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यूपी-बिहार में अष्टमी, नवमी और विजयदशमी पर खोइछा भरने की क्या है परंपरा? मां दुर्गा की विदाई से जुड़ी है वजह

Published: Mon, 19 Oct 2026 10:49 AM (IST)

शारदीय नवरात्र में यूपी-बिहार में निभाई जाने वाली खोइछा परंपरा का महत्व बताया गया है, जिसमें सुहागिन महिलाएं मां दुर्गा ...और पढ़ें

क्यों भरा जाता है खोइछा? (Picture Credit: AI Generated)

क्यों भरा जाता है खोइछा? (Picture Credit: AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। देशभर में शारदीय नवरात्र के पर्व को बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में कई तरह की परंपराएं निभाई जाती हैं। इन्हीं में शामिल है शारदीय नवरात्र की अष्टमी, नवमी और विजयदशमी के दिन मां दुर्गा का खोइछा भरने की परंपरा।

खोइछा की पोटली में चावल, सुहाग का सामान और हल्दी की गांठ आदि चीजों को रखा जाता है। इन चीजों को शुभता, समृद्धि और सुहाग का प्रतीक माना जाता है। यह रस्म मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा निभाई जाती है, जो मां दुर्गा को अपनी बेटी मानकर उनका आदर-सत्कार करती हैं। इस बात को जानकर आपके मन में सवाल जरूर आ रहा होगा कि आखिर खोइछा परंपरा क्या है और इसमें क्या किया जाता है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको विस्तार से बताते हैं इस खास परंपरा के बारे में।

क्यों भरा जाता है मां दुर्गा का खोइछा?

जिस प्रकार जब बेटी मायके से विदा होती है, तो उसको विदा करते समय उसका आंचल फल, चावल और सुहाग की सामग्रियों से भरा जाता है। ठीक उसी तरह जब शारदीय नवरात्र के समापन पर मां दुर्गा को विदा किया जाता है, तो उनकी गोद में सुहाग से जुड़ी चीजों को लाल कपड़े में बांधकर अर्पित किया जाता है। इस खास परंपरा को खोइछा कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां दुर्गा को खोइछा अर्पित करने से पति की लंबी आयु का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। शारदीय नवरात्र के आखिरी में खोइछा की यह परंपरा बिहार और उत्तर प्रदेश में निभाई जाती है।

खोइछा में क्या शामिल किया जाता है?

  • चावल
  • दूर्वा
  • हल्दी की गांठ
  • सिंदूर
  • पान के पत्ते
  • सुपारी
  • नारियल
  • कुछ सिक्के
  • मिठाई
  • सुहाग का सामान
  • लाल कपड़ा

कैसे भरा जाता है खोइछा?

अष्टमी, नवमी या विजयदशमी के दिन मां दुर्गा की मूर्ति के सामने एक साफ लाल कपड़ा बिछा दें। इसके बाद उस कपड़े पर सुहाग की सामग्री रख दें। इसके अलावा चावल, दूर्वा, हल्दी, मिठाई, फल, 5 पान के पत्ते, 5 सुपारी आदि चीजों को रखें। सभी चीजों को रखकर कपड़े की एक पोटली बना लें। इसे श्रद्धापूर्वक माता रानी को अर्पित करें। अब पोटली के साइड में देसी घी का दीपक जलाएं। इसके बाद मां दुर्गा से सच्चे मन से जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें और अपनी मनोकामना बोलें। साथ ही पूजा के दौरान हुई किसी भी गलती के लिए देवी के सामने हाथ जोड़कर माफी मांगें।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।