कन्या पूजन 2026: हलवा, पूड़ी और चने के बिना क्यों अधूरी मानी जाती है मां दुर्गा की पूजा?
शारदीय नवरात्र की अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन (Kanya Pujan 2026) में पूड़ी, हलवा और काले चने का प्रसाद ...और पढ़ें

कन्या पूजन में हलवा पुरी चना का महत्व

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शारदीय नवरात्र (Shardiya Navratri 2026) की अष्टमी और नवमी तिथि के मौके पर कन्या पूजन का आयोजन किया जाता है। इस साल शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर, 2026 रविवार से हुई थी, जो 20 अक्टूबर, मंगलवार को विजयादशमी के मौके पर समाप्त होगी। इस दौरान अष्टमी और नवमी तिथि पर घर-घर में कन्या पूजन (Kanya Pujan 2026) की जाती है।
जिसमें छोटी-छोटी कन्याओं को पूरी, हलवा और काले चना का प्रसाद खिलाया जाता है। उत्तर भारत में इस पारंपरिक भोजन को तैयार करना उतना ही जरूरी है, जितना की दुर्गा पूजा से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान का पालन करना। इस दिन लड़कियों को माता रानी का स्वरूप मानकर उनकी सच्चे मन से सेवा की जाती है और श्रद्धा, स्नेह और सम्मान के साथ भोजन खिलाया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हर साल कन्या पूजा के मौके पर पूड़ी, हलवा और चना का प्रसाद ही क्यों परोसा जाता है?
कन्या पूजन पर क्यों चढ़ाया जाता है हलवा, पूड़ी और काला चना?
कन्या पूजन के दौरान कन्याओं को मां दुर्गा की दिव्य स्त्री शक्ति का प्रतीक मानकर उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। पारंपरिक प्रार्थना करने के बाद भक्त उन्हें प्रसाद के रूप में भोजन परोसते हैं और इस तरह आतिथ्य सत्कार के जरिए से मां दुर्गा के प्रति भक्ति भावना और कृतज्ञता जाहिर की जाती है।
हलवा, पूरी और काला चना का यह खास संयोजन उत्तर भारतीय घरों में काफी लोकप्रिय है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह उत्सव कन्या को तृप्त करने वाला और कई मेहमानों के लिए तैयार करने में काफी आसान है। यह प्रसाद अन्न दान यानी भोजन देने के पारंपरिक मूल्य को भी दर्शाता है।
कन्या पूजन में हलवा, पूड़ी और चना किसका प्रतीक है?
कन्या पूजन में बनने वाला सूजी, घी और चीनी से तैयार किया गया हलवा परोसा जाता है। यह पारंपरिक भोग मिठास का प्रतीक माना जाता है। हलवा उत्सव से भी जुड़ा माना जाता है। भारतीय घरों में कन्या पूजन के दौरान इसे खासतौर पर तैयार किया जाता है।
इसके अलावा हलवा, पूड़ी और चना मां दुर्गा का सबसे प्रिय प्रसाद माना जाता है। ये खाद्य पदार्थ शुद्ध, सात्विक और पवित्र माने जाते हैं, जो मां दुर्गा के लिए सम्मान और भक्ति की भावना को दर्शाता है।
चना जिसे शक्ति और ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है और पूड़ी समृद्धि और संतुष्टि का प्रतीक मानी जाती है।
कन्या पूजा के दौरान यह संयोजन उत्तर भारत में काफी प्रचलित है। हालांकि क्षेत्रीय रीति-रिवाजों और पारिवारिक मान्यताओं के मुताबिक भोजन और अनुष्ठान अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ परिवारों में इस दिन फल, मिठाई या अन्य तरह के प्रसाद चढ़ाए जाते हैं।
मौसम के हिसाब से अनुकूल
शारदीय नवरात्र आमतौर पर सितंबर-अक्टूबर महीने में आती है, जब मौसम में बदलाव देखने को मिलता है। इस दौरान सर्दियों की शुरुआत धीरे-धीरे होने लगती है। ऐसे में शरीर को गर्म रखने वाला खाना बेहद जरूरी माना जाता है। ऐसे में चना, पूरी और गर्म हलवा न सिर्फ पौष्टिक भोजन है, बल्कि शरीर में गर्मी और ऊर्जा भी प्रदान करते हैं।
यह भी पढ़ें- कंजक पूजन में कन्याओं के पैरों में आलता क्यों लगाया जाता है? सिर्फ परंपरा नहीं, छिपे हैं कई गूढ़ रहस्य
यह भी पढ़ें- शारदीय नवरात्र में पहली बार कर रहे हैं कन्या पूजन? दहलीज लांघने से लेकर विदाई तक, गांठ बांध लें ये 5 नियम
अस्वीकरण: इस लख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।
