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कंजक पूजन में कम से कम कितनी कन्याओं की पूजा करनी चाहिए? हर संख्या का अपना अलग है महत्व

Published: Wed, 14 Oct 2026 01:00 PM (IST)

शारदीय नवरात्र में कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है, इस दिन कन्याओं को माता दुर्गा का स्वरूप मानकर उनका ...और पढ़ें

नवरात्र कन्या पूजन: जानें कितनी कन्याओं का पूजन है शुभ (Picture Credit: AI Generated)

नवरात्र कन्या पूजन: जानें कितनी कन्याओं का पूजन है शुभ (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. कन्या पूजन में 9 कन्याओं को पूजना सबसे शुभ।

  2. 9 कन्याएं न मिलें तो विषम संख्या में पूजन करें।

  3. कन्याओं के साथ बटुक भैरव को भी अवश्य बैठाएं।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शारदीय नवरात्र के उपवास के बाद कन्या पूजन से ही व्रत की पूर्णता मानी जाती है। इस दौरान भक्त नौ दिनों तक माता दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करते हैं और अष्टमी या नवमी तिथि के दिन कन्याओं को श्रद्धा पूर्वक पूजा जाता है और उन्हें भोजन कराया जाता है।

इस दौरान पूजी जाने वाले नौ कन्याओं को माता दुर्गा के नौ रूपों से जोड़ा जाता है। कन्या पूजन के दिन लोग अपने घरों में छोटी कन्याओं को आमंत्रित करते हैं और श्रद्धा पूर्वक उनके पैर धोकर उन्हें उचित आसन पर बैठाकर उनका पूजन करते हैं। इस दिन मुख्य रूप से हलवा और चने का भोग कन्याओं को लगाया जाता है।

मान्यता है कि नौ दिनों के पूजन के बाद घर में 9 कन्याओं और एक लंगूर को आमंत्रित करके उनकी पूजा करनी चाहिए, लेकिन कई बार यह सवाल मन में आता है कि अगर किसी वजह से 9 कन्याएं न मिलें तो क्या करना चाहिए? आइए आपको बताते हैं कि कम से कम आप कितनी कन्याओं को भोजन करा सकते हैं और माता का आशीर्वाद ले सकते हों।

कन्या पूजन के लिए कितनी कन्याओं को शुभ माना जाता है?

नवरात्रि के हर दिन मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान नवरात्रि के अंतिम दो दिनों अष्टमी और नवमी का अधिक महत्व होता है क्योंकि इन्हीं दिनों में कन्या पूजन किया जाता है।

मुख्य रूप से इस दिन नौ कन्याओं को पूजना और भोजन कराना चाहिए क्योंकि इन्हें माता के नौ स्वरूपों से जोड़कर देखा जाता है। इन सभी कन्याओं के साथ आपको 1 बटुक भैरव को भी बैठाना चाहिए। कंजक पूजन के लिए इस संख्या को सबसे शुभ माना जाता है।

कन्या पूजन में 9 कन्याएं न मिलें तो क्या करें?

यदि किसी कारणवश आपको 9 की संख्या में कन्याएं न मिल पाएं तो आप किसी भी विषम संख्या जैसे 1, 3,5 या 7 कन्याओं का श्रद्धापूर्वक पूजन करें और उन्हें सामर्थ्य अनुसार भोजन कराने के बाद उपहार दें।

कन्या पूजन में हर एक कन्या की संख्या का अपना अलग महत्व होता है और इन्हें माता के अलग-अलग रूपों में देखा जाता है। हालांकि, आपको इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि कन्याओं की संख्या कितनी भी हो आप उनके साथ बटुक भैरव को अवश्य आमंत्रित करें।

कन्या पूजन के लिए हर संख्या का महत्व

9 कन्याएं: यदि आपको कन्या पूजन के लिए 9 कन्याएं मिल जाएं तो ये माता दुर्गा के नौ स्वरूपों को प्रतीक होती हैं।
7 कन्याएं: सात कन्याओं का पूजन कालरात्रि और अन्य शक्तियों की कृपा पाने का माध्यम माना जाता है।
5 कन्याएं: यदि आप 5 कन्याओं का पूजन करते हैं, तो ये पांच देवियों का स्वरूप होती हैं।
3 कन्याएं: तीन कन्याओं को त्रिदेवी यानी महासरस्वती, महालक्ष्मी और महाकाली का स्वरूप मानकर पूजा जाता है। जो विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
1 कन्या: यदि आप कम से कम 1 कन्या का पूजन भी कर रहे हैं तो ये माता दुर्गा के दिव्य स्वरूप को दिखाती है और उनकी कृपा पाने का एक माध्यम होती है।

यदि आप इन नियमों का पालन करते हुए शारदीय नवरात्र में कन्याओं का पूजन करेंगे, तो माता की विशेष कृपा प्राप्त होगी।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।