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शारदीय नवरात्र में पहली बार कर रहे हैं कन्या पूजन? दहलीज लांघने से लेकर विदाई तक, गांठ बांध लें ये 5 नियम

Published: Thu, 15 Oct 2026 03:00 PM (IST)

शारदीय नवरात्र में पहली बार कन्या पूजन करने वालों के लिए विशेष नियम बताए गए हैं। कन्याओं के घर में ...और पढ़ें

शारदीय नवरात्र में कन्या पूजन की विधि क्या है? (Picture Credit: AI Generated)

शारदीय नवरात्र में कन्या पूजन की विधि क्या है? (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. नौ कन्याओं और एक बटुक का पूजन करें।

  2. कन्याओं के चरण धोकर आलता लगाएं, चुनरी बांधें।

  3. भोजन कराकर दक्षिणा दें, आशीर्वाद लें।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शारदीय नवरात्र को हिंदू धर्म में बहुत धूम-धाम से मनाया जाता है और भक्त इन नौ दिनों में माता दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं।

यह वो समय होता है जिसमें भक्तजन माता की भक्ति और शक्ति का अनुभव करते हैं और इसकी पूर्णता तभी मानी जाती है जब भक्त विधि-विधान के साथ अष्टमी या नवमी तिथि के दिन कन्या पूजन करते हैं।

इस दिन 2 से 10 साल तक की कन्याओं का पूजन करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है और इन्हें माता दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। अगर आप शारदीय नवरात्र में पहली बार कन्या पूजन करने जा रहे हैं, तो आपको कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए जिससे माता का आशीर्वाद बना रहे। आइए आपको बताते हैं उन नियमों के बारे में।

कितनी कन्याओं का पूजन करें?

नए घर में आपको पहली बार कन्या पूजन नौ कन्याओं का करना चाहिए और साथ में बटुक यानी भैरव जी के रूप में एक बालक को बैठाना चाहिए। यदि किसी कारण से कन्याएं न मिल रही हों तो आप 1,3,5 या 7 कन्याओं का पूजन भी कर सकते हैं, लेकिन साथ में बालक को बैठाना जरूरी माना जाता है।

कन्याओं के घर में प्रवेश करने पर क्या करें?

नवरात्रि में अष्टमी या नवमी तिथि पर जब भी आप कन्या पूजन करें तब सभी कन्याओं को दहलीज पर प्रवेश करते समय ही उनके चरणस्पर्श करें और मुख्य द्वार के पास ही कन्याओं के पैर धुलाएं। इस दिन पूजी जाने वाली सभी कन्याओं को माता दुर्गा का ही स्वरूप माना जाता है, इसलिए उनका पूजन शुरू ाकरने से पहले पैरों को धोकर एक-एक करके सभी कन्याओं को पैरों में आलता जरूर लगाएं।

कन्या पूजन का सही तरीका क्या है?

  • सभी कन्याओं के घर में प्रवेश करने के बाद आप उन्हें साफ आसान पर बैठाएं और मन ही मन संकल्प लें कि आप यह पूजन सभी कन्याओं को माता दुर्गा का स्वरूप मानकर करने जा रहे हैं और माता हमेशा आपके घर में अपनी कृपा दृष्टि बनाएं रखें।
  • सभी कन्याओं के सिर पर माता की चुनरी बांधें और और माथे पर कुमकुम लगाएं।
  • सभी कन्याओं और भैरव स्वरूप बालक को एक साथ भोजन परोसें और जय माता दी का जयकारा लगाते हुए भोजन आरंभ कराएं।
  • आपको कन्या भोजन कराते समय भोजन को कुछ मात्रा दोहरानी जरूर चाहिए और इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हर कन्या भोजन अवश्य ग्रहण करे।

कन्या भोजन के बाद दक्षिणा और उपहार दें

सभी कन्याओं का पूजन करने के बाद आपको उन्हें अपनी सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा और उपहार अवश्य देने चाहिए। कन्या पूजन के समापन के बाद सभी कन्याओं के चरण छूकर उनसे आशीर्वाद अवश्य लें और अपनी किसी भी गलती की क्षमा प्रार्थना करें।

कन्याओं को लाल चुनरी ओढ़ाएं

कन्या पूजन के समापन पर सभी कन्याओं को माता की लाल चुनरी जरूर ओढ़ानी चाहिए, लाल चुनरी में सभी कन्याओं को घर से श्रद्धा पूर्वक विदा करें और यह प्रार्थना करें कि माता का वास सदैव आपके घर में बना रहे।

यदि आप नए घर में प्रवेश करने के बाद पहली बार इस तरह से शारदीय नवरात्र में कन्या पूजन करेंगे तो आपके जीवन में सदैव माता दुर्गा की कृपा दृष्टि बनी रहेगी।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।