए प्रदोष व्रत के लिए संध्या बेला (प्रदोष काल) का मुहूर्त देखा जाता है। प्रदोष काल सूर्यास्त से शुरू होता है। यह समय भगवान शिव की पूजा के लिए उत्तम माना जाता है। इस दौरान भगवान शिव और मां पार्वती की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। साथ ही शिव-शक्ति की इस प्रकार गणना से 03 नवंबर को सोम प्रदोष व्रत मनाया जाएगा।

सोम प्रदोष व्रत शुभ योग (Pradosh Vrat Shubh Yog)

कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर हर्षण योग का संयोग बन रहा है। इसके साथ ही प्रदोष व्रत पर रवि और शिववास योग का भी निर्माण हो रहा है। शिववास योग के दौरान भगवान शिव कैलाश पर नंदी की सवारी करेंगे। इन योग में भगवान शिव की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होगी।

पंचांग

  • सूर्योदय - सुबह 06 बजकर 34 मिनट पर
  • सूर्यास्त - शाम 05 बजकर 34 मिनट पर
  • ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 51 मिनट से 05 बजकर 43 मिनट तक
  • विजय मुहूर्त - दोपहर 01 बजकर 54 मिनट से 02 बजकर 38 मिनट तक
  • गोधूलि मुहूर्त - शाम 05 बजकर 34 मिनट से 06 बजे तक
  • निशिता मुहूर्त - रात्रि 11 बजकर 39 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।