महानवमी 2026: मां दुर्गा का पाना है आशीर्वाद, तो इस शुभ मुहूर्त और सही विधि से करें कन्या पूजन, जान लें नियम
शारदीय नवरात्र में महानवमी 2026 पर कन्या पूजन का विशेष महत्व है, जिससे मां दुर्गा की कृपा और व्रत का ...और पढ़ें

कैसे करें कन्या पूजन (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
कन्या पूजन से मां दुर्गा की कृपा मिलती है।
2 से 10 वर्ष की कन्याओं का पूजन करें।
सात्विक भोजन कराकर आशीर्वाद प्राप्त करें।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शारदीय नवरात्र में महानवमी (Mahanavami 2026) के दिन पूजा करने के बाद कन्या पूजन करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कन्या पूजन (Mahanavami 2026 Kanya Pujan 2026) करने से साधक को शारदीय नवरात्र व्रत का पूर्ण फल और मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, 2 से 10 वर्ष की आयु की कन्याओं को देवी का सबसे पवित्र और जाग्रत रूप माना जाता है। इसलिए इस उम्र की कन्याओं का कन्या पूजन करना चाहिए।
वैदिक पंचांग के अनुसार, नवमी तिथि की शुरुआत आज यानी 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर होगी। ऐसे में अष्टमी तिथि के समापन के बाद नवमी का कन्या पूजन किया जा सकता है। आइए इस आर्टिकल में आपको विस्तार से बताते हैं कि नवमी तिथि पर कैसे करें कन्या पूजन।
महानवमी 2026 डेट और टाइम (Mahanavami 2026 Date and Time)
नवमी तिथि का प्रारंभ: 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट
नवमी तिथि का समापन: 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट
जो लोग आज नवमी का कन्या पूजन कर रहे हैं, वो सुबह 10 बजकर 52 मिनट के बाद कर सकते हैं। वहीं, मंगलवार के दिन कन्या पूजन दोपहर 12 बजकर 30 मिनट से पहले कर लें।
महानवमी कन्या पूजन विधि (Mahanavami Kanya Pujan Vidhi)
- इस दिन कन्या पूजन के लिए 9 कन्याओं और 1 बालक को सम्मानपूर्वक आमंत्रित करें।
- उनके पैर साफ पानी से धोएं।
- अब कन्याओं और बालक को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठाएं।
- कन्याओं और बटुक भैरव (बालक) को तिलक लगाएं और हाथ में कलावा बांधें।
- कन्याओं को माता की चुनरी पहनाएं।
- माता रानी की पूजा और भोग लगाने के बाद काले चने, सूजी का हलवा और पूरी का भोजन कराएं।
- भोजन कराने के बाद उपहार और दक्षिणा दें।
- अंत में सभी कन्याओं और बालक के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लें।
इन बातों का रखें ध्यान
- कन्या पूजन के लिए भोजन पूरी तरह से सात्विक होना चाहिए।
- कन्याओं को आसन पर बैठाना चाहिए।
- इसके अलावा कन्याओं को डांटना या उन पर क्रोध करना वर्जित है।
- कन्या पूजन के दौरान मन में किसी के प्रति गलत विचार न लाए
- कन्याओं को भोजन कराने से पहले मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना करें और भोग जरूर लगाएं।
यह भी पढ़ें- कन्या पूजन 2026: हलवा, पूड़ी और चने के बिना क्यों अधूरी मानी जाती है मां दुर्गा की पूजा?
यह भी पढ़ें- कन्या पूजन 2026: महा अष्टमी और नवमी पर कंजक खिलाने का सबसे शुभ समय क्या है? पूरी जानकारी यहां पढ़ें
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
